चीन पर निर्भरता खत्म करने के लिए अमेरिका की म्यांमार से गुप्त बातचीत, रेयर अर्थ पर नजर

The CSR Journal Magazine

अमेरिका ने म्यांमार के सैन्य शासन के साथ चुपचाप राजनयिक संपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया है। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कम से कम दो बैठकें होने की जानकारी सामने आई है। खास बात यह है कि म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद अमेरिका ने वहां के सैन्य नेतृत्व पर प्रतिबंध लगाए थे। ऐसे में यह बातचीत अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अहम मानी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, पहली बैठक म्यांमार की राजधानी नेपीडॉ में हुई, जबकि दूसरी बातचीत अक्टूबर की शुरुआत में जापान की राजधानी टोक्यो में हुई। इन बैठकों को सार्वजनिक रूप से ज्यादा प्रचारित नहीं किया गया। माना जा रहा है कि अमेरिका सुरक्षा, साइबर अपराध और रणनीतिक खनिजों से जुड़े अपने हितों को ध्यान में रखकर म्यांमार के साथ संपर्क बनाए हुए है।

अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद बातचीत क्यों?

म्यांमार में 1 फरवरी 2021 को सेना ने तख्तापलट कर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी। इसके बाद लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई हुई। अमेरिका ने सैन्य नेतृत्व और सेना से जुड़ी कंपनियों तथा लोगों पर प्रतिबंध लगाए थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि म्यांमार के मौजूदा राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग के नेतृत्व वाली सरकार के प्रतिनिधियों के साथ अब अमेरिकी अधिकारी बातचीत कर रहे हैं। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका पहले सैन्य शासन के खिलाफ सख्त रुख अपनाता रहा है। हालांकि, इन बैठकों को म्यांमार के सैन्य शासन को औपचारिक मान्यता देने के संकेत के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी। बातचीत के पीछे सुरक्षा और आर्थिक हित भी अहम वजह हो सकते हैं।

अमेरिकी नागरिक की रिहाई और साइबर ठगी पर चर्चा

रिपोर्ट के मुताबिक, नेपीडॉ में हुई पहली बैठक में अमेरिकी कारोबारी एडम कैस्टिलो की रिहाई सुनिश्चित करने और साइबर ठगी के नेटवर्क पर चर्चा हुई। म्यांमार में संचालित साइबर स्कैम सेंटर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय रहे हैं। इन नेटवर्क के जरिए लोगों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाया जाता है। अमेरिका की प्राथमिकताओं में अपने नागरिकों को ऐसे अपराधों से बचाना और साइबर अपराध के खिलाफ सहयोग बढ़ाना शामिल है। म्यांमार की सरकारी मीडिया ने कैस्टिलो की रिहाई को दोनों देशों के बीच दोस्ताना संबंधों का प्रतीक बताया था। इसके बाद अक्टूबर की शुरुआत में टोक्यो में दूसरी बैठक हुई। रिपोर्ट के अनुसार, इस बातचीत में अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी माइकल वैन्स ने भूमिका निभाई। इन बैठकों से संकेत मिलता है कि दोनों देश सीमित मुद्दों पर सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

म्यांमार के रेयर अर्थ पर अमेरिका की नजर

अमेरिका की दिलचस्पी के पीछे दुर्लभ खनिज यानी रेयर अर्थ एलिमेंट्स भी एक बड़ी वजह हो सकते हैं। इन खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन ऊर्जा टर्बाइन, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा तकनीक में होता है। म्यांमार दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का एक प्रमुख उत्पादक है और चीन के लिए भी इन खनिजों की आपूर्ति का महत्वपूर्ण स्रोत रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आधुनिक हथियारों और ऊर्जा तकनीक की बढ़ती मांग के बीच इन खनिजों की रणनीतिक अहमियत बढ़ गई है। अमेरिका लंबे समय से जरूरी खनिजों की आपूर्ति के लिए चीन पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में म्यांमार के साथ बातचीत भविष्य में वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों तक पहुंच बनाने की कोशिश का हिस्सा हो सकती है।

म्यांमार के खनिजों तक पहुंच आसान नहीं

हालांकि, म्यांमार के दुर्लभ खनिजों तक पहुंच बनाना अमेरिका के लिए आसान नहीं होगा। देश के कई खनिज संपन्न इलाके ऐसे क्षेत्रों में हैं, जहां केंद्रीय सरकार का नियंत्रण सीमित है और सशस्त्र संगठनों का प्रभाव बना हुआ है। उत्तरी काचिन राज्य डिस्प्रोसियम और टर्बियम जैसे महत्वपूर्ण दुर्लभ तत्वों के लिए जाना जाता है। इनका इस्तेमाल उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा तकनीक में होता है। लेकिन इस क्षेत्र में काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी (KIA) का प्रभाव है, जो म्यांमार की सैन्य सरकार के खिलाफ संघर्ष कर रही है। इस कारण खनिजों की आपूर्ति, खनन और परिवहन से जुड़ी योजनाओं में सुरक्षा और राजनीतिक जोखिम बने हुए हैं।

अमेरिका की रणनीति पर दुनिया की नजर

म्यांमार के साथ अमेरिका की गुप्त बातचीत यह दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सुरक्षा और आर्थिक हित कई बार पुराने मतभेदों के बावजूद देशों को बातचीत की मेज पर ले आते हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इन बैठकों से दोनों देशों के संबंधों में व्यापक बदलाव आएगा या सहयोग कुछ सीमित मुद्दों तक ही रहेगा। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि अमेरिका साइबर अपराध के खिलाफ सहयोग को कितना आगे बढ़ाता है और क्या म्यांमार के दुर्लभ खनिजों तक पहुंच बनाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाता है।

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