Bengaluru: 37 साल जेल में रहने के बाद बेंगलुरु के साइबन्ना दो पत्नियों और बेटी की हत्या के आरोपी की कहानी

The CSR Journal Magazine
साइबन्ना एन. नटीकर, भारत के सबसे लंबे समय तक कैद रहे कैदी, 37 साल बाद बेंगलुरु की सेंट्रल जेल से रिहा हुए। 72 वर्षीय साइबन्ना ने अपनी दो पत्नियों और बेटी की हत्या की थी। उन्हें पहले मौत की सजा मिली थी, जो बाद में उम्रकैद में बदल गई। जेल में अच्छे व्यवहार के बावजूद, रिहाई पर उनके चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था। घनी दाढ़ी, सिर पर सफेद बाल और बुढ़ापे के कारण कांपते पैरों के साथ, साइबन्ना ने आखिरकार खुली हवा में सांस ली। जेल अधिकारियों के अनुसार, साइबन्ना भारत के ऐसे पहले कैदी हैं जिन्होंने सबसे लंबी सजा, लगातार 37 साल काटी है।

हत्याओं की कहानी

साइबन्ना का आपराधिक इतिहास बहुत भयानक रहा है। 1988 में, उसने अपनी पहली पत्नी मलकाव्वा की बेरहमी से हत्या कर दी थी, क्योंकि उसे शक था कि वह बेवफाई कर रही है। इस अपराध के लिए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, लेकिन 1994 में उसे पैरोल पर जेल से रिहा कर दिया गया। इसके बाद उसने नागाम्मा नाम की महिला से दूसरी शादी की और उनकी एक बेटी हुई। लेकिन कुछ ही हफ़्तों में उसे अपनी दूसरी पत्नी पर शक होने लगा और उसने अपनी पत्नी और अपनी नन्ही बेटी विजयलक्ष्मी, दोनों की हत्या कर दी।

सजा का बदलाव

कोऑपरेटिव सेक्टर में काम करने वाले साइबन्ना ने इन भयानक हत्याओं की वजह से न सिर्फ अपनी नौकरी गंवाई, बल्कि 1 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत की 10 एकड़ जमीन भी खो दी। 2003 में, ट्रायल कोर्ट ने दोहरे हत्याकांड की बर्बरता को देखते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। हालांकि, बाद में कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस सजा को उम्रकैद में बदल दिया। हाई कोर्ट ने साइबन्ना को लगभग दस साल तक अकेले कैद (solitary confinement) में रखने को गैर-कानूनी और अमानवीय माना। उनके लिए यह बदलाव एक नया मोड़ साबित हुआ।

बिना पछतावे की बातें

हत्या करने के बावजूद साइबन्ना के चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था। जेल से रिहा होने के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने हत्याओं के लिए कोई पछतावा नहीं जताया। उनके अनुसार, उन्होंने अपनी पत्नियों को इसलिए मारा क्योंकि वे रास्ते से भटक गई थीं। पहली हत्या के समय, उनके साथ मौजूद आदमी भाग गया था, इसलिए उन्होंने अपनी पत्नी को मारा। दूसरी शादी में, उनकी सास ने ही अपनी बेटी को गलत रास्ते पर डालने का आरोप लगाया। उनके लिए पत्नी की पवित्रता मायने रखती थी।

नई जिंदगी की शुरुआत

साइबन्ना की कहानी केवल उनकी हत्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यक्ति के जीवन में आए बदलावों और बुरे फैंसले की भी दास्तान है। जेल से रिहा होने के बाद, अब उन्हें अपनी जीवन की अगली पंक्तियों को खुद ही लिखना होगा। किन्तु, उनके जीवन की इस नयी यात्रा में क्या अच्छे दिन आएंगे, यह एक बड़ा सवाल है।

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