Papankusha Ekadashi 2026: पापांकुशा एकादशी पर क्यों पढ़ी जाती है व्रत कथा? जानें पूजा का महत्व और पौराणिक कहानी

The CSR Journal Magazine
पापांकुशा एकादशी 22 अक्टूबर 2026 को मनाई जा रही है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत कथा पढ़ने की परंपरा है। जानिए इस दिन का धार्मिक महत्व और क्रोधन शिकारी से जुड़ी पौराणिक कथा।

पापांकुशा एकादशी का क्या है महत्व?

हिंदू पंचांग के अनुसार, पापांकुशा एकादशी आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह एकादशी आत्मचिंतन, संयम और अच्छे कर्मों की प्रेरणा देती है। भक्त इस अवसर पर उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। पूजा के दौरान व्रत कथा पढ़ने या सुनने की भी परंपरा है।

पापांकुशा एकादशी की पौराणिक कथा क्या है?

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पापांकुशा एकादशी के महत्व के बारे में पूछा। इसके जवाब में श्रीकृष्ण ने क्रोधन नाम के एक शिकारी की कहानी सुनाई। बताया जाता है कि क्रोधन विंध्य पर्वत पर रहता था और अपने जीवन में कई जीवों की हत्या कर चुका था। वह अपने कर्मों के प्रति संवेदनशील नहीं था, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ उसे मृत्यु का भय सताने लगा।

अंगिरा ऋषि ने शिकारी को क्या सलाह दी?

कथा के अनुसार, जब क्रोधन को अपनी मृत्यु निकट होने का आभास हुआ, तो उसे अपने पुराने कर्मों की चिंता सताने लगी। वह अपने किए का प्रायश्चित करने का रास्ता खोजने लगा। इसी उद्देश्य से वह अंगिरा ऋषि के आश्रम पहुंचा। उसने ऋषि को अपने कर्मों के बारे में बताया और उनसे मुक्ति का मार्ग पूछा।
क्रोधन की बात सुनकर अंगिरा ऋषि ने उसे आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने की सलाह दी। कथा के अनुसार, क्रोधन ने ऋषि के बताए अनुसार व्रत किया। धार्मिक मान्यता है कि इससे उसे अपने पापों से मुक्ति मिली और मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्त हुआ।

पापांकुशा एकादशी पर कैसे करें पूजा?

इस दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत का संकल्प लेने की परंपरा है। भक्त दीपक जलाकर फूल, चंदन और तुलसी दल अर्पित करते हैं। इसके बाद विष्णु मंत्रों का जाप और पापांकुशा एकादशी की व्रत कथा का पाठ किया जाता है। व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार उपवास करते हैं तथा अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण करते हैं। धार्मिक दृष्टि से पापांकुशा एकादशी की कथा का मुख्य संदेश अपने कर्मों पर विचार करना, गलतियों से सीखना और जीवन में अच्छे आचरण को अपनाना है।

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