राधाष्टमी व्रत के बिना अधूरा माना जाता है कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व

The CSR Journal Magazine

मथुरा: कृष्ण की नगरी में राधा और कृष्ण का संबंध

मथुरा, उत्तर प्रदेश, भगवान श्री कृष्ण की लीला स्थली है। यहां हर दिन श्रद्धालु अपनी आराध्य के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी से जुड़ी मान्यताएं और स्थलों का महत्व आज भी जीवित है। राधा रानी, जो कि श्री कृष्ण की अलदाहिनी के रूप में मानी जाती हैं, भी मथुरा में विराजमान हैं।
मान्यता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी के 15 दिन बाद राधाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व विशेष अवसर पर, धार्मिक भावनाओं के साथ, कृष्ण में श्रद्धा रखने वालों के बीच मनाने की परंपरा है।

राधाष्टमी का महत्व: एक आवश्यक पर्व

अभी भी द्वापर युग से चल रही जन्मोत्सव की परंपरा को बृजवासी बड़े उत्साह के साथ निभाते हैं। राधाष्टमी के व्रत के बिना, जन्माष्टमी का व्रत अधूरा माना जाता है। पंडित गौरांग शर्मा ने कहा कि जन्माष्टमी के 15 दिन बाद राधाष्टमी का व्रत क्यों आवश्यक है।
हिंदू धर्म ग्रंथों और लोक मान्यताओं के अनुसार, राधा अष्टमी का श्री कृष्ण जन्म से गहरा संबंध है। दोनों त्यौहारों के बीच एक अनूठा रिश्ता है। राधा रानी और श्री कृष्ण का जन्म दोनों ‘अष्टमी’ तिथि को हुआ था, लेकिन इनका पक्ष भिन्न है।

कृष्ण और राधा का जन्म: अद्भुत तिथियां

कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि में हुआ था। इसके ठीक 15 दिन बाद, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को, दिन के समय राधा रानी का प्राकट्य हुआ।
वैसे तो दोनों का जन्म ‘अष्टमी’ तिथि को हुआ, लेकिन दोनों के पक्ष में यह अंतर महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि राधाष्टमी का व्रत न रखने वाले लोग, जन्माष्टमी का व्रत अधूरा मानते हैं।

राधाष्टमी का व्रत: अलौकिक पुण्य का स्रोत

पंडित गौरांग शर्मा बताते हैं कि एक राधाष्टमी का व्रत, लाखों कृष्ण जन्माष्टमी के व्रत रखने के बराबर होता है। इसलिए इस व्रत को निभाना बहुत आवश्यक है। यह व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक भावात्मक और आध्यात्मिक संबंध भी है।
राधा और कृष्ण की कहानी के माध्यम से, भक्तों को न केवल आध्यात्मिक सीख मिलती है, बल्कि यह भी पता चलता है कि कैसे प्रेम और भक्ति से जीवन में अच्छाई को लाया जा सकता है। राधाष्टमी, कृष्ण जन्माष्टमी के बाद आती है और इसके बिना जन्माष्टमी की खुशियों का कोई अर्थ नहीं है।

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