इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकीलों का हंगामा, जस्टिस अजय भनोट की कोर्ट में तोड़फोड़; जानिए पूरा विवाद

The CSR Journal Magazine
इलाहाबाद हाईकोर्ट में बुधवार, 28 अक्टूबर को जस्टिस अजय भनोट की अदालत में वकीलों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हंगामा हो गया। कुछ वकीलों ने न्यायाधीश के कोर्टरूम में नारेबाजी की और मेज-कुर्सियों में तोड़फोड़ की। यह विवाद एक दिन पहले हुई सुनवाई के दौरान वकील के साथ कथित दुर्व्यवहार और वरिष्ठ अधिवक्ता का मजाक उड़ाने के आरोपों से जुड़ा है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इस मामले में मुख्य न्यायाधीश से हस्तक्षेप की मांग की थी। वहीं, कोर्टरूम में हंगामे के बाद अदालत ने भी सख्त रुख अपनाया है।

जस्टिस अजय भनोट के कोर्ट में क्यों हुआ विवाद?

विवाद की शुरुआत 27 अक्टूबर को अदालत की कार्यवाही के दौरान हुई एक घटना से हुई। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली को पत्र लिखकर जस्टिस अजय भनोट के कथित व्यवहार पर आपत्ति जताई और कार्रवाई की मांग की। बार एसोसिएशन के पत्र के अनुसार, सुनवाई के दौरान एक पुलिस अधीक्षक (SP) अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता (AGA) के पीछे वाली कतार में बैठे थे। एक वकील ने पुलिस अधिकारी से दूसरी कतार में बैठने को कहा। वकील का कहना था कि संबंधित सीट वकीलों के बैठने के लिए थी। आरोप है कि इस बात पर अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता ने वकील को डांटा और न्यायाधीश से शिकायत करने की बात कही। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंच गया।

वकील को जेल भेजने की धमकी देने का आरोप

बार एसोसिएशन ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि जस्टिस अजय भनोट ने अदालत में पहुंचने के बाद संबंधित वकील की ओर उंगली उठाई और कड़े शब्दों में उसे जेल भेजने का आदेश दिया। पत्र के मुताबिक, जब वकील ने माफी मांगी तो न्यायाधीश ने उसे पुलिस अधिकारी से भी माफी मांगने के लिए कहा। एसोसिएशन ने इस व्यवहार पर आपत्ति जताते हुए इसे वकीलों के सम्मान और गरिमा से जुड़ा मामला बताया। हालांकि, ये आरोप बार एसोसिएशन की ओर से लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि या इस संबंध में न्यायिक निष्कर्ष सामने आने की जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं दी गई है।

वरिष्ठ अधिवक्ता वीपी श्रीवास्तव का मजाक उड़ाने का आरोप

इस विवाद में वरिष्ठ अधिवक्ता वीपी श्रीवास्तव का नाम भी सामने आया है। बार एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने वरिष्ठ अधिवक्ता का मजाक उड़ाया। एसोसिएशन का कहना है कि इस घटना से कानूनी समुदाय की गरिमा प्रभावित हुई है। बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली से पूरे मामले का संज्ञान लेने और उचित कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही, उसने चेतावनी दी थी कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में जस्टिस अजय भनोट की अदालत का बहिष्कार किया जाएगा।

28 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन ने लिया उग्र रूप

अगले दिन, बुधवार को जब जस्टिस अजय भनोट अपनी अदालत पहुंचे तो कुछ वकीलों ने उनका विरोध किया और नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद वकीलों के एक समूह ने कोर्टरूम में रखी मेज-कुर्सियों को नुकसान पहुंचाया। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, फर्नीचर को न्यायाधीश के आसन की ओर भी फेंका गया। घटना के कारण हाईकोर्ट परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। विरोध प्रदर्शन के दौरान अदालत की कार्यवाही प्रभावित होने की भी खबर है। इस घटना ने न्यायाधीश और वकीलों के बीच विवाद को एक नए मोड़ पर पहुंचा दिया।

हाईकोर्ट ने CCTV फुटेज मंगाने का दिया निर्देश

कोर्टरूम में तोड़फोड़ और नारेबाजी के मामले में जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने हंगामे को न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने वाला और अवमाननापूर्ण आचरण माना। अदालत ने रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) को कोर्ट नंबर 66 के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज हासिल करने और घटना में शामिल वकीलों की पहचान करने का निर्देश दिया। पहचान होने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने और मामले को उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के पास अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए भेजने की बात भी कही गई। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में अगली सुनवाई 19 नवंबर को निर्धारित की गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी विशेष न्यायाधीश या अदालत से असहमति होने पर वकीलों को दूसरी अदालतों की कार्यवाही बाधित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

अब आगे क्या होगा?

इस पूरे मामले में अब दो अलग-अलग पहलुओं पर कार्रवाई की संभावना है। पहला, जस्टिस अजय भनोट के कथित व्यवहार को लेकर बार एसोसिएशन की शिकायत। दूसरा, विरोध प्रदर्शन के दौरान कोर्टरूम में हुई तोड़फोड़ और न्यायिक कार्यवाही बाधित करने का मामला। बार एसोसिएशन की शिकायत पर क्या कदम उठाया जाता है, यह आगे स्पष्ट होगा। वहीं, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हंगामे में शामिल लोगों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ अवमानना या अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

 

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store – https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos