विधायक के बंगले की सफाई में फायर ब्रिगेड का इस्तेमाल? दाहोद में वीडियो वायरल, ₹2,700 वसूली के बाद भी उठे सवाल
गुजरात के दाहोद जिले के देवगढ़ बारिया में सरकारी फायर ब्रिगेड के कथित निजी इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देवगढ़ बारिया नगरपालिका की फायर ब्रिगेड का वाहन भाजपा विधायक और पूर्व राज्यमंत्री बचुभाई खाबड़ के धानपुर तालुका के पीपेरो गांव स्थित निजी आवास की बाहरी दीवारों पर पानी का छिड़काव करता दिखाई दे रहा है। घटना रविवार की बताई जा रही है। वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आग और अन्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए तैनात सरकारी फायर टेंडर को निजी मकान की सफाई के लिए आखिर किसके निर्देश पर भेजा गया।
आग बुझाने की बजाय करवाई बंगले की सफाई
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, देवगढ़ बारिया नगरपालिका से फायर ब्रिगेड का वाहन पीपेरो स्थित खाबड़ के आवास तक पहुंचा। देवगढ़ बारिया से यह स्थान करीब 24 किलोमीटर दूर बताया गया है। वहां पहुंचने के बाद फायरकर्मियों को किसी आग या आपात स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा, बल्कि उनसे मकान की बाहरी दीवारों पर पानी की तेज धार से सफाई करने को कहा गया। मौके पर मौजूद फायरकर्मी को जब वास्तविक उद्देश्य का पता चला तो उसने इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी। इसके बाद फायर अधिकारी ने सफाई का काम रोकने के निर्देश दिए।
આદિવાસી પટ્ટામાં વિકાસનો અભાવ કેમ છે?
જનતા પાણી માટે વલખાં મારે છે અને આવા કોભાંડી નેતાઓ સરકારી ફાયર ફાઈટરથી પોતાના બંગલા ધોવડાવે છે!
આની પહેલા પણ આ વ્યક્તિએ કેટલું કોભાંડ કરેલું પણ કાંઈ ફર્ક પડ્યો? ના!
રાજાશાહી હો! @bachubhaikhabad @CollectorDahod @SP_Dahod #dahod #protest https://t.co/MvyDNwMj1w
— ROHIT_SANGADA (@_ROHITSANGADA) October 5, 2026
‘फायर कॉल’ समझकर भेजा गया था वाहन
देवगढ़ बारिया नगरपालिका के अध्यक्ष धर्मेश कलाल के मुताबिक, नगरपालिका को फोन के जरिए सूचना मिली थी और इसे फायर कॉल समझकर वाहन भेजा गया। फायर अधिकारी मयूर चौहान ने भी बताया कि उन्हें नगरपालिका अध्यक्ष की ओर से फायर कॉल की जानकारी दी गई थी। उन्होंने वाहन भेजने से पहले यह स्पष्ट करने की कोशिश की थी कि मामला सामान्य फायर कॉल है या कोई विशेष कॉल, लेकिन वाहन मौके पर पहुंचने के बाद स्थिति अलग निकली। चौहान के अनुसार, फायरकर्मी जब खाबड़ के घर पहुंचे तो वहां मौजूद लोगों ने उन्हें मकान की बाहरी दीवारों को पानी से धोने के लिए कहा। फायरकर्मियों ने कुछ समय तक पानी का छिड़काव किया, लेकिन जब फायर अधिकारी को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत काम बंद करने को कहा और वरिष्ठ अधिकारियों को मामले से अवगत कराया। इसके बाद नगरपालिका प्रशासन ने वाहन के इस्तेमाल के लिए शुल्क वसूला।
₹2,700 की रसीद, लेकिन विवाद खत्म नहीं
मामला सामने आने के बाद देवगढ़ बारिया नगरपालिका ने खाबड़ के बेटे बलवंत खाबड़ के नाम पर करीब ₹2,700 की राशि वसूल की। नगरपालिका की ओर से शुल्क वसूल किए जाने के बावजूद विवाद थमा नहीं है। मुख्य सवाल यह है कि क्या आपातकालीन सेवा के लिए उपलब्ध फायर टेंडर को किसी निजी मकान की सफाई के लिए भेजने की अनुमति नगरपालिका के नियमों में है। प्रशासन अब यह भी देख रहा है कि वाहन किसके निर्देश पर भेजा गया, उसकी लॉगबुक में क्या दर्ज किया गया और क्या इस काम के लिए सक्षम स्तर से अनुमति ली गई थी।
फायर ब्रिगेड का काम आग बुझाना और जान बचाना
फायर ब्रिगेड किसी भी नगरपालिका की महत्वपूर्ण आपातकालीन सेवा होती है। इसका प्राथमिक उद्देश्य आग लगने की घटनाओं पर तत्काल पहुंचना, लोगों को सुरक्षित निकालना, संपत्ति को नुकसान से बचाना और अन्य आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्य करना है। दाहोद जिले की आपदा प्रबंधन योजना में भी देवगढ़ बारिया नगरपालिका के पास फायर टेंडर और वाटर बोउजर जैसे संसाधनों का उल्लेख किया गया है। ऐसे में यदि फायर टेंडर को निजी संपत्ति की सफाई के लिए भेजा जाता है तो उससे केवल सरकारी पानी या वाहन के इस्तेमाल का सवाल नहीं उठता, बल्कि उस दौरान वाहन किसी वास्तविक आपात स्थिति के लिए उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा भी सामने आता है। यही वजह है कि इस घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल और जवाबदेही पर बहस तेज हो गई है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
घटना का वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस ने भी इसे लेकर सवाल उठाए हैं। देवगढ़ बारिया कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष राजेश रावल ने पूछा कि यदि सफाई के दौरान कोई गंभीर घटना हो जाती या उसी समय कहीं आग लग जाती तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस ने इस मामले को कथित VIP संस्कृति और सरकारी मशीनरी के संभावित दुरुपयोग से जोड़ते हुए सवाल उठाया है कि क्या किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि के फोन पर नगरपालिका की आपात सेवा को निजी काम के लिए भेजा जाना उचित है। स्थानीय राजनीति में यह मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि फायर ब्रिगेड जैसी सेवा का सीधा संबंध आम लोगों की सुरक्षा से है।
प्रशासन की जांच पर निगाह
वीडियो वायरल होने के बाद नगरपालिका प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारियों द्वारा यह जांच की जा रही है कि फायर टेंडर को किस आदेश के आधार पर भेजा गया था और वाहन की आधिकारिक लॉगबुक में इस यात्रा तथा उसके उद्देश्य की क्या जानकारी दर्ज है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि निजी परिसर में पानी के छिड़काव के लिए नगरपालिका की कोई निर्धारित व्यवस्था या शुल्क संबंधी प्रावधान लागू होता है या नहीं। इस बीच, विधायक बचुभाई खाबड़ की ओर से इस पूरे मामले पर कोई स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
पुराना विवाद भी चर्चा में
इस घटना के साथ बचुभाई खाबड़ का नाम पहले सामने आए एक अन्य विवाद के कारण भी चर्चा में है। मई 2025 में उनके बेटों बलवंत खाबड़ और किरण खाबड़ को दाहोद पुलिस ने कथित करोड़ों रुपये के मनरेगा घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया था। खाबड़ ने इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था और कहा था कि उनका परिवार सामग्री आपूर्ति के कारोबार से जुड़ा है। हालांकि मौजूदा फायर ब्रिगेड विवाद का उस मामले से सीधा संबंध नहीं है। दोनों घटनाओं को अलग-अलग देखना जरूरी है। वर्तमान विवाद का केंद्र सरकारी फायर टेंडर के कथित निजी इस्तेमाल, उसे भेजने की अनुमति और नगरपालिका प्रशासन की जवाबदेही है।
अब सबसे बड़ा सवाल—किसके आदेश पर गया फायर टेंडर?
देवगढ़ बारिया की इस घटना ने सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या फायर ब्रिगेड को निजी मकान की सफाई के लिए भेजना नियमों के तहत था? वाहन को 24 किलोमीटर दूर भेजने का निर्णय किस अधिकारी ने लिया? क्या वाहन के रवाना होने से पहले उसकी लॉगबुक में उद्देश्य दर्ज किया गया था? और यदि मौके पर कोई आपात स्थिति नहीं थी तो फायरकर्मियों को निजी संपत्ति की सफाई करने के लिए क्यों कहा गया? नगरपालिका द्वारा शुल्क वसूल कर लेने से सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़े मूल सवाल अपने आप समाप्त नहीं होते। जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि वाहन भेजने की प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या नहीं और इसके लिए प्रशासनिक रूप से कौन जिम्मेदार था। फिलहाल वायरल वीडियो ने दाहोद की स्थानीय राजनीति में सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल और वीआईपी संस्कृति को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।
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