जम्मू-कश्मीर में आतंकी घुसपैठ की आशंका- भारतीय सेना अलर्ट, कठुआ में बढ़ी सुरक्षा चौकसी
जम्मू-कश्मीर की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों द्वारा घुसपैठ की संभावना को लेकर सुरक्षा एजेंसिया हाई अलर्ट पर हैं। खुफिया इनपुट्स से मिली जानकारी के अनुसार, 13 से 15 जून के बीच कठुआ जिले के दलातर-फरपुर सेक्टर से घुसपैठ की कोशिश की जा सकती है। खासतौर पर उज्ह नदी के रास्ते इन आंतकियों के भारत में प्रवेश की संभावनाएं बढ़ गई हैं। आकड़ों के अनुसार, PoK के आतंकी लॉन्च पैड्स पर लगभग 150-200 आतंकियों का समूह घुसपैठ की तैयारी में है।
अत्यधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता
सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में सीमा पार आतंकियों की गतिविधियों में वृद्धि देखने को मिली है। इसी के चलते सुरक्षा बलों ने अपनी चौकसी को और कड़ा कर दिया है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) के साथ अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी तेज कर दी है। नदी के मार्गों और घुसपैठ संभावित रास्तों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ड्रोन, नाइट विजन इक्युपमेंट और अन्य तकनीकी संसाधनों के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियों पर नज़र रखी जा रही है।
BSF SOG CRPF के साथ भारतीय सेना ने संभाला मोर्चा
जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती जिले कठुआ में सुरक्षा ग्रिड को बेहद संवेदनशील और अभेद्य बना दिया गया है। खुफिया एजेंसियों से मिले एक बेहद गंभीर इनपुट के मुताबिक, 13 से 15 जून के बीच आतंकियों का एक गुट कठुआ जिले के दलातर-फरपुर सेक्टर से भारतीय सीमा में घुसपैठ करने की फिराक में है। इस विशिष्ट और समय-संवेदनशील खुफिया अलर्ट के बाद भारतीय सेना, सीमा सुरक्षा बल (BSF), जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान दल (SOG) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने पूरे अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मोर्चा संभाल लिया है।
सुरक्षा अलर्ट और सार्वजनिक सुरक्षा
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। प्रशासन ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है, विशेष रूप से खराब मौसम या रात के समय जब दृश्यता कम होती है। सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी प्रकार की अवांछनीय गतिविधि को प्रभावी ढंग से रोका जा सके। सुरक्षा एजेंसियों का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शांति बनाए रखना और निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
सुरक्षा ग्रिड और प्रशासनिक सक्रियता
क्षेत्र की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए एक बहु-स्तरीय सुरक्षा ढांचा तैयार किया गया है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) और स्थानीय पुलिस ने मिलकर गश्त तेज कर दी है। इस रणनीति के कुछ प्रमुख पहलू निम्नलिखित हैं-
तकनीकी निगरानी: कठिन भौगोलिक परिस्थितियों पर नज़र रखने के लिए आधुनिक निगरानी उपकरणों और ड्रोनों का उपयोग किया जा रहा है ताकि हर गतिविधि पर पैनी नज़र रखी जा सके।
संयुक्त गश्त: भारतीय सेना और पुलिस की विशेष टीमें संवेदनशील इलाकों और ऊंचे पहाड़ी रास्तों पर निरंतर गश्त कर रही हैं ताकि सुरक्षा घेरा अभेद्य बना रहे।
सतर्कता अभियान: सुरक्षा बल सीमा के निकटवर्ती क्षेत्रों और जंगली इलाकों में सघन तलाशी अभियान चला रहे हैं ताकि किसी भी संदिग्ध स्थिति का समय रहते पता लगाया जा सके।
आवाजाही पर प्रतिबंध और सुरक्षा निर्देश
ऐहतियात के तौर पर, प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकटवर्ती क्षेत्रों में रात के समय आवाजाही पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं। रात 9:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक बिना किसी अनिवार्य कारण के आवाजाही को नियंत्रित किया गया है ताकि सुरक्षा कार्यों में बाधा न आए। राजमार्गों और महत्वपूर्ण मार्गों पर विशेष चेकिंग पॉइंट स्थापित किए गए हैं, जहाँ वाहनों की नियमित जाँच की जा रही है।
स्थानीय सहयोग और विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDGs)
सुरक्षा व्यवस्था में स्थानीय समुदायों का सहयोग भी लिया जा रहा है। कठुआ पुलिस ने विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDGs) के साथ समन्वय बैठकें की हैं ताकि ग्रामीण स्तर पर भी सुरक्षा निगरानी मजबूत हो। स्थानीय निवासियों को किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या वस्तु की सूचना तुरंत पुलिस हेल्पलाइन पर देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
वर्तमान स्थिति और प्रशासनिक समीक्षा
वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं और सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। सुरक्षा बलों का कहना है कि वे किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं और नागरिकों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और सुरक्षा बल पूरी तरह मुस्तैद हैं।
जानें लॉन्च पैड का अर्थ
लॉन्च पैड आतंकवादियों की ट्रेनिंग और घुसपैठ के लिए महत्वपूर्ण स्थान होते हैं। यहां पर केवल ट्रेनिंग दी जाती है, बल्कि यही से आतंकियों को लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पार करने के लिए भी भेजा जाता है। पिछले हफ्ते सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 42 आतंकी लॉन्च पैड्स व ट्रेनिंग सेंटर्स का पता लगाया था। उसकी निगरानी के बाद से इन स्थानों पर तैनात आतंकियों की गतिविधियों पर प्रतीक नजर रखी जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियों के व्यापक कदम
सुरक्षा एजेंसियां सभी प्राप्त इनपुट्स का गहराई से विश्लेषण कर रही हैं। इसके साथ ही किसी भी संभावित घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम करने के लिए व्यापक तैयारियों की योजना बनाई गई है। सूत्रों के अनुसार, अभी (PoK) में 150 से 200 आतंकवादी विभिन्न कैंप में सक्रिय हैं। सुरक्षा व्यवस्था को इस खतरे के मद्देनजर और मजबूत किया गया है। सुरक्षा बलों ने किसी भी स्थिती से निपटने के लिए तैयारियां कर ली हैं।
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