क्या खत्म होने वाला था रोहित शर्मा का क्रिकेट करियर? सामने आई हैरान करने वाली सच्चाई

The CSR Journal Magazine

खुद को साबित करने की जद्दोजहद

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा अपने वनडे करियर के अंतिम चरण में हैं। उनका सपना 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप में भारत को ट्रॉफी दिलाना है। लेकिन, 39 साल की उम्र में उनकी फिटनेस पर सवाल उठते रहे हैं। कई लोग उन्हें सुस्त और अनफिट मानते हैं। हाल ही में, पूर्व स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच सोहम देसाई ने एक पॉडकास्ट में रोहित के बारे में कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

चोट का खौफनाक अनुभव

सोहम ने बताया कि 2017 में चैम्पियंस ट्रॉफी के फाइनल के दौरान रोहित को हिप पर गंभीर चोट लगी थी। यह चोट उनके करियर के लिए खतरा बन गई थी। अगर समय पर सर्जरी नहीं होती, तो उनका करियर खत्म हो सकता था। सोहम ने कहा कि लोग अक्सर यह कहते हैं कि रोहित मेहनत नहीं करते, लेकिन सच यह है कि उस समय उनकी चोट ने सब कुछ बदल दिया।

सर्जरी के बाद का सफर

सोहम ने बताया कि रोहित की हैमस्ट्रिंग और हिप फ्लेक्सर की सर्जरी के बाद उनका हिप हिस्सा सबसे कमजोर प्वाइंट बन गया। इस घटना के बाद से रोहित ने अपनी ट्रेनिंग में बदलाव किया। वह अब हफ्ते में कम से कम दो बार स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं। यह उनकी फिटनेस के लिए बेहद जरूरी हो गया है।

रोहित और विराट की ट्रेनिंग में अंतर

सोहम ने रोहित शर्मा और विराट कोहली की ट्रेनिंग रूटीन की तुलना की। उन्होंने कहा कि दोनों की शारीरिक जरूरतें अलग हैं। विराट कोहली को मैदान पर अधिक दौड़ने की जरूरत होती है, जबकि रोहित का शरीर इंजरी हिस्ट्री के कारण पूरी तरह से स्ट्रेंथ और रनिंग रूटीन पर निर्भर करता है।

आलोचनाओं का सामना

सोहम ने कहा कि पिछले 7-8 सालों से रोहित के लिए यह ट्रेनिंग रूटीन बेहद जरूरी रहा है। अगर वह अपनी फिटनेस पर इतनी मेहनत नहीं करते, तो वह आईपीएल में कप्तानी करने, लगातार 12 महीने खेलने और तीनों फॉर्मेट में रन बनाने की इस स्थिति में कभी नहीं पहुंच पाते।

फिटनेस का महत्व

रोहित की फिटनेस पर सवाल उठाने वाले लोगों को यह समझना होगा कि चोट के बाद उन्होंने खुद को साबित करने के लिए कितनी मेहनत की है। उनकी ट्रेनिंग रूटीन ने उन्हें न केवल चोट से उबरने में मदद की, बल्कि उन्हें एक मजबूत खिलाड़ी भी बनाया।

रोहित का लक्ष्य

रोहित शर्मा का लक्ष्य अब 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप में भारत को जीत दिलाना है। उनके इस सपने को पूरा करने के लिए उनकी फिटनेस और मेहनत बेहद जरूरी है।

आगे की राह

रोहित शर्मा की कहानी हमें यह सिखाती है कि कठिनाइयों के बावजूद मेहनत और समर्पण से हर लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उनकी फिटनेस और ट्रेनिंग की कहानी युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।

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