जंगलों में आग का कहर: हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में वायुसेना का राहत अभियान जारी

The CSR Journal Magazine
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में जंगलों में आग अब एक बड़ा संकट बन चुकी है। विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश के सोलन में कसौली में लगी आग ने सैन्य प्रतिष्ठानों और रिहायशी इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है। इसके चलते भारतीय वायुसेना को राहत कार्य में शामिल होना पड़ा है। उत्तरकाशी में जंगल की आग ने गंगोत्री हाईवे तक पहुंचकर 70 यात्रियों को सुरक्षित निकालने का काम किया। जम्मू-कश्मीर में भी गर्मी और सूखे जंगलों के चलते आग की लपटें तेजी से बढ़ रही हैं।

धुएं ने बढ़ाई मुश्किलें

धुएं के कारण पहाड़ियों में विजिबिलिटी में कमी आई है, जिससे लोगों को सांस लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों में दहशत फैल गई है। तेज गर्मी और हवाओं के चलते आग फैलने का खतरा बढ़ा है। वायुसेना ने हिमाचल प्रदेश में रात में भी हेलीकॉप्टर ऑपरेशन जारी रखा है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में पर्वतीय क्षेत्रों में राहत कार्य प्रभावित हो रहा है।

राज्य में विस्तारित तामीर

उत्तराखंड में जंगल की आग ने अब तक तीन लोगों की जान ले ली है और 340 हेक्टेयर से ज्यादा वन क्षेत्र जलकर राख हो चुका है। हिमाचल प्रदेश के कसौली में भी आग 27 घंटों से धधक रही है, जिससे करीब 10 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। इस आग के कारण सैन्य प्रतिष्ठानों और रिहायशी इलाकों को खतरा बढ़ गया है।

बचाव कार्य की व्यवस्था

मौके पर वायुसेना के 4 एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं, जिन्होंने इलाके में 62,500 लीटर पानी गिराया है। जम्मू-कश्मीर के उधमपुर और रामबन जिलों में भी आग लगने की घटनाएं हो रही हैं, जिससे कई गांव प्रभावित हुए हैं। स्थानीय लोग और वन विभाग की टीम मिलकर अग्निशामक अभियान चला रहे हैं। तेज हवाओं की वजह से आग तेजी से फैल रही है।

विजिबिलिटी में कमी और ऐहतियात

आग और धुएं के कारण पहाड़ियों में विजिबिलिटी में कमी आई है, जिससे एरियाज में यात्रा भी मुश्किल हो रही है। लोग रिहायशी इलाकों में रहने के लिए मजबूर हो गए हैं। अग्निशामक दल और स्थानीय लोग मिलकर इस संकट का मुकाबला कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए हैं।

जलवायु परिवर्तन के प्रभाव

इस घटना ने एक बार फिर जलवायु परिवर्तन और उससे जुड़ी चुनौतियों को उजागर किया है। तेज गर्मी, सूखे जंगल और आग की लपटों का यह आगमन उन सिंथेंटिक तत्वों के विकास के खिलाफ एक चेतावनी है, जो प्राकृतिक संसाधनों को प्रभावित कर रहे हैं। इन स्थितियों से निपटने के लिए स्थानीय लोगों और सरकारी एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा।

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