गाढ़ी कमाई पर साइबर ठगों की नजर? बैंकिंग ऐप में तुरंत बदलें ये 4 सेटिंग्स, ऑनलाइन फ्रॉड से बचाएं अपना पैसा 

The CSR Journal Magazine

ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के लिए बैंकिंग ऐप में तुरंत करें ये जरूरी बदलाव!  डेबिट-क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग इस्तेमाल करने वालों के लिए जरूरी खबर!

डिजिटल बैंकिंग ने लोगों की जिंदगी को बेहद आसान बना दिया है। आज घर बैठे मोबाइल फोन से पैसे ट्रांसफर करना, बिजली-पानी के बिल जमा करना, ऑनलाइन खरीदारी करना, निवेश करना और बैंक खाते से जुड़े लगभग सभी जरूरी काम करना संभव है। डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, UPI और मोबाइल बैंकिंग ऐप ने बैंकिंग सेवाओं को पहले से कहीं अधिक तेज और सुविधाजनक बना दिया है। लेकिन जहां डिजिटल बैंकिंग ने सुविधाएं बढ़ाई हैं, वहीं इसके साथ ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर ठगी का खतरा भी तेजी से बढ़ा है। फर्जी कॉल, फिशिंग लिंक, नकली बैंकिंग वेबसाइट, स्क्रीन-शेयरिंग ऐप, कार्ड डिटेल चोरी, OTP फ्रॉड और अनधिकृत ट्रांजेक्शन जैसे मामलों में लोगों की मेहनत की कमाई मिनटों में गायब हो सकती है। ऐसे में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सबसे महत्वपूर्ण सलाह है कि लोग केवल बैंक की सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर न रहें, बल्कि अपने मोबाइल बैंकिंग ऐप और कार्ड सेटिंग्स को भी सुरक्षित तरीके से कॉन्फिगर करें। अधिकांश बैंक अपने ग्राहकों को कई सुरक्षा विकल्प देते हैं, जिनका सही इस्तेमाल करके संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन बंद रखें, जरूरत पड़ने पर ही करें एक्टिव

डेबिट और क्रेडिट कार्ड से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा विकल्पों में से एक है इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन कंट्रोल। कई लोग विदेश यात्रा नहीं करते और न ही विदेशी वेबसाइटों पर नियमित खरीदारी करते हैं। इसके बावजूद उनके कार्ड पर अंतरराष्ट्रीय लेनदेन की सुविधा सक्रिय रहती है। ऐसी स्थिति में यदि किसी साइबर अपराधी के हाथ कार्ड की जरूरी जानकारी पहुंच जाती है, तो विदेशी वेबसाइटों या अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्लेटफॉर्म पर अनधिकृत ट्रांजेक्शन का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए बैंकिंग ऐप या इंटरनेट बैंकिंग में जाकर ग्राहक को यह जांचना चाहिए कि उसके कार्ड पर International Usage या International Transaction की सुविधा सक्रिय है या नहीं।

क्या करना चाहिए?

  • अगर विदेश में खरीदारी या भुगतान की जरूरत नहीं है तो इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन बंद रखें।
  • विदेश यात्रा के समय ही इसे अस्थायी रूप से चालू करें।
  • काम पूरा होने के बाद इसे दोबारा बंद कर दें।
  • अंतरराष्ट्रीय ट्रांजेक्शन के लिए अलग से कम लिमिट तय करें, यदि बैंक ऐसा विकल्प देता है।
यह एक छोटा सा बदलाव है, लेकिन कार्ड के गलत इस्तेमाल की संभावनाओं को कम करने में मदद कर सकता है।

ट्रांजेक्शन लिमिट सेट करें, खाते की पूरी रकम को जोखिम में न डालें

अधिकांश बैंक ग्राहकों को अपने डेबिट कार्ड और कुछ अन्य बैंकिंग माध्यमों की Daily Transaction Limit तय करने का विकल्प देते हैं। कई लोग कार्ड मिलने के बाद उसकी डिफॉल्ट लिमिट को कभी नहीं बदलते। लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी है कि ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से दैनिक और प्रति ट्रांजेक्शन सीमा तय करें। मान लीजिए किसी व्यक्ति को सामान्य तौर पर रोजाना केवल 5,000 या 10,000 रुपये तक के कार्ड भुगतान की जरूरत होती है। ऐसी स्थिति में कार्ड की बहुत अधिक दैनिक सीमा रखना अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकता है।

आसान उदाहरण

यदि कार्ड की दैनिक ऑनलाइन खरीदारी सीमा 2 लाख रुपये है और किसी तरह कार्ड की जानकारी का गलत इस्तेमाल हो जाता है, तो नुकसान की संभावना अधिक हो सकती है। वहीं, यदि ग्राहक ने अपनी जरूरत के अनुसार कम सीमा तय की है, तो संभावित अनधिकृत लेनदेन का नुकसान सीमित हो सकता है।

अलग-अलग लिमिट पर रखें नजर

बैंकिंग ऐप में कई मामलों में अलग-अलग प्रकार के ट्रांजेक्शन की सीमा निर्धारित करने का विकल्प मिलता है, जैसे ATM से नकद निकासी, ऑनलाइन शॉपिंग, POS मशीन पर भुगतान, कॉन्टैक्टलेस पेमेंट, घरेलू ट्रांजेक्शन और अंतरराष्ट्रीय ट्रांजेक्शन। ग्राहकों को अपनी वास्तविक जरूरत के अनुसार इनकी सीमा तय करनी चाहिए।

कॉन्टैक्टलेस पेमेंट फीचर को जरूरत के हिसाब से सीमित करें

आजकल कई डेबिट और क्रेडिट कार्ड में Contactless Payment की सुविधा दी जाती है। इसके जरिए कार्ड को POS मशीन के पास टैप करके भुगतान किया जा सकता है। यह सुविधा तेज और सुविधाजनक है, लेकिन हर सुविधा के साथ सावधानी भी जरूरी है। यदि ग्राहक कॉन्टैक्टलेस भुगतान का नियमित इस्तेमाल नहीं करता, तो उसे बैंकिंग ऐप में जाकर इस सुविधा की सेटिंग जांचनी चाहिए। कुछ बैंक इसे चालू या बंद करने और इसकी सीमा निर्धारित करने का विकल्प देते हैं।

क्या रखें ध्यान?

  • जरूरत न हो तो कॉन्टैक्टलेस सुविधा बंद रखें।
  • यदि इस्तेमाल करते हैं तो कम सीमा रखें।
  • कार्ड को हमेशा अपनी निगरानी में रखें।
  • संदिग्ध या अनजान भुगतान मशीनों पर कार्ड का इस्तेमाल करने से बचें।
डिजिटल सुविधा का मतलब यह नहीं है कि हर फीचर हर समय सक्रिय रखा जाए। जिस सुविधा की जरूरत नहीं है, उसे बंद रखना सुरक्षा की बेहतर आदत हो सकती है।

कार्ड को लॉक करने की सुविधा का करें इस्तेमाल

बहुत से बैंक अपने मोबाइल बैंकिंग ऐप में Card Lock/Unlock की सुविधा देते हैं। यह फीचर सुरक्षा के लिहाज से बेहद उपयोगी हो सकता है।यदि ग्राहक को लगता है कि वह कुछ समय तक अपना डेबिट या क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल नहीं करेगा, तो उपलब्ध सुविधा के अनुसार कार्ड के कुछ या सभी प्रकार के ट्रांजेक्शन को अस्थायी रूप से बंद किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, कई बैंक ग्राहकों को विकल्पों को अलग-अलग नियंत्रित करने की सुविधा देते हैं- ATM ट्रांजेक्शन, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, POS ट्रांजेक्शन, इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन और कॉन्टैक्टलेस पेमेंट। इसका फायदा यह है कि जरूरत पड़ने पर ग्राहक ऐप के माध्यम से सुविधा को सक्रिय कर सकता है और काम पूरा होने के बाद फिर से बंद कर सकता है।

कार्ड खो जाए तो तुरंत करें ब्लॉक

यदि आपका डेबिट या क्रेडिट कार्ड कहीं खो गया है, चोरी हो गया है या आपको शक है कि उसकी जानकारी किसी गलत व्यक्ति तक पहुंच गई है, तो इंतजार बिल्कुल न करें। तुरंत उठाएं ये कदम-
  1. बैंकिंग ऐप में कार्ड को तुरंत लॉक करें।
  2. बैंक की आधिकारिक हेल्पलाइन से संपर्क करें।
  3. जरूरत पड़ने पर कार्ड को स्थायी रूप से ब्लॉक करवाएं।
  4. नया कार्ड जारी कराने की प्रक्रिया शुरू करें।
  5. बैंक खाते और कार्ड की हाल की ट्रांजेक्शन हिस्ट्री जांचें।
  6. किसी संदिग्ध लेनदेन की जानकारी तुरंत बैंक को दें।
समय पर कार्रवाई करने से संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।

केवल कार्ड ही नहीं, नेट बैंकिंग भी करें सुरक्षित

आजकल साइबर अपराधी केवल कार्ड की जानकारी चुराने तक सीमित नहीं हैं। फर्जी वेबसाइट और नकली लॉगिन पेज के जरिए नेट बैंकिंग यूजरनेम और पासवर्ड चुराने की कोशिशें भी की जाती हैं। इसलिए नेट बैंकिंग इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को कुछ बुनियादी नियमों का पालन जरूर करना चाहिए।

मजबूत पासवर्ड रखें

पासवर्ड ऐसा होना चाहिए जिसे आसानी से अनुमान न लगाया जा सके। इन चीजों से बचें—
  • अपना नाम
  • जन्मतिथि
  • मोबाइल नंबर
  • 123456 जैसे आसान नंबर
  • एक ही पासवर्ड का बार-बार इस्तेमाल
अलग-अलग बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के लिए अलग और मजबूत पासवर्ड रखना बेहतर सुरक्षा आदत है।

किसी को न दें OTP, PIN और CVV

बैंक या कोई भी विश्वसनीय वित्तीय संस्था सामान्य परिस्थितियों में फोन पर ग्राहक से उसका OTP, ATM PIN, CVV नंबर, कार्ड का पूरा विवरण और नेट बैंकिंग पासवर्ड नहीं मांगती। यदि कोई व्यक्ति खुद को बैंक कर्मचारी, RBI अधिकारी, पुलिस अधिकारी या कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताकर ऐसी जानकारी मांगता है, तो बेहद सावधान हो जाना चाहिए। OTP शेयर करना यानी कई मामलों में अपने ट्रांजेक्शन की मंजूरी किसी दूसरे व्यक्ति को देना हो सकता है।

स्क्रीन शेयरिंग ऐप से रहें सावधान

ऑनलाइन फ्रॉड में अपराधी कई बार ग्राहकों को किसी ऐप को डाउनलोड करने के लिए कहते हैं और दावा करते हैं कि इससे बैंकिंग या तकनीकी समस्या ठीक हो जाएगी। कुछ मामलों में स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस मिलने पर अपराधी मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देने वाली संवेदनशील जानकारी देख सकते हैं। इसलिए—
  • किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऐप डाउनलोड न करें।
  • मोबाइल स्क्रीन किसी अनजान व्यक्ति के साथ शेयर न करें।
  • बैंकिंग ऐप खोलकर स्क्रीन शेयरिंग से बचें।
  • अनजान ऐप्स को Accessibility या अन्य संवेदनशील Permissions न दें।

फर्जी बैंकिंग लिंक पर क्लिक न करें

साइबर अपराधी SMS, WhatsApp, ईमेल और सोशल मीडिया के जरिए फर्जी लिंक भेज सकते हैं।ऐसे संदेशों में लिखा हो सकता है- आपका बैंक अकाउंट बंद होने वाला है, KYC तुरंत अपडेट करें, कार्ड ब्लॉक हो जाएगा, रिफंड पाने के लिए क्लिक करें या इनाम जीतने के लिए जानकारी दें। घबराहट पैदा करके ग्राहक से जल्दबाजी में कार्रवाई करवाना फ्रॉड का एक सामान्य तरीका हो सकता है।

सुरक्षित तरीका क्या है?

यदि बैंक से जुड़ा कोई संदेश संदिग्ध लगे, तो—
  • लिंक पर क्लिक न करें।
  • बैंक की आधिकारिक ऐप खोलें।
  • बैंक की आधिकारिक वेबसाइट खुद टाइप करके खोलें।
  • आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर से संपर्क करें।

SMS और ऐप अलर्ट हमेशा रखें एक्टिव

हर बैंक ग्राहक को अपने खाते और कार्ड से होने वाले लेनदेन के लिए अलर्ट की सुविधा देता है। SMS, ईमेल और ऐप नोटिफिकेशन को सक्रिय रखने से किसी संदिग्ध ट्रांजेक्शन की जानकारी जल्दी मिल सकती है। यदि खाते से ऐसा कोई पैसा निकले जो आपने खर्च नहीं किया है, तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। जितनी जल्दी संदिग्ध गतिविधि की पहचान होगी, उतनी जल्दी कार्रवाई करने की संभावना बढ़ेगी।

बैंकिंग ऐप हमेशा आधिकारिक स्टोर से डाउनलोड करें

मोबाइल बैंकिंग ऐप डाउनलोड करते समय भी सावधानी जरूरी है। कभी-कभी नकली ऐप असली बैंकिंग ऐप की तरह दिखने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ऐप डाउनलोड करें, ऐप के डेवलपर की जानकारी जांचें।अनजान वेबसाइट से APK या ऐप फाइल डाउनलोड न करें। बैंकिंग ऐप को नियमित रूप से अपडेट रखें।

मोबाइल फोन की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी

आपका स्मार्टफोन आज केवल फोन नहीं, बल्कि आपका डिजिटल वॉलेट और बैंकिंग केंद्र भी बन चुका है। इसलिए मोबाइल की सुरक्षा सीधे आपकी वित्तीय सुरक्षा से जुड़ी है। जरूर करें ये काम-
  • मजबूत स्क्रीन लॉक लगाएं।
  • Face ID या Fingerprint का इस्तेमाल करें।
  • फोन का सॉफ्टवेयर अपडेट रखें।
  • बैंकिंग ऐप अपडेट रखें।
  • अनजान Wi-Fi नेटवर्क पर बैंकिंग करने से बचें।
  • फोन खोने पर तुरंत बैंकिंग सेवाओं की सुरक्षा जांचें।

पब्लिक Wi-Fi पर नेट बैंकिंग से बचें

रेलवे स्टेशन, होटल, कैफे, एयरपोर्ट या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर मिलने वाले मुफ्त Wi-Fi नेटवर्क सुविधाजनक लग सकते हैं, लेकिन वित्तीय कामों के लिए इनका इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए। सार्वजनिक नेटवर्क पर नेट बैंकिंग, कार्ड डिटेल दर्ज करना या संवेदनशील वित्तीय जानकारी साझा करना जोखिम बढ़ा सकता है। महत्वपूर्ण बैंकिंग काम के लिए अपना मोबाइल डेटा इस्तेमाल करें। विश्वसनीय नेटवर्क का उपयोग करें। अनजान नेटवर्क पर वित्तीय ट्रांजेक्शन से बचें।

एक साथ सभी सुविधाएं चालू रखना जरूरी नहीं

साइबर सुरक्षा का एक आसान सिद्धांत है- जिस सुविधा की जरूरत नहीं, उसे सक्रिय रखने की जरूरत भी नहीं। ग्राहक अपनी बैंकिंग जरूरत के हिसाब से निम्न सुविधाओं को नियंत्रित कर सकते हैं- इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन, ऑनलाइन कार्ड पेमेंट, ATM निकासी, कॉन्टैक्टलेस पेमेंट और POS ट्रांजेक्शन। जरूरत पड़ने पर इन्हें सक्रिय करना और काम पूरा होने पर फिर बंद करना एक उपयोगी सुरक्षा आदत हो सकती है, बशर्ते संबंधित बैंकिंग ऐप में यह सुविधा उपलब्ध हो।

ऑनलाइन फ्रॉड हो जाए तो क्या करें?

अगर आपके साथ ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड हो जाए तो घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करें। सबसे पहले करें ये काम
1. बैंक को तुरंत सूचना दें- अपने बैंक की आधिकारिक हेल्पलाइन या बैंकिंग ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज करें।
2. कार्ड या खाते से जुड़ी सेवाओं को सुरक्षित करें- कार्ड को लॉक या ब्लॉक करें और जरूरत पड़ने पर पासवर्ड बदलें।
3. सभी ट्रांजेक्शन की जानकारी सुरक्षित रखें- SMS, स्क्रीनशॉट, ईमेल और ट्रांजेक्शन विवरण संभालकर रखें।
4. साइबर फ्रॉड की शिकायत करें- भारत में साइबर अपराध की शिकायत संबंधित आधिकारिक साइबर अपराध रिपोर्टिंग माध्यमों के जरिए की जा सकती है।
5. जितनी जल्दी हो सके कार्रवाई करें- देरी होने पर पैसे को रोकने या ट्रेस करने की संभावना प्रभावित हो सकती है।

ग्राहकों के लिए सबसे जरूरी सुरक्षा चेकलिस्ट

बैंकिंग ऐप खोलकर आज ही जांचें-
इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन जरूरत न होने पर बंद है या नहीं
 दैनिक ट्रांजेक्शन लिमिट जरूरत के हिसाब से सेट है या नहीं
ऑनलाइन कार्ड पेमेंट की सीमा कितनी है
 कॉन्टैक्टलेस पेमेंट की सुविधा जरूरी है या नहीं
 कार्ड लॉक/अनलॉक फीचर कहां उपलब्ध है
 SMS और ऐप अलर्ट सक्रिय हैं या नहीं
 बैंकिंग ऐप का पासवर्ड मजबूत है या नहीं
 फोन और बैंकिंग ऐप अपडेटेड हैं या नहीं।

सतर्कता ही डिजिटल बैंकिंग की सबसे बड़ी सुरक्षा

डिजिटल बैंकिंग के दौर में पूरी तरह जोखिम खत्म करना संभव नहीं है, लेकिन सही सावधानियां अपनाकर जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन बंद रखना, ट्रांजेक्शन लिमिट तय करना, कॉन्टैक्टलेस पेमेंट को नियंत्रित करना और जरूरत न होने पर कार्ड को लॉक रखना ऐसी महत्वपूर्ण सुरक्षा आदतें हैं, जिन्हें हर बैंक ग्राहक को समझना चाहिए। इसके साथ ही OTP, PIN और पासवर्ड किसी से साझा न करना, फर्जी लिंक से बचना, स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स को लेकर सावधान रहना और संदिग्ध ट्रांजेक्शन पर तुरंत बैंक को सूचना देना बेहद जरूरी है। याद रखें, आपकी मेहनत की कमाई की सुरक्षा केवल बैंक की जिम्मेदारी नहीं है। सतर्क ग्राहक और सही डिजिटल सेटिंग्स साइबर ठगों के खिलाफ आपकी पहली और सबसे मजबूत सुरक्षा दीवार बन सकती हैं।

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