योगी सरकार का शिक्षामित्रों को दीवाली तोहफा: 460.23 करोड़ का बजट जारी, मानदेय में ऐतिहासिक वृद्धि

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शिक्षामित्रों को योगी सरकार का बड़ा दीवाली तोहफा: ₹460.23 करोड़ का बजट जारी, मानदेय में 80% की ऐतिहासिक वृद्धि

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लाखों शिक्षामित्रों को त्योहारों के इस मौसम में एक बड़ा और ऐतिहासिक तोहफा दिया है। राज्य सरकार ने समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत कार्यरत 1,27,841 शिक्षामित्रों के बढ़े हुए मानदेय के भुगतान के लिए ₹460.23 करोड़ की भारी-भरकम धनराशि जारी कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस फैसले से प्रदेश के करीब 1.28 लाख परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। सरकार के इस कदम को आगामी त्योहारों से पहले शिक्षामित्रों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनके लंबे समय के संघर्ष को सम्मान देने के रूप में देखा जा रहा है।

मानदेय में 80 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी: अब मिलेंगे ₹18,000 प्रति माह

योगी सरकार ने शिक्षामित्रों के आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए उनके मासिक मानदेय में सीधे ₹8,000 प्रति माह की उल्लेखनीय वृद्धि की है। इससे पहले शिक्षामित्रों को प्रति माह ₹10,000 का मानदेय मिलता था, जो अब बढ़कर ₹18,000 प्रति माह हो गया है। प्रतिशत के लिहाज से देखा जाए तो यह उनके मानदेय में लगभग 80 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी है। यह निर्णय शिक्षामित्रों के जीवन स्तर को सुधारने और उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। गौरतलब है कि इस बढ़े हुए मानदेय की घोषणा पूर्व में ही की जा चुकी थी और अब सरकार ने इसके क्रियान्वयन के लिए बजट जारी कर शिक्षामित्रों के खातों में सीधे राशि भेजने की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है।

सितंबर और अक्टूबर का मानदेय एक साथ: जनपदवार बजट आवंटित

स्कूल शिक्षा महानिदेशालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जारी किए गए कुल ₹460.23 करोड़ के बजट में से सितंबर और अक्टूबर 2026 दोनों महीनों के लिए बराबर-बराबर राशि तय की गई है।
• सितंबर माह का आवंटन: ₹230.11 करोड़
• अक्टूबर माह का आवंटन: ₹230.11 करोड़
• कुल स्वीकृत बजट: ₹460.23 करोड़
राज्य सरकार ने इस धनराशि को प्रदेश के सभी 75 जिलों में शिक्षामित्रों की संख्या के आधार पर जनपदवार आवंटित कर दिया है। इसके साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि आवंटन के अनुसार बिना किसी देरी के सीधे शिक्षामित्रों के बैंक खातों में आरटीजीएस (RTGS)/डीबीटी (DBT) के माध्यम से भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने की प्रतिबद्धता

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बजट जारी होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय में यह ऐतिहासिक वृद्धि कर उनके आर्थिक हितों को मजबूती दी है। सितंबर और अक्टूबर महीने के लिए ₹460.23 करोड़ की धनराशि समय से जारी होना इस बात का प्रमाण है कि हमारी सरकार समाज के हर वर्ग और विशेषकर शिक्षा जगत से जुड़े कर्मियों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।” वही, महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSAs) को नियमानुसार त्वरित कार्रवाई करने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि मानदेय में इस बढ़ोतरी से शिक्षामित्रों को अतिरिक्त आर्थिक संबल मिलेगा। जब शिक्षक और शिक्षामित्र आर्थिक चिंताओं से मुक्त होंगे, तो वे और अधिक उत्साह, समर्पण तथा प्रतिबद्धता के साथ सरकारी विद्यालयों में अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे, जिससे प्राथमिक शिक्षा के स्तर में व्यापक सुधार आएगा।

₹5 लाख तक का मुफ्त कैशलेस इलाज भी शामिल

शिक्षामित्रों को केवल वित्तीय लाभ ही नहीं, बल्कि सरकार की ओर से सामाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा भी प्रदान की गई है। सरकार ने मानदेय वृद्धि के साथ-साथ सभी पात्र शिक्षामित्रों के लिए ₹5 लाख तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा को भी मंजूरी दी है। इस योजना के तहत शिक्षामित्र और उनके आश्रित परिवार गंभीर बीमारियों की स्थिति में सूचीबद्ध अस्पतालों में मुफ्त इलाज करा सकेंगे। यह स्वास्थ्य सुरक्षा शिक्षामित्रों के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच बनकर उभरी है, क्योंकि बीमारी के वक्त लगने वाले भारी-भरकम खर्च से अब उन्हें मुक्ति मिलेगी।

शिक्षामित्रों के संघर्ष और मानदेय का सफरनामा

उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों का इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए वर्ष 1999-2000 में शिक्षामित्रों की संविदा पर नियुक्ति शुरू की गई थी।
1. शुरुआती दौर: शुरुआत में शिक्षामित्रों को मात्र ₹2,250 से ₹3,500 के बीच मानदेय मिलता था।
2. वर्ष 2017 का बदलाव: साल 2017 में जब योगी आदित्यनाथ ने पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली, तब शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर ₹10,000 प्रति माह किया गया था।
3. वर्ष 2026 की ऐतिहासिक क्रांति: अब शैक्षिक सत्र 2026-27 में इसे बढ़ाकर ₹18,000 प्रति माह कर दिया गया है, जो अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त वृद्धि है।

प्रदेश भर के शिक्षामित्रों में जश्न का माहौल

सरकार द्वारा बजट जारी किए जाने और बैंक खातों में दो महीने की डबल सैलरी एक साथ आने की खबर से शिक्षामित्रों के संगठनों और संघों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। विभिन्न शिक्षक संगठनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बेसिक शिक्षा मंत्री के प्रति आभार प्रकट किया है। शिक्षामित्रों का कहना है कि ₹10,000 की सीमित राशि में आज के महंगाई के दौर में घर चलाना और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना बेहद कठिन हो रहा था। मानदेय में ₹8,000 की सम्मानजनक वृद्धि से उनके परिवारों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी और वे त्योहारों को अधिक खुशी के साथ मना सकेंगे। सरकार का यह निर्णय न केवल शिक्षामित्रों के चेहरों पर मुस्कान लाया है, बल्कि इससे उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन का माहौल भी और अधिक सुदृढ़ होने की उम्मीद है।

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