UPI के 10 साल: छोटे दुकानदार से लेकर करोड़ों भारतीयों तक पहुंचा डिजिटल भुगतान, PM मोदी ने मांगे लोगों के अनुभव

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दस साल का UPI सफर: छोटे भुगतान से वैश्विक डिजिटल ताकत तक पहुंचा भारत, पीएम मोदी ने नागरिकों से मांगे अनुभव

भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति के सबसे बड़े प्रतीकों में शामिल यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने एक दशक का सफर पूरा कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UPI के दस साल पूरे होने के अवसर पर इसकी उपलब्धियों को हर भारतीय के लिए गर्व का विषय बताया और देशवासियों से यह साझा करने का आह्वान किया कि इस डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को किस तरह बदला है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक दशक पहले UPI की शुरुआत भारत की डिजिटल भुगतान यात्रा में निर्णायक मोड़ साबित हुई और इसने देश में लेन-देन के तौर-तरीके को पूरी तरह बदल दिया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2016 में शुरुआत के समय UPI से केवल 21 बैंक जुड़े थे, जबकि मार्च 2026 तक यह संख्या बढ़कर 703 बैंक हो गई। वित्त वर्ष 2025-26 में UPI के माध्यम से 24,161.69 करोड़ लेन-देन हुए और इनका कुल मूल्य करीब 314 लाख करोड़ रुपये रहा।

2016 में शुरू हुई थी नई डिजिटल भुगतान व्यवस्था

UPI को National Payments Corporation of India (NPCI) ने भारतीय रिजर्व बैंक की नियामकीय निगरानी में विकसित किया था। इसकी शुरुआत 11 अप्रैल 2016 को हुई। इसका मूल उद्देश्य अलग-अलग बैंक खातों और भुगतान प्रणालियों के बीच तत्काल, आसान और इंटरऑपरेबल डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराना था। शुरुआत में UPI का इस्तेमाल सीमित स्तर पर हुआ, लेकिन स्मार्टफोन, सस्ता इंटरनेट, बैंक खातों की बढ़ती पहुंच और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ता गया। आज चाय की दुकान से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल, ऑनलाइन खरीदारी, बिल भुगतान, टैक्सी, रेस्तरां और व्यक्तिगत धन हस्तांतरण तक UPI रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।

10 साल में 12 हजार गुना बढ़ा लेन-देन

UPI के विकास की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2016-17 में जहां इससे लगभग 2 करोड़ वार्षिक लेन-देन हुए थे, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गया। यानी करीब दस साल में लेन-देन की संख्या में लगभग 12,000 गुना वृद्धि हुई। लेन-देन के मूल्य में भी जबरदस्त विस्तार हुआ। FY 2016-17 में UPI के जरिए लेन-देन का मूल्य करीब 0.07 लाख करोड़ रुपये था, जो FY 2025-26 में बढ़कर लगभग 314 लाख करोड़ रुपये हो गया। मार्च 2026 में UPI ने एक महीने में करीब 2,264 करोड़ लेन-देन का रिकॉर्ड बनाया, जबकि इसी महीने लेन-देन का कुल मूल्य करीब 29.53 लाख करोड़ रुपये रहा।

आज 55 करोड़ से ज्यादा यूजर्स

UPI की पहुंच अब केवल बैंकिंग और तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रही है। जुलाई 2026 में सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार जून 2026 तक UPI प्लेटफॉर्म पर 55.49 करोड़ यूजर्स जुड़े थे। इसके साथ करीब 6.5 करोड़ व्यापारी भी डिजिटल भुगतान नेटवर्क का हिस्सा थे। इस विस्तार ने छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडरों के लिए भी डिजिटल भुगतान को आसान बनाया है। ग्राहक के पास नकद न होने की स्थिति में भी भुगतान संभव है और छोटे कारोबारी को छुट्टे पैसे रखने की समस्या से काफी राहत मिलती है।

कैश से QR कोड तक बदली तस्वीर

एक दशक पहले छोटे मूल्य के दैनिक लेन-देन में नकदी का दबदबा था। किराना दुकान, सब्जी बाजार, चाय की दुकान या ऑटो-रिक्शा में भुगतान के लिए नकद रखना आम बात थी। UPI और QR कोड ने इस व्यवस्था को बदल दिया। अब ग्राहक मोबाइल से QR कोड स्कैन कर कुछ सेकंड में भुगतान कर सकता है। इससे भुगतान प्रक्रिया तेज हुई है और डिजिटल लेन-देन का रिकॉर्ड भी उपलब्ध रहता है। सरकार के अनुसार UPI ने डिजिटल भुगतान को देश के शहरी इलाकों से आगे बढ़ाकर ग्रामीण और छोटे कस्बों तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डिजिटल भुगतान के विस्तार को बैंकिंग कनेक्टिविटी, आधार आधारित पहचान, सस्ते इंटरनेट और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के साथ जोड़कर देखा जा रहा है।

दुनिया में भारत की डिजिटल पहचान

UPI की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक इसका अंतरराष्ट्रीय प्रभाव है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2025 में वैश्विक रियल-टाइम भुगतान लेन-देन की मात्रा में UPI की हिस्सेदारी करीब 49 प्रतिशत थी। भारत का यह भुगतान मॉडल दुनिया में रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट के सबसे बड़े उदाहरणों में शामिल हो गया है। UPI की पहुंच भारत की सीमाओं से बाहर भी बढ़ रही है। सरकारी जानकारी के अनुसार 2026 में UPI की स्वीकार्यता कई विदेशी देशों में हो चुकी थी और जून 2026 तक 11 विदेशी देशों में इसके उपयोग की जानकारी दी गई थी। इसका मतलब यह है कि विदेश जाने वाले भारतीयों को कुछ देशों में स्थानीय मुद्रा की जरूरत कम पड़ सकती है, जबकि भारत आने वाले यात्रियों के लिए भी डिजिटल भुगतान के नए विकल्प विकसित हो रहे हैं।

छोटे कारोबारियों के लिए बड़ा बदलाव

UPI का प्रभाव केवल उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। छोटे कारोबारियों के लिए भी यह व्यवस्था महत्वपूर्ण साबित हुई है। पहले कई छोटे व्यापारियों के लिए कार्ड मशीन रखना महंगा या जटिल माना जाता था। QR कोड आधारित UPI भुगतान ने इस बाधा को काफी हद तक कम किया। अब छोटे दुकानदार बिना महंगे भुगतान उपकरण के भी डिजिटल भुगतान स्वीकार कर सकते हैं। इससे कारोबार में भुगतान के विकल्प बढ़े हैं और डिजिटल लेन-देन का रिकॉर्ड तैयार होने में मदद मिलती है।हालांकि, छोटे व्यापारियों को डिजिटल भुगतान के साथ साइबर सुरक्षा के प्रति भी जागरूक रहने की आवश्यकता है।

डिजिटल भुगतान के साथ बढ़ी साइबर सुरक्षा की जरूरत

UPI की लोकप्रियता जितनी तेजी से बढ़ी है, डिजिटल धोखाधड़ी का जोखिम भी उतना ही महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। सरकार और बैंकिंग संस्थाएं लगातार ग्राहकों को फर्जी लिंक, संदिग्ध QR कोड, स्क्रीन शेयरिंग, OTP साझा करने और अज्ञात व्यक्ति के कहने पर भुगतान करने से बचने की सलाह देती हैं। सरकार के अनुसार UPI आधारित लेन-देन को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए जोखिम आधारित लेन-देन सीमा, UPI एप्लिकेशन के लिए सुरक्षा आवश्यकताओं और अन्य सुरक्षा उपायों पर काम किया जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि UPI PIN केवल पैसे भेजने के लिए दर्ज किया जाता है, पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर UPI PIN, OTP या बैंकिंग जानकारी साझा करना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

डिजिटल अर्थव्यवस्था को मिली गति

UPI ने भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को व्यापक स्तर पर गति दी है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश के कुल रिटेल डिजिटल भुगतान में UPI की हिस्सेदारी करीब 81 प्रतिशत थी। FY 2025-26 में यह नेटवर्क और मजबूत हुआ। सरकारी आंकड़ों के अनुसार उस वर्ष UPI ने 24,162 करोड़ से अधिक लेन-देन दर्ज किए और करीब 314 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन मूल्य दर्ज किया। यह वृद्धि केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है। इसका असर उपभोक्ता व्यवहार, व्यापारिक भुगतान, ई-कॉमर्स, परिवहन, बिल भुगतान और छोटे कारोबार की कार्यप्रणाली पर भी दिखाई देता है।

महिलाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी उपयोगी

डिजिटल भुगतान की बढ़ती पहुंच ने उन लोगों को भी औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने में मदद की है, जो पहले नकदी आधारित अर्थव्यवस्था पर अधिक निर्भर थे। मोबाइल फोन और बैंक खाते के साथ UPI का इस्तेमाल करने से घर बैठे पैसे भेजना, बिल चुकाना और खरीदारी करना आसान हुआ है।ग्रामीण इलाकों में डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता बढ़ने से स्थानीय दुकानदारों और ग्राहकों दोनों को सुविधा मिली है। हालांकि डिजिटल साक्षरता, इंटरनेट कनेक्टिविटी और साइबर सुरक्षा को मजबूत करना अभी भी जरूरी है।

UPI की सफलता के पीछे क्या रही वजह

UPI की सफलता किसी एक तकनीक का परिणाम नहीं है। इसके पीछे बैंकिंग नेटवर्क, मोबाइल इंटरनेट, स्मार्टफोन की पहुंच, डिजिटल पहचान और NPCI द्वारा तैयार इंटरऑपरेबल भुगतान ढांचे का संयुक्त प्रभाव रहा है। इसके अलावा, अलग-अलग बैंकों और भुगतान ऐप के बीच इंटरऑपरेबिलिटी ने UPI को सामान्य उपभोक्ता के लिए उपयोगी बनाया। ग्राहक एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में तुरंत पैसा भेज सकता है, भले ही सामने वाला व्यक्ति अलग बैंक या अलग UPI ऐप का इस्तेमाल करता हो।

प्रधानमंत्री मोदी ने मांगे नागरिकों के अनुभव

UPI के एक दशक पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बदलाव को केवल सरकारी या तकनीकी उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि आम भारतीयों की जिंदगी में आए परिवर्तन के रूप में देखने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अपने अनुभव साझा करने को कहा है कि UPI ने उनके जीवन को किस प्रकार बदला—क्या इससे रोजमर्रा की खरीदारी आसान हुई, छोटे कारोबार में सुविधा मिली, परिवार को पैसे भेजना सरल हुआ या नकदी रखने की जरूरत कम हुई। यह अपील इस बात को भी रेखांकित करती है कि UPI की वास्तविक सफलता उसके तकनीकी आंकड़ों से आगे बढ़कर आम नागरिक के अनुभव में दिखाई देती है।

अगले दशक की चुनौती

UPI का पहला दशक तेज विस्तार और व्यापक स्वीकार्यता का रहा है। अब अगले दशक में इसकी सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षा, विश्वसनीयता, वैश्विक विस्तार और डिजिटल समावेशन को और मजबूत करना होगी। जितने अधिक लोग डिजिटल भुगतान पर निर्भर होंगे, उतनी ही जरूरी होगी कि प्रणाली हर समय उपलब्ध, सुरक्षित और सरल बनी रहे। ग्रामीण और कम डिजिटल साक्षर आबादी तक सुरक्षित डिजिटल भुगतान पहुंचाना भी महत्वपूर्ण लक्ष्य होगा।

दस साल में बदली भुगतान की भाषा

2016 में UPI जब शुरू हुआ था, तब यह कहना मुश्किल था कि एक दशक के भीतर यह भारत के रोजमर्रा के भुगतान व्यवहार का इतना बड़ा हिस्सा बन जाएगा। लेकिन आज छोटे से छोटे भुगतान से लेकर बड़े कारोबारी लेन-देन तक इसका इस्तेमाल हो रहा है। 21 बैंकों से शुरू हुआ UPI नेटवर्क मार्च 2026 तक 703 बैंकों तक पहुंच चुका है। कुछ करोड़ वार्षिक लेन-देन से बढ़कर यह 24 हजार करोड़ से अधिक वार्षिक लेन-देन वाले नेटवर्क में बदल गया है।  इसलिए UPI की दस साल की कहानी सिर्फ डिजिटल भुगतान की कहानी नहीं, बल्कि भारत में बदलती आर्थिक आदतों, तकनीकी पहुंच और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की कहानी भी है। आने वाले वर्षों में इसकी दिशा यह तय करेगी कि भारत का डिजिटल भुगतान मॉडल दुनिया के सामने किस तरह और कितना बड़ा उदाहरण बनता है।

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