Make For The World: वित्त मंत्री का वैश्विक निवेशकों को आमंत्रण, भारत को ग्लोबल एक्सपोर्ट हब बनाने का रोडमैप

The CSR Journal Magazine

भारत में बनाओ, दुनिया भर में बेचो! वित्त मंत्री ने विदेशी कंपनियों को दिया बड़ा ऑफर

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैश्विक निवेशकों को “भारत में निर्माण करें और दुनिया के लिए बनाएं” (Manufacture in India, Build for the world) का एक बड़ा और खुला ऑफर दिया है। अमेरिका और कनाडा की अपनी उच्च स्तरीय यात्रा के दौरान, वित्त मंत्री ने शिकागो में आयोजित एक बिजनेस राउंडटेबल में दुनिया भर की दिग्गज कंपनियों और निवेशकों को भारत के मजबूत आर्थिक सुधारों, कुशल कार्यबल और विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। सरकार का यह कदम भारत को सिर्फ एक बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रमुख वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र (Global Manufacturing and Export Hub) के रूप में स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है।

भारत में बनाओ, दुनिया भर में बेचो! वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेशी कंपनियों को दिया ऐतिहासिक ऑफर

शिकागो और टोरंटो में बिजनेस राउंडटेबल के दौरान वित्त मंत्री ने वैश्विक दिग्गजों को भारत आने का न्योता दिया।
रणनीतिक बदलाव: ‘मेक इन इंडिया’ अब सिर्फ भारत की घरेलू जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) को संभालने के लिए तैयार है।
प्रमुख फोकस क्षेत्र: विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, वित्तीय तकनीक (FinTech), नवाचार (Innovation) और खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing)।
आर्थिक मजबूती: वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7% की विकास दर के साथ भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

वैश्विक मंच पर भारत की नई हुंकार: “सिर्फ बाजार नहीं, पार्टनर बनें”

अमेरिका और कनाडा की छह दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर गईं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैश्विक व्यापार जगत के सामने भारत का एक नया और बेहद आकर्षक खाका पेश किया है। शुक्रवार (28 अगस्त 2026) को शिकागो में भारत के महावाणिज्य दूतावास और ‘यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम’ (USISPF) द्वारा आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में वित्त मंत्री ने साफ कहा, “भारत का निवेश प्रस्ताव किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह पिछले एक दशक के निरंतर सुधारों, बड़े पैमाने की विकास क्षमताओं, बेजोड़ प्रतिभा और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे का अनूठा संगम है।”वित्त मंत्री ने विदेशी कंपनियों से आग्रह किया कि वे भारत को केवल एक सामान बेचने वाले बाजार (Consumer Market) के रूप में देखना बंद करें, बल्कि इसे अपने वैश्विक संचालन के लिए एक रणनीतिक विनिर्माण आधार (Strategic Manufacturing Base) और नवाचार केंद्र के रूप में अपनाएं। उन्होंने विदेशी पूंजीपतियों को सीधे शब्दों में ऑफर दिया कि वे भारत की उत्पादन लिंक प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं का फायदा उठाकर यहाँ कारखाने लगाएं, तकनीक विकसित करें और यहीं से पूरी दुनिया को निर्यात करें।

नीतियों में बड़ा बदलाव: ‘मेक इन इंडिया’ से ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि वित्त मंत्री का यह बयान भारत की आर्थिक रणनीति में एक बड़े और सूक्ष्म बदलाव को दर्शाता है। साल 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Make in India अभियान की शुरुआत की थी, तब मुख्य ध्यान घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने पर था। लेकिन अब, भारत अपनी सीमाओं से बाहर देख रहा है। सरकार का लक्ष्य भारत को चीन के विकल्प के रूप में एक अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और कुशल वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना है। हाल ही में सरकार द्वारा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के नियमों को और अधिक उदार बनाया गया है, जिससे विदेशी कंपनियों के लिए भारत में इन्वेंट्री-आधारित संचालन और ई-कॉमर्स निर्यात करना बेहद आसान हो गया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी इस समय जापान के दौरे पर हैं, जहां वे भारत को एक ‘भरोसेमंद निवेश गंतव्य’ के रूप में प्रमोट कर रहे हैं, जो यह दिखाता है कि पूरी सरकार इस मिशन में एक साथ जुटी हुई है।

इन सेक्टर्स पर रहेगा सरकार का विशेष जोर

राउंडटेबल बैठक के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उन प्रमुख क्षेत्रों को रेखांकित किया जहां विदेशी कंपनियों के लिए असीमित अवसर मौजूद हैं-
एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स: भारत पहले ही मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में एक बड़ा निर्यातक बनकर उभरा है। अब सरकार का ध्यान केवल असेंबलिंग (घटकों को जोड़ने) पर नहीं, बल्कि गहरे कलपुर्जा निर्माण (Component Manufacturing) और सेमीकंडक्टर चिप्स बनाने पर है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स: देश में समर्पित फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridors), रेलवे का आधुनिकीकरण और हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। वित्त मंत्री ने निवेशकों को ‘नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड’ (NIIF) के माध्यम से इन परियोजनाओं में दीर्घकालिक संस्थागत पूंजी लगाने का न्योता दिया।
फूड प्रोसेसिंग (खाद्य प्रसंस्करण): भारत के विशाल कृषि आधार और मध्यम वर्ग की बढ़ती आय को देखते हुए पैकेजिंग, कोल्ड-चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स में निवेश की भारी संभावनाएं हैं। कंपनियाँ यहाँ प्रसंस्करण इकाइयां लगाकर वैश्विक मानकों के उत्पाद तैयार कर सकती हैं।
डिफेंस और एयरोस्पेस: ‘आत्मनिर्भर भारत‘ और iDEX जैसी पहलों के तहत ड्रोन, स्वायत्त प्रणालियों (Autonomous Systems) और रक्षा उपकरणों के सह-विकास (Co-development) और सह-उत्पादन के लिए भारत विदेशी कंपनियों को बड़े ठेके और साझेदारियां दे रहा है।

आंकड़े दे रहे हैं गवाही: भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति

विदेशी बाजारों में हालिया उतार-चढ़ाव और वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी तत्व बेहद मजबूत हैं।
GDP वृद्धि दर: वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी विकास दर 7.7 प्रतिशत रही है और चालू तिमाही में इसके लगभग 8 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।
FDI में उछाल: चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) में 90% का भारी उछाल देखा गया है, जो पिछले साल के $11.8 बिलियन से बढ़कर $22.43 बिलियन पर पहुंच गया है।
निर्यात में क्रांति: अकेले इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र का उत्पादन पिछले दशक के ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर ₹11.3 लाख करोड़ हो गया है, जबकि निर्यात ₹38,000 करोड़ से उछलकर ₹3.27 लाख करोड़ के पार जा चुका है।

गिफ्ट सिटी और डिजिटल तकनीक का आकर्षण

वित्त मंत्री ने विशेष रूप से गुजरात के GIFT City (गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी) का जिक्र किया, जो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं के लिए एक विश्व स्तरीय टैक्स-फ्री और सुलभ हब बन चुका है। इसके अलावा, भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) जैसे कि UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) ने देश में व्यापार करने की लागत और समय को काफी कम कर दिया है, जिससे वैश्विक कंपनियां भारत के वित्तीय ईकोसिस्टम की ओर आकर्षित हो रही हैं। कनाडा के निवेशकों के साथ टोरंटो में हुई बैठक में वित्त मंत्री ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और मजबूत प्रवासी समुदाय (Diaspora) का हवाला देते हुए वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब डॉलर सालाना तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया और आगे की राह

वैश्विक वित्तीय दिग्गजों और फंड मैनेजरों ने भारत के इस ‘ओपन ऑफर’ का स्वागत किया है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को वैश्विक बाजारों से आ रहे कड़े मुकाबले (जैसे वियतनाम, थाईलैंड और मेक्सिको) को देखते हुए अपनी नियामक प्रक्रियाओं और भूमि-श्रम सुधारों को और अधिक सरल बनाना होगा। वित्त मंत्री ने आश्वस्त किया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और वित्त मंत्रालय मिलकर व्यापार को आसान बनाने (Ease of Doing Business) के लिए लगातार नियमों में ढील दे रहे हैं और बांड मार्केट सहित पूंजी प्रवाह को बढ़ाने के लिए जल्द ही कई और सुधारात्मक कदमों की घोषणा की जाएगी।

विकसित भारत 2047 का सपना

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह वैश्विक दौरा और ‘बनाओ भारत में, बेचो दुनिया में’ का नारा यह साफ करता है कि भारत अब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में सिर्फ एक मूक दर्शक नहीं, बल्कि एक ड्राइविंग सीट पर बैठने वाला रणनीतिक साझेदार बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह ऑफर आने वाले समय में देश में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने और ‘विकसित भारत 2047‘ के सपने को साकार करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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