जेनेटिकली मॉडिफाइड सुअर की किडनी ने बचाई मरीज की जान, 271 दिनों तक बिना डायलिसिस के जिंदा रहा 66 साल का शख्स

The CSR Journal Magazine

एक अद्भुत मेडिकल चमत्कार

वॉशिंगटन: मेडिकल विज्ञान में एक अनोखा घटनाक्रम हुआ है, जिसने किडनी की बीमारी का सामना कर रहे लाखों लोगों को नई उम्मीद दी है। अमेरिका में 66 वर्षीय टिम एंड्रयूज नाम के एक मरीज को आनुवंशिक रूप से संशोधित सुअर की किडनी के बल पर 271 दिनों तक जिंदा रखा गया। इस दौरान उन्हें डायलिसिस की आवश्यकता नहीं पड़ी और उन्होंने सामान्य जीवन जीया। यह मेडिकल इतिहास में अब तक की सबसे लंबी अवधि है जब किसी जानवर का अंग मानव शरीर में इस तरह से काम करने में सफल रहा है।

ब्रिज ट्रांसप्लांट की कहानी

इस प्रक्रिया का सबसे खास पहलू यह था कि सुअर की किडनी ने एक ‘ब्रिज’ या अस्थायी सहारे का काम किया। यह 9 महीने बाद तब हो रहा था जब टिम को एक इंसानी किडनी मिली। मेडिकल जर्नल ‘द लांसेट’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट में इस मामले का जिक्र किया गया है। इस रिपोर्ट ने चिकित्सा जगत में एक नई उम्मीद का संचार किया है।

भारत में अंगों की कमी का मुद्दा

भारत में हर साल लगभग दो लाख नए मरीज गुर्दे की जरूरत के लिए अस्पतालों का रुख करते हैं, लेकिन केवल 14,500 ही ट्रांसप्लांट हो पाते हैं। इस तरह के विकास से न केवल अमेरिका, बल्कि भारत जैसे विकासशील देशों में भी मरीजों को मदद मिल सकती है। पुणे के सीनियर यूरोसर्जन डॉ. संजय कुलकर्णी का कहना है कि सुअर के गुर्दे ने सामान्य किडनी फंक्शन प्रदान किया।

एक्सपेरिमेंटल ट्रीटमेंट का महत्व

एंड्रयूज को सुअर की किडनी USFDA की ‘एक्सपेंडेड एक्सेस इन्वेस्टिगेशनल न्यू ड्रग’ एप्लीकेशन के तहत मिली। यह एप्लीकेशन उन मरीजों के लिए होती है जिनकी जान को खतरा हो और जिन्हें प्रयोगात्मक इलाज की जरूरत होती है। जैसे ही ट्रांसप्लांट किया गया, सुअर की किडनी ने तुरंत कार्य करना शुरू कर दिया।

इम्यून रिस्पांस पर नजर

चिकित्सकों ने किडनी की कार्यक्षमता, शरीर द्वारा रिस्पॉन्स और संक्रमण के खतरे की निगरानी की। 14वें दिन, इम्यून T-सेल्स ने किडनी पर हमला करने का प्रयास किया, लेकिन डॉक्टरों की सक्रियता से इसे नियंत्रित किया गया। इसके अलावा, सुअर से कोई पैथोजन फैलने का खतरा नहीं था। सुअर की किडनी ने अच्छे परिणाम प्रदान किए और अंततः एंड्रयूज को एक मृत व्यक्ति की किडनी दी गई, जो ट्रांसप्लांट के तुरंत बाद काम करने लगी।

भविष्य की संभावनाएं

इस मामले ने यह साबित कर दिया है कि भविष्य में सुअर की किडनी लाखों लोगों की जान बचाने में सहायक हो सकती है। किडनी फेलियर के मामलों में उपचार के लिए नई दिशाओं की तलाश में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल अमेरिका के लिए, बल्कि भारत जैसे देशों के लिए भी एक नई उम्मीद की किरण है।

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