जम्मू-कश्मीर में शराबबंदी की मांग को लेकर BJP का विरोध, कई नेता हिरासत में

The CSR Journal Magazine
जम्मू-कश्मीर को 100 दिनों में नशामुक्त बनाने की योजना के तहत, रविवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक पत्रकार के सवाल पर विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि लोग अपनी मर्जी से शराब का सेवन करते हैं और सरकार किसी को भी शराब की दुकानों पर जाने के लिए मजबूर नहीं कर रही है। यह स्पष्ट करते हुए, उन्होंने कहा कि ये दुकानें उन लोगों के लिए हैं, जिनके धर्म में शराब पीने की अनुमति है। अब्दुल्ला ने यह भी बताया कि अब तक किसी भी सरकार ने इन दुकानों पर प्रतिबंध नहीं लगाया है।

BJP का प्रर्दशन श्रीनगर में

श्रीनगर में बीते शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शराब पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान, पुलिस ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के आवास की ओर बढ़ने से रोक दिया। इस विरोध में बड़ी संख्या में BJP नेता और कार्यकर्ता राम मुंशी बाग पार्क के पास इकट्ठा हुए। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रास्ते में रोक दिया और कुछ नेताओं को हिरासत में लिया।

शराबबंदी पर BJP का कड़ा संदेश

BJP के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने इस मामले पर कहा कि कश्मीर संतों और सूफियों की भूमि है और पार्टी नशे के खिलाफ है। उनका कहना था कि कुछ लोग शराब के व्यापार का समर्थन कर रहे हैं, जो समाज के लिए खतरा है। उन्होंने चेतावनी दी कि वो लोग जो राजस्व के लिए शराब का समर्थन करते हैं, उन्हें इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।

राजनीतिक विवाद के बीच BJP की अन्य आलोचनाएँ

विरोध प्रदर्शन के साथ ही, BJP ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर भी सवाल उठाए। पार्टी ने कहा कि राहुल गांधी पिछले 22 साल में 54 बार विदेश गए हैं और उनकी इन यात्राओं का खर्च लगभग ₹60 करोड़ है। BJP के प्रवक्ता संबित पात्रा ने यह भी कहा कि राहुल को यह बताना चाहिए कि उनके इन दौरों का वित्तीय स्रोत क्या है।

पुलिस की कार्रवाई के संबंध में विवरण

पुलिस ने सभी BJP कार्यकर्ताओं को शांति से वहां से हटाने का निर्णय लिया। इस दौरान, पुलिस ने सुरक्षा का ध्यान रखा और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचते हुए प्रदर्शन को नियंत्रित किया। यह घटना जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था को बनाए रखने के प्रयासों का हिस्सा है।

जम्मू-कश्मीर का सामाजिक परिदृश्य

जम्मू-कश्मीर में शराबबंदी की मांग केवल राजनीतिक विवाद नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की सामाजिक स्थिति का भी प्रतीक है। विशेषज्ञों का कहना है कि शराब पर प्रतिबंध का असर समाज के विभिन्न वर्गों पर पड़ेगा, खासकर उन लोगों पर जिनका इसके सेवन से प्रभावित होता है।

सरकारी नीतियां और भविष्य की योजनाएं

राज्य सरकार ने नशामुक्ति के लिए कई योजनाएं बनाई हैं, जिससे उम्मीद की जा रही है कि राज्य में एक सकारात्मक बदलाव आएगा। आने वाले दिनों में, सरकार इन्हें लागू करने की दिशामें कदम उठाएगी।

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