Diabetes के बढ़ते मामलों के बीच ‘इंसुलिन प्लांट’ को लेकर नए दावे सामने आ रहे हैं। कुछ शोधों और पारंपरिक उपयोगों के आधार पर इसे ब्लड शुगर नियंत्रित करने में सहायक बताया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञ इसे पूरी तरह दवाओं का विकल्प मानने से पहले सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
क्या है इंसुलिन प्लांट और क्यों चर्चा में?
इंसुलिन प्लांट, जिसका वैज्ञानिक नाम Costus igneus है, इन दिनों खासतौर पर शुगर मरीजों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। यह एक सजावटी पौधा है, जिसे आसानी से घर में गमले में उगाया जा सकता है। इसके पत्तों को लेकर दावा किया जाता है कि नियमित सेवन से ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहता है। भारत सहित कई देशों में लोग इसे प्राकृतिक उपचार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। खास बात यह है कि यह पौधा देखने में भी आकर्षक होता है और कम देखभाल में भी तेजी से बढ़ता है, जिससे यह घर-घर में लोकप्रिय हो रहा है।
डायबिटीज पर इसका असर क्या कहती हैं स्टडी?
Type 2 Diabetes के मरीजों पर किए गए कुछ सीमित शोध बताते हैं कि इंसुलिन प्लांट की पत्तियों में ऐसे बायोएक्टिव तत्व हो सकते हैं, जो शरीर में ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करते हैं। कुछ अध्ययन, जैसे Asian Journal of Research in Botany में प्रकाशित रिपोर्ट, यह संकेत देते हैं कि यह पैनक्रियाज की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
हालांकि, यह दावा कि यह पौधा शरीर में खुद-ब-खुद इंसुलिन बनाना शुरू कर देता है और दवाओं या इंजेक्शन की जरूरत खत्म कर देता है—अभी तक वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह प्रमाणित नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह supplementary भूमिका निभा सकता है, लेकिन मुख्य इलाज का विकल्प नहीं है।


