तिहाड़ जेल में अमेरिकी कैदी की भूख हड़ताल: डाइट बनी सिरदर्द

The CSR Journal Magazine
दिल्ली की तिहाड़ जेल में एक अमेरिकी कैदी वैन डाइक पिछले 50 दिनों से भूख हड़ताल पर है। उसकी यह हड़ताल जेल के खाने को लेकर है, जो उसे बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा। अमेरिकी कानून के अनुसार, कैदी को उचित खान-पान के अधिकार की वजह से वैन डाइक ने अपने खाने की मांग को लेकर अदालत में याचिका दायर की है। इस बीच, जेल प्रशासन इस समस्या का हल निकालने की कोशिश कर रहा है।

वैन डाइक की खान-पान की मांग

वैन डाइक ने बताया कि उसने केवल लिक्विड पदार्थों का सेवन किया है, जिसमें सोया मिल्क शामिल है। उसका आरोप है कि तिहाड़ जेल में दिए जाने वाले खाने की मसालेदारी और डीप-फ्राइड शैली उसके लिए मुश्किलें पैदा कर रही है। पिछले 50 दिनों में उसने जेल का खाना नहीं खाया, जिसके चलते उसकी सेहत भी बिगड़ने लगी है।

NIA की गिरफ्तारी की कहानी

13 मार्च को वैन डाइक को भारत की नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने गिरफ्तार किया था। उसके साथ 6 यूक्रेनी नागरिक भी पकड़े गए थे। आरोप है कि ये सभी म्यांमार के रास्ते भारत में घुसे थे और बाद में विभिन्न घरेलू एयरपोर्ट्स पर पकड़ में आए। वैन डाइक पर ‘गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम’ (UAPA) के तहत आतंकवाद से संबंधित साजिश का आरोप लगा है।

वैन डाइक का संगठन और दावा

वैन डाइक ने एक नॉन-प्रॉफिट संगठन ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ (SOLI) की स्थापना की है, जो इराक में ISIS के खिलाफ लड़ने वालों को ट्रेनिंग देने का काम करता है। इसके अलावा, इस संगठन ने 2022 में यूक्रेन की मदद भी की थी। वैन डाइक का कहना है कि वह तानाशाही सरकारों के खिलाफ हैं, जबकि NIA का दावा है कि उनका संगठन पूर्वोत्तर भारत के विद्रोहियों से जुड़ा हुआ है।

अदालत में मामले की सुनवाई

वैन डाइक की याचिका पर अदालत का अगला सुनवाई दिन 21 जुलाई को निर्धारित किया गया है। जेल सुपरिटेंडेंट ने इस मामले पर जवाब देने के लिए एक हफ्ते का समय मांगा है। इसके चलते वैन के भविष्य और उसकी डाइट के संबंध में कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्या तिहाड़ जेल प्रशासन इस मामले का निष्पक्ष समाधान निकाल पाएगा?

बचना होगा स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से

वैन डाइक की बढ़ती बीमारियों के कारण जेल प्रशासन को भी चिंता का सामना करना पड़ रहा है। खान-पान को लेकर जारी भूख हड़ताल से न केवल वैन डाइक की सेहत प्रभावित हो रही है, बल्कि जेल में अन्य कैदियों के लिए भी यह समस्या बन सकती है। ऐसे में प्रशासन के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वह शीघ्र ही इस मुद्दे का समाधान निकाले।

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