पटाखों और तेज DJ पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, मुंबई पुलिस को SOP बनाने का निर्देश

The CSR Journal Magazine

त्योहारों के दौरान पटाखे फोड़ने और तेज आवाज में DJ या म्यूजिक सिस्टम बजाने के मामलों पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि स्पष्ट निर्देश जारी होने के बावजूद नगर निगम और पुलिस प्रशासन की कार्रवाई बेहद धीमी है। कोर्ट ने अधिकारियों से सवाल किया कि आदेशों के बावजूद जरूरी कदम समय पर क्यों नहीं उठाए गए। जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की पीठ ने कहा कि प्रशासन को अदालत के निर्देशों का गंभीरता से पालन करना चाहिए। अदालत ने 22 सितंबर और 15 अक्टूबर को इस मामले में आदेश जारी किए थे, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अब भी सवाल बने हुए हैं।

BMC और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर उठे सवाल

हाईकोर्ट ने कहा कि बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) ने अब तक ऐसे जागरूकता नोटिस जारी नहीं किए हैं, जिनसे लोगों को पटाखों पर लागू प्रतिबंधों की जानकारी मिल सके। इन नोटिसों के जरिए लोगों को पटाखों से निकलने वाले धुएं, हानिकारक तत्वों और तेज आवाज के कारण पर्यावरण तथा स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में बताना था। अदालत ने निर्देश दिया कि प्रतिबंधों और प्रदूषण के नुकसान से जुड़ी जानकारी प्रकाशित की जाए। इसे सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों तक पहुंचाया जाए, ताकि त्योहारों के दौरान नियमों के उल्लंघन को रोका जा सके।

सार्वजनिक सड़कों और जुलूसों में नियमों की अनदेखी

अदालत ने मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। पीठ के मुताबिक, व्यस्त सार्वजनिक सड़कों पर अब भी पटाखे फोड़े जा रहे हैं। वहीं, जुलूसों में जरूरी अनुमति के बिना म्यूजिक सिस्टम इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। कोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण से जुड़े निर्धारित डेसिबल स्तर का पालन सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया। पीठ ने कहा कि केवल आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि पुलिस और संबंधित विभागों को नियमों का पालन भी कराना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके आदेशों का बार-बार उल्लंघन होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है।

मुंबई पुलिस कमिश्नर को SOP बनाने का निर्देश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को सभी पुलिस थानों के प्रभारियों की बैठक बुलाने का निर्देश दिया है। इस बैठक में अदालत के आदेशों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP तैयार की जाएगी। पुलिस कमिश्नर को हलफनामा दाखिल कर यह भी बताना होगा कि पुलिसकर्मियों को अदालत के निर्देशों की जानकारी दे दी गई है। साथ ही, आदेशों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने का भरोसा भी देना होगा। अदालत ने पुलिस अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि उनकी लापरवाही से नागरिकों के मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।

मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं

पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून के समक्ष समानता और जीवन तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों की रक्षा जरूरी है। अदालत की टिप्पणी का साफ संकेत है कि ध्वनि और वायु प्रदूषण को रोकने के लिए जारी निर्देशों को केवल औपचारिकता के तौर पर नहीं लिया जा सकता। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नागरिकों के स्वास्थ्य और अधिकारों पर प्रतिकूल असर न पड़े।

24 अक्टूबर तक कार्रवाई, 26 अक्टूबर को अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को 24 अक्टूबर तक प्रदूषण और पटाखों पर लागू प्रतिबंधों के बारे में जागरूकता नोटिस प्रकाशित करने का निर्देश दिया है। BMC और मुंबई पुलिस कमिश्नर को अनुपालन की जानकारी देते हुए हलफनामे भी दाखिल करने होंगे। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी। उस दौरान अदालत प्रशासन की ओर से पेश किए गए हलफनामों के आधार पर निर्देशों के पालन की स्थिति की समीक्षा करेगी। गौरतलब है कि हाईकोर्ट पहले ही सार्वजनिक सड़कों पर पूरे साल पटाखे फोड़ने पर रोक लगा चुका है। इसके अलावा, साइलेंस जोन यानी शांत क्षेत्रों में पटाखों के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध है। अब अदालत ने इन आदेशों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रशासन को समयसीमा के भीतर ठोस कदम उठाने को कहा है।

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