अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस 2026: ‘शांति में निवेश’ का संदेश, कानून मंत्रालय ने कहा- सम्मान, समानता और गरिमा भी है शांति की पहचान
दुनिया में बढ़ते तनाव, संघर्ष और सामाजिक विभाजन के बीच आज 21 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस 2026 मनाया जा रहा है। इस अवसर पर भारत सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय के विधि कार्य विभाग (Department of Legal Affairs) ने शांति के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा है कि शांति का अर्थ केवल युद्ध या हिंसा की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि इसमें गरिमा, समानता, सम्मान, सुरक्षा और आपसी सहयोग भी शामिल हैं। विभाग ने अपने संदेश में इस विचार को सामने रखा कि स्थायी शांति केवल सरकारों के बीच समझौतों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति के रोजमर्रा के निर्णयों और व्यवहार से भी निर्मित होती है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, International Day of Peace हर वर्ष 21 सितंबर को मनाया जाता है। वर्ष 2026 की थीम है— “Invest in Peace: For Everyone, Everywhere, Every Day”, यानी “शांति में निवेश करें: हर व्यक्ति के लिए, हर जगह, हर दिन।”संयुक्त राष्ट्र ने इस वर्ष शांति को एक सक्रिय और निरंतर प्रक्रिया के रूप में रेखांकित किया है। इसका संदेश है कि शांति केवल युद्ध समाप्त होने के बाद हासिल होने वाली स्थिति नहीं, बल्कि समाज में सुरक्षा, सम्मान, अवसर, संवाद और सहयोग सुनिश्चित करने की लगातार कोशिश है।
1981 में हुई थी शांति दिवस की शुरुआत
अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1981 में प्रस्ताव 36/67 के माध्यम से की थी। शुरुआत में इसे महासभा के वार्षिक सत्र के उद्घाटन के साथ जोड़ा गया था। बाद में वर्ष 2001 में प्रस्ताव 55/282 को सर्वसम्मति से स्वीकार करते हुए 21 सितंबर को स्थायी रूप से अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस घोषित किया गया। इस प्रस्ताव के तहत इस दिन को वैश्विक स्तर पर अहिंसा और युद्धविराम को बढ़ावा देने के अवसर के रूप में स्थापित किया गया। संयुक्त राष्ट्र दुनिया भर के देशों, संस्थाओं और नागरिकों से इस दिन शांति के आदर्शों को मजबूत करने तथा हिंसा और संघर्ष को कम करने के लिए प्रयास करने का आह्वान करता है। इसके लिए शिक्षा, जन-जागरूकता, संवाद और आपसी समझ को महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
केवल युद्ध न होना ही शांति नहीं
2026 की थीम शांति की पारंपरिक परिभाषा को व्यापक रूप देती है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक शांति केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि लोगों के लिए सुरक्षा, गरिमा और अवसर उपलब्ध होने की स्थिति भी है। इसका अर्थ यह है कि किसी समाज में औपचारिक रूप से युद्ध न हो, लेकिन यदि वहां हिंसा, भेदभाव, असमानता, डर, नफरत या अधिकारों का हनन मौजूद है तो उस समाज में स्थायी और व्यापक शांति की स्थिति को लेकर सवाल बने रह सकते हैं। इसी संदर्भ में विधि कार्य विभाग ने भी शांति को dignity, equality and respect यानी गरिमा, समानता और सम्मान से जोड़ते हुए अपना संदेश जारी किया है। कानून के शासन और न्याय की व्यवस्था का शांति से सीधा संबंध माना जाता है, क्योंकि नागरिकों का अधिकारों, संस्थाओं और न्यायिक प्रक्रियाओं पर भरोसा सामाजिक स्थिरता का महत्वपूर्ण आधार होता है।
‘Invest in Peace’ का व्यापक अर्थ
इस वर्ष की थीम में इस्तेमाल किया गया शब्द ‘Invest’ यानी निवेश केवल आर्थिक निवेश तक सीमित नहीं है। संयुक्त राष्ट्र के संदेश के अनुसार शांति में निवेश का अर्थ लोगों, संस्थाओं और उन प्रक्रियाओं को मजबूत करना है जो संघर्ष को रोकने और समाज में भरोसा कायम करने में मदद करती हैं। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, सामाजिक सुरक्षा, मानवाधिकार, न्याय, संवाद और सतत विकास जैसे क्षेत्रों को मजबूत करना शामिल है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 2026 के संदेश में कहा है कि शांति के लिए समावेशी समुदायों का निर्माण, मानवाधिकारों और गरिमा की रक्षा तथा कूटनीति, संवाद, बातचीत और शांति स्थापना जैसे माध्यमों को मजबूत करना जरूरी है। इस दृष्टिकोण के अनुसार किसी देश में शांति बनाए रखना केवल सुरक्षा बलों या सरकारों का काम नहीं है। समाज के अलग-अलग वर्गों, नागरिक संगठनों, शिक्षकों, युवाओं, स्वयंसेवकों और आम नागरिकों की भी इसमें भूमिका होती है।
रोजमर्रा के व्यवहार से बनती है शांति
2026 की थीम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शांति को केवल अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और सरकारी समझौतों तक सीमित नहीं माना गया है। संयुक्त राष्ट्र ने इस वर्ष उन लोगों को ‘everyday architects of peace’, यानी रोजमर्रा की जिंदगी में शांति की नींव रखने वाले लोगों के रूप में रेखांकित किया है, जो अपने समुदायों में संवाद, सहयोग और स्थिरता के लिए काम कर रहे हैं। स्कूल में अलग-अलग विचार रखने वाले विद्यार्थियों का सम्मान करना, समाज में भेदभाव से बचना, किसी विवाद को हिंसा के बजाय बातचीत से हल करने की कोशिश करना, सोशल मीडिया पर बिना सत्यापन के भड़काऊ या गलत सूचना साझा न करना और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना—ये सभी छोटे स्तर के ऐसे कदम हैं जिनका व्यापक सामाजिक प्रभाव हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र ने इस अवसर पर लोगों से प्रतिदिन शांति के लिए छोटे कदम उठाने की अपील की है। इनमें दूसरों की मदद के लिए समय देना, सकारात्मक बदलाव के लिए आवाज उठाना, विभिन्न पीढ़ियों के बीच संवाद आयोजित करना और शांति एवं उम्मीद से जुड़ी कहानियों को साझा करना शामिल है।
कानून और शांति का गहरा संबंध
कानून एवं न्याय मंत्रालय के विधि कार्य विभाग का शांति दिवस पर संदेश इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि कानून का शासन (Rule of Law) किसी भी शांतिपूर्ण समाज की आधारभूत व्यवस्था में शामिल है। जब नागरिकों को अपने अधिकारों की जानकारी होती है और उन्हें न्याय पाने के लिए संस्थागत रास्ते उपलब्ध होते हैं, तो विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की संभावनाएं बढ़ती हैं। न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल अपराध के बाद दंड देना नहीं है। कानून और संस्थाएं नागरिकों के अधिकारों की रक्षा, विवादों के समाधान और सामाजिक विश्वास को बनाए रखने में भी भूमिका निभाती हैं। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति, मानवाधिकार और Rule of Law को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ माना जाता है। संयुक्त राष्ट्र भी शांति और सुरक्षा के लिए कूटनीति, मध्यस्थता, निरस्त्रीकरण, peacekeeping, peacebuilding, न्याय और Rule of Law जैसे विभिन्न माध्यमों को महत्वपूर्ण मानता है।
युवाओं और स्थानीय समुदायों की अहम भूमिका
2026 के अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस में स्थानीय स्तर पर काम करने वाले लोगों और युवाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार स्थायी शांति केवल बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों से नहीं बनती, बल्कि स्कूलों, मोहल्लों और समुदायों में होने वाले संवाद और सहयोग से भी उसकी नींव मजबूत होती है। युवा वर्ग इस प्रक्रिया में विशेष भूमिका निभा सकता है। शिक्षा, डिजिटल माध्यमों और सामाजिक अभियानों के जरिए युवा विभिन्न समुदायों के बीच संवाद बढ़ाने, गलत सूचना का मुकाबला करने और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने में योगदान दे सकते हैं।
मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में संदेश का महत्व
संयुक्त राष्ट्र ने 2026 के शांति दिवस संदेश में दुनिया के सामने मौजूद हिंसा, विभाजन और जटिल संघर्षों को लेकर चिंता जताई है। महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि कई स्थानों पर संघर्ष बढ़ रहे हैं और उनका असर सीमाओं के पार भी दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में संवाद, कूटनीति और सहयोग की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के अध्यक्ष खलीलुर रहमान ने भी 9 सितंबर को Peace Bell Ceremony में कहा कि शांति को बनाया जाना चाहिए और इसे बनाने की जिम्मेदारी साझा है। उन्होंने 2026 की थीम को विश्वास, संवाद और बहुपक्षीय सहयोग से जोड़ा।
शांति की शुरुआत व्यक्तिगत स्तर से
अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस 2026 का मूल संदेश यही है कि शांति किसी एक संस्था, देश या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। युद्ध रोकने और अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के लिए सरकारों और वैश्विक संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन समाज के भीतर सम्मान, समानता, सहिष्णुता और संवाद की संस्कृति विकसित करना आम नागरिकों की भागीदारी के बिना संभव नहीं है। भारत के विधि कार्य विभाग ने इसी व्यापक सोच को रेखांकित करते हुए कहा है कि शांति केवल समझौतों और संगठनों में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत चुनावों में भी निहित है। यानी व्यक्ति अपने व्यवहार, भाषा और दूसरों के प्रति दृष्टिकोण के जरिए शांति या तनाव—दोनों में योगदान कर सकता है। इस वर्ष की थीम इसलिए शांति को एक रोजमर्रा के संकल्प के रूप में सामने रखती है—हर व्यक्ति के लिए, हर जगह और हर दिन शांति में निवेश। इसका व्यापक संदेश है कि स्थायी शांति केवल हथियारों की अनुपस्थिति से नहीं, बल्कि ऐसे समाज के निर्माण से संभव है जहां लोगों को सुरक्षा, समानता, गरिमा, न्याय और सम्मान मिले।
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