शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की दूधिया रोशनी में खीर रखने की परंपरा आज भी कई घरों में निभाई जाती है। आश्विन मास की पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले इस पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह रहता है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणों से अमृत बरसता है। इसी विश्वास के चलते लोग रात में खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखते हैं और अगले दिन इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
चांदनी में खीर रखने के पीछे क्या है मान्यता?
शरद पूर्णिमा की रात दूध, चावल और मेवों से बनी खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा है। मान्यता है कि चांदनी के संपर्क में आने से खीर अमृत के समान हो जाती है और उसमें विशेष औषधीय गुण आ जाते हैं। परिवार के सदस्य इसे प्रसाद मानकर खाते हैं। यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ परिवार को एक साथ बैठकर त्योहार मनाने का अवसर भी देती है।
चरित्रवन के अधिवक्ता प्रणेश शर्मा बताते हैं कि उनके घर में यह परंपरा पत्नी के आने के बाद शुरू हुई। अब परिवार नियमित रूप से इसका पालन करता है। उनका कहना है कि खीर से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है या नहीं, यह अलग बात है, लेकिन चांदनी में रखी खीर का स्वाद उन्हें सामान्य दिनों की खीर से अलग लगता है।
क्या चांदनी में रखी खीर से बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता?
आयुर्वेदाचार्य वेद प्रकाश के अनुसार, पारंपरिक मान्यताओं में शरद पूर्णिमा की चांदनी को विशेष महत्व दिया गया है। हालांकि, चांदनी में खीर रखने से उसमें खास औषधीय गुण पैदा होने या रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने की पुष्टि करने वाले पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। दूध और चावल से बनी खीर पौष्टिक आहार जरूर है, लेकिन इसे किसी बीमारी का उपचार नहीं मानना चाहिए।
कब शुरू होगी पूर्णिमा तिथि, जानें स्नान-दान का समय
आचार्य अमरेंद्र कुमार मिश्र के अनुसार, इस साल शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि रविवार को शुरू होकर सोमवार सुबह समाप्त होगी। रविवार की रात श्रद्धालु चंद्रमा की पूजा कर खीर को चांदनी में रखेंगे, जबकि सोमवार को स्नान-दान किया जाएगा। श्रद्धालु रात में चंद्रमा की पूजा करेंगे और खीर को चांदनी में रखकर अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करेंगे।
डॉ. एडी उपाध्याय के मुताबिक, शरद पूर्णिमा का आकर्षण आज भी बना हुआ है। धार्मिक आस्था और परिवार के साथ शरद ऋतु की सुहानी रात बिताने का अवसर इस परंपरा को खास बनाता है।

