नर्मदा के अमरकंटक मंदिर में सोना-चांदी की अनियमितताएं: पुलिस और ट्रस्ट के बीच टकराव!

The CSR Journal Magazine
मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कई गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि मुख्य उद्गम मंदिर को दान में मिले सोने-चांदी का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है। मंदिर ट्रस्ट का दावा है कि चढ़ावे में मिले सोने-चांदी के जेवरात अमरकंटक थाने में जमा कराए जाते हैं, लेकिन थाने के टीआई का कहना है कि उनके पास ऐसा कुछ नहीं है। इस विवाद ने स्थानीय नगर परिषद की भूमिका पर भी प्रकाश डाला है, जो इस मंदिर का संचालन करती है।

क्या है ट्रस्ट का दावा?

श्री नर्मदा मंदिर उद्गम ट्रस्ट का गठन वर्ष 2001 में किया गया था। ट्रस्ट के पास मंदिर संचालन, निर्माण और दानपेटियों के प्रबंधन की जिम्मेदारी है। हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट लगभग 10 दानपेटियों का संचालन करता है। इनमें विभिन्न मंदिरों के लिए दानपेटियां शामिल हैं, लेकिन दान की सही गिनती और सोने-चांदी का रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं है। ट्रस्ट के कर्मचारी गणेश पाठक के अनुसार, पुराने रजिस्टरों की प्रविष्टियां अस्पष्ट हैं।

जेवरातों का कैसे होता है प्रबंधन?

अधिकतर मामलों में, मंदिरों के कीमती जेवरात को सुरक्षित रखने के लिए बैंक लॉकर का उपयोग किया जाता है, लेकिन अमरकंटक मंदिर के मामलों में यह प्रक्रिया अलग है। जेवरात आम तौर पर थाने में जमा किए जाते हैं, लेकिन इसकी प्रक्रिया पर कोई स्पष्टता नहीं है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष चैन सिंह परस्ते ने खुद स्वीकार किया कि उन्हें जेवरातों के रखने की प्रक्रिया की जानकारी नहीं है।

पारदर्शिता पर उठे सवाल

दानपेटियों की राशि की गिनती वर्तमान में मंदिर परिसर के प्रसाद कक्ष में की जाती है। पहले यह प्रक्रिया विभिन्न स्थानों पर होती थी, लेकिन अब इसका स्थान बदल गया है। नई व्यवस्था के तहत इधर हाल ही में एक सीसीटीवी कैमरा भी लगाया गया था, लेकिन निरीक्षण के दौरान यह बंद पाया गया। इससे दान की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठते हैं। पुजारी दुर्गेश द्विवेदी के अनुसार, रजिस्टर में किए जा रहे हस्ताक्षर में अनियमितताएं हैं।

रिकॉर्ड में विसंगतियां

दान राशि और जेवरातों के रिकॉर्ड वाले रजिस्टर में कई जगह कटिंग और व्हाइटनर का उपयोग किया गया है। यह भी देखने में आया है कि कुछ प्रविष्टियों में पहले दर्ज आंकड़ों को मिटाकर नए आंकड़े लिखे गए हैं। इस तरह की अनियमितताओं ने ट्रस्ट के रिकॉर्ड की विश्वसनीयता को संदेह में डाल दिया है।

अग्रिम कार्रवाई की आवश्यकता

हालिया घटनाक्रम को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि इस मामले की जांच की जाए। न केवल ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं, बल्कि दान के सही प्रबंधन की प्रक्रिया भी सुनिश्चित करनी होगी। स्थानीय प्रशासन को इस दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो। इस घटना के बाद, मंदिरों में दान-चोरी और अनियमितताओं की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय बन गई हैं।

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