भारत का MSME सेक्टर अब देश की अर्थव्यवस्था का एक अहम स्तंभ बन चुका है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य सौम्य कांति घोष ने बताया कि माइक्रो, स्माल और मीडियम एंटरप्राइज (MSMEs) ने अब तक 34 करोड़ नौकरियां पैदा की हैं। ट्रेडिंग सेक्टर में 3.32 करोड़, सर्विसेज में 2.38 करोड़ और मैन्युफैक्चरिंग में 1.6 करोड़ लोग इस सेक्टर से जुड़े हैं। इस तरह MSMEs देश के रोजगार सृजन में एक प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
GVA में बढ़ी हिस्सेदारी
देश की आर्थिक उत्पादकता में MSMEs की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। घोष ने बताया कि वित्त वर्ष 2022-23 में MSMEs का योगदान ग्रास वैल्यू एडेड (GVA) में 30.1 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसका मतलब यह है कि यह सेक्टर अब केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि आर्थिक उत्पादन का भी मुख्य चालक बन गया है।
निर्यात में तीन गुना वृद्धि
MSMEs ने निर्यात में भी कमाल कर दिया है। 2021 में इस सेक्टर का निर्यात मूल्य 3.95 लाख करोड़ रुपए था, जो 2024-25 में बढ़कर 12.40 लाख करोड़ रुपए हो गया। चार साल में निर्यात करने वाली MSME यूनिटों की संख्या भी लगभग तीन गुना बढ़कर 1,76,315 हो गई है। 2024-25 में भारत के कुल निर्यात में MSMEs का हिस्सा 45.73 प्रतिशत तक पहुंच गया। यह संकेत देता है कि यह सेक्टर भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ा औपचारिककरण
MSMEs सेक्टर की औपचारिक पहचान को मजबूत करने में डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बड़ी भूमिका निभाई है। उद्यम और उद्यम असिस्ट पोर्टल पर कुल पंजीकरण अब लगभग 7.7 करोड़ तक पहुंच गए हैं, जो 2016 के 6.6 करोड़ पंजीकरण से काफी ज्यादा हैं। डिजिटल पंजीकरण से सेक्टर में औपचारिककरण तेज हुआ और नई कंपनियों को भी आसानी से शामिल किया जा सका।
माइक्रो-एंटरप्राइज का दबदबा बरकरार
MSMEs में माइक्रो-एंटरप्राइज सबसे बड़ी हिस्सेदारी बनाए हुए हैं। कुल इकाइयों का 99 प्रतिशत माइक्रो-एंटरप्राइज का है। इसमें रिटेल और होलसेल ट्रेड को शामिल करने से पूरे इकोसिस्टम में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। यह सेक्टर न केवल रोजगार और निर्यात बढ़ा रहा है, बल्कि भारत को वैश्विक व्यापार में मजबूत पहचान दिला रहा है।
सौम्य कांति घोष ने स्पष्ट किया कि MSMEs भारत को ‘दुनिया की फैक्ट्री’ बनाने में एक अहम भूमिका निभा रहे हैं। रोजगार सृजन, निर्यात में वृद्धि और डिजिटल औपचारिककरण ने इसे देश की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बना दिया है। जैसे-जैसे यह सेक्टर और विकसित होगा, भारत का वैश्विक व्यापार में प्रभुत्व और मजबूत होगा।
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