चम्मच का अनोखा डिजाइन! Shark Tank में भारतीय को मिले ₹3 करोड़

The CSR Journal Magazine
रसोई में इस्तेमाल होने वाले चम्मच का डिजाइन आमतौर पर साधारण होता है। लेकिन भारतीय डिजाइनर राहुल अग्रवाल ने इस रोजमर्रा की चीज को एक नया रूप दिया है। उनके इस अनोखे मेजरिंग स्पून को अमेरिका के प्रसिद्ध बिजनेस रियलिटी शो ‘शार्क टैंक यूएसए’ में निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया। राहुल ने अपने आइडिया पर करीब ₹3 करोड़ का निवेश हासिल किया।

फोल्डेबल मेजरिंग स्पून की खासियत

राहुल अग्रवाल ‘पॉलीगॉन्स डिजाइन’ के फाउंडर हैं। उन्होंने एक ऐसा मेजरिंग स्पून तैयार किया है, जो इस्तेमाल न होने पर सपाट हो जाता है। आमतौर पर, रसोई में छह अलग-अलग मेजरिंग स्पून रखने पड़ते हैं। लेकिन पॉलीगॉन्स के दो फोल्डेबल टूल्स कई अलग-अलग मेजरमेंट का काम कर सकते हैं। यह स्पून न केवल उपयोग में आसान है, बल्कि स्थान की भी बचत करता है।

शार्क टैंक में मिली सफलता

राहुल के इस आइडिया ने ‘शार्क टैंक’ के सीजन 18, एपिसोड 4 में निवेशकों का ध्यान खींचा। शो में निवेशक लॉरी ग्रीनर और गेस्ट शार्क मिंडी कलिंग ने मिलकर उन्हें 3.5 लाख डॉलर यानी करीब ₹3 करोड़ का ऑफर दिया। यह रकम कंपनी में 8 फीसदी इक्विटी और अतिरिक्त 2 फीसदी एडवाइजरी शेयर के बदले दी गई। इस तरह कंपनी की वैल्यूएशन करीब 3.5 मिलियन डॉलर यानी लगभग ₹29 करोड़ आंकी गई।

कैसे काम करता है यह अनोखा चम्मच?

पॉलीगॉन्स को देखकर पहली नजर में यह किसी पतली पट्टी जैसा लग सकता है। लेकिन इसके अलग-अलग हिस्सों पर दिए गए मार्क्स पर इसे पिंच करने से यह जरूरत के हिसाब से स्पून का आकार ले लेता है। बड़ा स्पून आधा टेबलस्पून, एक टेबलस्पून और दो टेबलस्पून की मेजरमेंट दे सकता है। वहीं छोटा स्पून एक चौथाई टीस्पून, आधा टीस्पून और एक टीस्पून के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरह दो टूल्स मिलकर छह पारंपरिक मेजरिंग स्पून का काम करते हैं।

उच्च गुणवत्ता का निर्माण

इस स्पून की मोटाई भी इसकी खासियत है। फ्लैटन करने पर प्रत्येक स्पून सिर्फ 2.8 मिलीमीटर मोटा रह जाता है। इसमें फूड-ग्रेड थर्मोप्लास्टिक, हाइड्रोफोबिक सिलिकॉन और एम्बेडेड नियोडिमियम मैग्नेट का इस्तेमाल किया गया है। मैग्नेट की मदद से इसे फ्रिज पर भी लगाया जा सकता है। यह न केवल कार्यात्मक है, बल्कि आधुनिक रसोई के लिए एक आकर्षक विकल्प भी है राहुल अग्रवाल ने इस डिजाइन का शुरुआती कॉन्सेप्ट 2014 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद में पढ़ाई के दौरान तैयार किया था। एक सीनियर ने उन्हें बताया था कि स्पून का डिजाइन लगभग अपने अंतिम रूप तक पहुंच चुका है। राहुल ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और एक फ्लैट शीट को फोल्ड करके प्रिसाइज मेजरमेंट वाला स्पून बनाने का कॉन्सेप्ट तैयार किया। लेकिन आइडिया से लेकर बाजार में बिकने वाले प्रोडक्ट तक पहुंचने में कई साल लग गए।

विकास की यात्रा

रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने करीब तीन साल तक डेवलपमेंट किया, सात मैन्युफैक्चरर्स बदले और मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस को तैयार करने के लिए कई बार चीन की यात्रा की। इस प्रोडक्ट को अब तक 20 से ज्यादा इंटरनेशनल डिजाइन अवॉर्ड भी मिल चुके हैं। कंपनी के मुताबिक, इसके 2 लाख से ज्यादा यूनिट्स 110 से अधिक देशों में बिक चुके हैं। राहुल के पिच से मिंडी कलिंग काफी प्रभावित हुईं। उन्होंने प्रोडक्ट को ‘रियली इंजेनियस’ और ‘वेरी यूजफुल’ बताया। कलिंग ने यह भी कहा कि उन्हें इसका इस्तेमाल करना पसंद आएगा, खासकर इसलिए क्योंकि यह सामान्य मेजरिंग स्पून की तरह ड्रॉअर में ज्यादा जगह नहीं घेरता। राहुल का यह आइडिया इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें कोई बेहद जटिल टेक्नोलॉजी नहीं है।

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