4 दिन, 2 देश और बड़े संदेश… पीएम मोदी के मध्य एशिया दौरे के क्या हैं मायने?

The CSR Journal Magazine
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अगस्त को चार दिवसीय मध्य एशिया दौरे पर निकले हैं, जिसका उद्देश्य भारत के रणनीतिक संबंधों को मजबूत करना है। पीएम की यह यात्रा उज्बेकिस्तान से शुरू होती है, जहां वे द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, और इसके बाद वे किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इस दौरे का प्रमुख उद्देश्य आतंकवाद, व्यापार, और ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है।

उज्बेकिस्तान: द्विपक्षीय वार्ता का केंद्र

पीएम मोदी की पहली मंजिल उज्बेकिस्तान है, जहां वे राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के साथ विचार-विमर्श करेंगे। इस बातचीत में व्यापार, निवेश, रक्षा, और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। ताशकंद में स्थित लाल बहादुर शास्त्री स्मारक का दौरा भी उनका कार्यक्रम है, जो भारत-उज्बेकिस्तान के ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूती देगा।

SCO शिखर सम्मेलन: आतंकवाद के खिलाफ मजबूत मोर्चा

पहले चरण के बाद प्रधानमंत्री बिश्केक पहुँचेंगे, जहां SCO के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ विवादास्पद मुद्दों पर चर्चा करेंगे। भारत का फोकस इस मंच पर आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और मजबूत संदेश देना है। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा है कि आतंकवाद को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

आतंकवाद: भारत की प्राथमिकता

SCO में भारत का सबसे बड़ा फोकस आतंकवाद का मुद्दा है। आतंकवाद मुक्त क्षेत्र बनाने के लिए मोदी का संदेश इस समय बेहद जरूरी है, जब मध्य एशिया आतंकवादी नेटवर्क के प्रभाव में है। भारत इस मंच का उपयोग आतंकवाद के खिलाफ खुफिया साझा करने और सहयोग बढ़ाने के लिए करना चाहता है।

चीन और पाकिस्तान के बीच रणनीति

SCO का महत्व इसलिए भी बढ़ता है क्योंकि इसमें भारत, चीन, रूस और पाकिस्तान जैसे देश शामिल हैं। यह भारत को अपने प्रमुख रणनीतिक साझेदारों और चुनौतियों के साथ संवाद स्थापित करने का एक अवसर देता है। पीएम मोदी का यह दौरा भारत को चीन और पाकिस्तान के साथ अपनी सुरक्षा चिंताओं को बहुपरक चर्चा में लाने का अवसर प्रदान करता है।

मध्य एशिया का महत्व: कनेक्टिविटी और व्यापार

भारत के लिए मध्य एशिया का आर्थिक और रणनीतिक महत्व बढ़ रहा है। उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, और किर्गिस्तान जैसे देशों के प्राकृतिक संसाधनों और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति के कारण भारत की ‘Connect Central Asia’ नीति को बढ़ावा मिलेगा। भूमि मार्ग की कमी के बावजूद, चाबहार पोर्ट और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे जैसे विकल्पों का उपयोग महत्वपूर्ण रहेगा।

रक्षा और सुरक्षा: एक नई दिशा

उज्बेकिस्तान के साथ भारत की रक्षा सहयोग बढ़ाने की प्राथमिकता है। SCO के माध्यम से आतंकवाद विरोधी उपायों और सुरक्षा के साथ-साथ सामरिक सहयोग को मजबूत करने की योजना है। मध्य एशिया की सुरक्षा से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे क्षेत्रों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

खुलते बाजार: नए अवसरों की तलाश

भारत और मध्य एशिया के बीच व्यापार अभी अपेक्षित स्तर पर नहीं है। पीएम मोदी की यात्रा से व्यापार और निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, खासकर फार्मा, आईटी, और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में। यह कदम भारत की आर्थिक और तकनीकी पहुंच को और विस्तार देगा।

सुरक्षा के लिए साझेदारी: एक नई पहल

इस दौरे से भारत को आतंकवाद, कट्टरपंथ, और क्षेत्रीय अस्थिरता से निपटने का मौका मिलेगा। SCO के मंच पर भारत-रूस संबंधों को भी नई दिशा मिल सकती है। यह दौरा भारत को मध्य एशिया में एक अधिक सक्रिय शक्ति के रूप में स्थापित करने का एक अवसर है।

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