दिल्ली-NCR में प्रदूषण रोकने की नई तैयारी, पंजाब-हरियाणा के ईंट भट्ठों को पराली जलाने का निर्देश

The CSR Journal Magazine

दीपावली के आसपास दिल्ली-NCR की हवा को जहरीला होने से बचाने के लिए केंद्र सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने तैयारियां तेज कर दी हैं। हर साल सर्दियों की शुरुआत में पराली जलाने, वाहनों, निर्माण कार्यों और औद्योगिक गतिविधियों से होने वाला प्रदूषण परेशानी बढ़ाता है। इस बार पराली के धुएं पर लगाम लगाने के लिए पंजाब और हरियाणा के ईंट भट्ठों को लेकर एक अहम निर्देश जारी किया गया है। आयोग के निर्देश के मुताबिक, दोनों राज्यों में संचालित सभी ईंट भट्ठों को 1 नवंबर से अपनी कुल ईंधन खपत का 30 प्रतिशत तक पराली का इस्तेमाल करना होगा। इसका उद्देश्य खेतों में जलाई जाने वाली पराली को ईंधन के रूप में उपयोग करना है, ताकि खुले में पराली जलाने की घटनाओं को कम किया जा सके।

पंजाब-हरियाणा के करीब 5,000 भट्ठों पर नजर

पंजाब और हरियाणा में फिलहाल करीब पांच हजार ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं। आयोग की योजना के तहत इन भट्ठों में पराली के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे फसल कटाई के बाद खेतों में बचने वाले अवशेषों के निपटारे का एक विकल्प तैयार हो सकता है। इस निर्देश को प्रभावी तरीके से लागू कराने के लिए आयोग ने दोनों राज्यों में विशेष निगरानी टीमें तैनात करने के निर्देश भी दिए हैं। ये टीमें व्यवस्था की तैयारियों और नियमों के पालन पर नजर रखेंगी। आयोग के चेयरमैन राजेश वर्मा और सचिव तरुण पिथोडे के 22 अक्टूबर को पंजाब का दौरा करने की भी जानकारी दी गई है। इस दौरान वे राज्य के मुख्य सचिव के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा करेंगे।

दिल्ली में धूल और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर भी सख्ती

प्रदूषण से निपटने की तैयारी केवल पराली तक सीमित नहीं है। आयोग ने दिल्ली के मुख्य सचिव के साथ बैठक कर राजधानी में प्रदूषण के दूसरे स्रोतों पर भी निगरानी बढ़ाने को कहा है। इसमें सड़कों से उड़ने वाली धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों और औद्योगिक गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। संबंधित विभागों को जरूरी कदम उठाने और नियमों के पालन की निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग से जुड़ी टीमें अलग-अलग राज्यों का दौरा कर प्रदूषण नियंत्रण की तैयारियों का जायजा भी लेंगी। इसका मकसद प्रदूषण बढ़ने से पहले ही संभावित कारणों पर कार्रवाई करना है।

दीपावली के आसपास क्यों बढ़ता है प्रदूषण?

दिल्ली-NCR में अक्टूबर और नवंबर के दौरान हवा की गुणवत्ता अक्सर खराब होने लगती है। इस दौरान पंजाब और हरियाणा में धान की कटाई के बाद पराली जलाने की घटनाएं बढ़ने से धुएं का असर आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। इसके अलावा मौसम में बदलाव, हवा की कम गति, वाहनों का धुआं, निर्माण गतिविधियां और धूल भी प्रदूषण बढ़ाने में योगदान देते हैं। दीपावली के आसपास इन सभी कारणों का असर एक साथ दिखाई दे सकता है। हरियाणा में फसल कटाई का काम भी आगे बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में पराली प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी। आयोग की नई व्यवस्था इसी चुनौती से निपटने की कोशिश का हिस्सा है।

पराली प्रबंधन से कितनी मिलेगी राहत?

ईंट भट्ठों में पराली का इस्तेमाल बढ़ने से खेतों में फसल अवशेष जलाने की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्देशों का पालन कितनी प्रभावी तरीके से होता है और किसान पराली को वैकल्पिक उपयोग के लिए कितनी आसानी से उपलब्ध करा पाते हैं। दिल्ली-NCR में प्रदूषण कम करने के लिए पराली प्रबंधन के साथ वाहनों, निर्माण कार्यों और औद्योगिक उत्सर्जन पर नियंत्रण भी जरूरी होगा। आने वाले दिनों में आयोग की निगरानी और राज्यों की कार्रवाई से साफ होगा कि इस बार सर्दियों में प्रदूषण की चुनौती से निपटने की तैयारी कितनी प्रभावी रहती है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store – https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos