डिजिटल क्रांति का वैश्विक परचम: दुनिया के 11 देशों में पहुंचा भारत का UPI

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डिजिटल क्रांति की वैश्विक गूंज: 11 देशों में लहराया भारत के UPI का परचम

भारत ने टेक्नोलॉजी और डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में एक ऐसा ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है, जिसने दुनिया के बड़े-बड़े विकसित देशों को हैरान कर दिया है। कभी कैश (नकद) पर निर्भर रहने वाला भारत आज वैश्विक डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम का नेतृत्व कर रहा है। भारत के स्वदेशी डिजिटल पेमेंट सिस्टम, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने देश की सीमाओं को लांघकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमा ली है। अब तक दुनिया के 11 प्रमुख देशों में भारत का UPI सफलतापूर्वक पहुंच चुका है, जो भारत की बढ़ती डिजिटल ताकत और ‘सॉफ्ट पावर’ का सबसे बड़ा प्रमाण है। यह सिर्फ एक पेमेंट सिस्टम का विस्तार नहीं है, बल्कि यह वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) और भारतीय तकनीकी कौशल की वैश्विक स्वीकार्यता की एक ऐतिहासिक कहानी है।

UPI की वैश्विक यात्रा की शुरुआत और विजन

भारत में साल 2016 में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा UPI की शुरुआत की गई थी। महज कुछ ही सालों में इसने भारत के रिटेल पेमेंट परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया। रेहड़ी-पटरी वाले से लेकर बड़े-बड़े मॉल तक, UPI भारत की जीवनरेखा बन गया। लेकिन भारत का विजन इसे केवल देश तक सीमित रखने का नहीं था। NPCI की अंतरराष्ट्रीय शाखा, NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) ने दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ साझेदारी करना शुरू किया। इस वैश्विक यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारतीय पर्यटकों, प्रवासियों और छात्रों को विदेश में बिना किसी मुद्रा परिवर्तन (Currency Exchange) की झंझट के, सीधे अपने भारतीय बैंक खाते से सुरक्षित और तुरंत भुगतान करने की सुविधा देना था। आज यह विजन एक बड़े मिशन में बदल चुका है।

किन 11 देशों में पहुंचा भारत का UPI?

भारत का UPI नेटवर्क एशिया से लेकर यूरोप और मध्य पूर्व (Middle East) तक फैल चुका है। आइए जानते हैं उन 11 प्रमुख देशों के बारे में जहां भारतीय नागरिक अब शान से UPI का इस्तेमाल कर सकते हैं-
सिंगापुर (Singapore): सिंगापुर इस सूची में सबसे आगे रहने वाले देशों में से एक है। भारत के UPI और सिंगापुर के ‘PayNow’ के बीच रियल-टाइम लिंकेज स्थापित किया गया है, जिससे दोनों देशों के बीच तुरंत और बेहद कम लागत में फंड ट्रांसफर संभव हो गया है।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE): खाड़ी देशों में यूएई भारत का एक बड़ा रणनीतिक साझेदार है। यहां के मशरेक बैंक (Mashreq Bank) और ‘Mashreq NEOPAY’ के साथ साझेदारी के तहत भारतीय यात्री वहां के मर्चेंट स्टोर्स पर UPI के जरिए आसानी से क्यूआर (QR) कोड स्कैन करके भुगतान कर रहे हैं।
फ्रांस (France): यूरोप में UPI की एंट्री एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। फ्रांस के पेरिस में स्थित दुनिया के प्रसिद्ध एफिल टॉवर (Eiffel Tower) से इसकी शुरुआत हुई, जहां अब टिकट बुकिंग के लिए UPI स्वीकार किया जा रहा है।
मॉरीशस (Mauritius): हिंद महासागर के इस खूबसूरत द्वीप देश में भी भारत के UPI को लॉन्च किया जा चुका है। इसके साथ ही वहां भारत के रुपे (RuPay) कार्ड को भी मंजूरी मिली है।
श्रीलंका (Sri Lanka): भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में भी डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करते हुए UPI सेवाओं की शुरुआत की गई है, जिससे वहां पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है।
नेपाल (Nepal): नेपाल दुनिया का पहला ऐसा देश था जिसने भारत के UPI को अपने देश में डिजिटल भुगतान नेटवर्क के रूप में अपनाया। वहां यह सेवा बेहद लोकप्रिय है।
भूटान (Bhutan): भूटान भी भारत के UPI मर्चेंट स्थानों पर QR कोड आधारित भुगतान को पूरी तरह से अपनाने वाला शुरुआती पड़ोसी देश है।
ओमान (Oman): ओमान के सेंट्रल बैंक और NPCI के बीच हुए समझौते के तहत वहां रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों को पैसे ट्रांसफर करने और मर्चेंट पेमेंट के लिए UPI की सुविधा मिली है।
कतर (Qatar): कतर में भी UPI सेवाओं को मर्चेंट आउटलेट्स पर लागू किया गया है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में भारत की डिजिटल पहुंच और मजबूत हुई है।
मलेशिया (Malaysia): दक्षिण-पूर्व एशिया के एक और प्रमुख देश मलेशिया में मर्चेंट पेमेंट्स के लिए UPI नेटवर्क को सक्षम किया गया है।
यूनाइटेड किंगडम (UK): ब्रिटेन में भी भारतीय पर्यटकों और छात्रों की सुविधा के लिए कुछ प्रमुख मर्चेंट नेटवर्क्स और पेमेंट गेटवे के साथ UPI को इंटीग्रेट किया गया है।

वैश्विक स्तर पर कैसे काम करता है UPI?

विदेशों में UPI का उपयोग करना उतना ही सरल है जितना भारत में किसी स्थानीय दुकान पर करना। जब कोई भारतीय नागरिक इन 11 देशों में जाता है, तो उसे किसी अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड या भारी-भरकम एक्सचेंज फीस वाले फॉरेक्स कार्ड पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता। वहां के मर्चेंट आउटलेट पर लगे अंतरराष्ट्रीय QR कोड को अपने मोबाइल ऐप (जैसे BHIM, PhonePe, Google Pay) से स्कैन करना होता है। इसके बाद ऐप में राशि भारतीय रुपये (INR) में दिखाई देती है, जो उस समय के लाइव एक्सचेंज रेट पर आधारित होती है। यूजर जैसे ही अपना सुरक्षित UPI पिन दर्ज करता है, भुगतान तुरंत पूरा हो जाता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और फ्रॉड-मुक्त है।

भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए इसके क्या मायने हैं?

UPI का यह वैश्विक विस्तार सिर्फ तकनीक का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि इसके गहरे आर्थिक और रणनीतिक मायने हैं-
भारतीय प्रवासियों और पर्यटकों को बड़ी राहत: हर साल करोड़ों भारतीय विदेशों की यात्रा करते हैं। विदेशी मुद्रा विनिमय (Currency Conversion) के समय लगने वाले भारी शुल्क और छुपे हुए चार्जेस (Hidden Fees) से अब उन्हें मुक्ति मिल रही है।
रेमिटेंस (Remittance) की लागत में भारी कमी: भारत दुनिया में सबसे ज्यादा रेमिटेंस (विदेशों से धन प्राप्ति) पाने वाला देश है। पारंपरिक तरीकों से विदेश से भारत पैसे भेजने में 5% से 7% तक का खर्च आता है। UPI लिंकेज (जैसे सिंगापुर के साथ) के जरिए यह काम कुछ ही सेकंड्स में और बेहद मामूली शुल्क पर हो जाता है।
डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम: स्थानीय मुद्राओं और UPI के सीधे जुड़ाव से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भुगतानों में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करने में मदद मिल रही है।
ग्लोबल फिनटेक लीडर के रूप में भारत: दुनिया के विकसित देश भी अभी तक इतना तेज और रियल-टाइम मर्चेंट पेमेंट सिस्टम विकसित नहीं कर पाए हैं। अमेरिकी और यूरोपीय देश भी अब भारत के इस मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं।

आगे की राह: क्या है भविष्य का प्लान?

11 देशों का यह आंकड़ा तो बस एक शुरुआत है। NPCI इंटरनेशनल लगातार अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और कई अन्य यूरोपीय व अफ्रीकी देशों के साथ बातचीत कर रहा है। आने वाले समय में डिजिटल करेंसी (e-Rupee) और UPI के कॉम्बिनेशन को वैश्विक स्तर पर और अधिक विस्तारित करने की योजना है। भारत का लक्ष्य एक ऐसा वैश्विक नेटवर्क तैयार करना है, जहां दुनिया का कोई भी नागरिक किसी भी देश में बिना किसी भौगोलिक बाधा के, तुरंत और सुरक्षित रूप से वित्तीय लेनदेन कर सके।

आत्मनिर्भर भारत की वैश्विक ताकत

भारत की इस डिजिटल ताकत ने दुनिया के सामने यह साबित कर दिया है कि भारत अब केवल दूसरों की बनाई तकनीकों का उपभोक्ता नहीं है, बल्कि वह खुद ऐसी विश्वस्तरीय तकनीक का निर्माता है जो पूरी दुनिया को एक नया रास्ता दिखा सकती है। 11 देशों में UPI का पहुंचना ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान की एक शानदार और गौरवशाली वैश्विक जीत है।

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