टिन से लिथियम तक… छत्तीसगढ़ की बदलेगी तस्वीर, 65 खनिज ब्लॉकों से ₹4 लाख करोड़ की उम्मीद

The CSR Journal Magazine
छत्तीसगढ़ को अब सिर्फ कोयला और लौह अयस्क के लिए पहचानने का दौर बदल रहा है। राज्य की जमीन के नीचे मौजूद लिथियम, टिन, ग्रेफाइट, वैनेडियम, निकेल, क्रोमियम, सोना और हीरे जैसे खनिज उसे देश की रणनीतिक खनिज जरूरतों में अहम भूमिका निभाने की ओर ले जा रहे हैं। राज्य में अब तक 65 खनिज ब्लॉकों की नीलामी हो चुकी है, जिनसे करीब 4 लाख करोड़ रुपये के राजस्व की संभावना जताई गई है।

लिथियम से लेकर क्रिटिकल मिनरल्स तक बड़ा खजाना

छत्तीसगढ़ देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां टिन अयस्क का व्यावसायिक उत्पादन हो रहा है। दंतेवाड़ा और सुकमा में टिन का उत्पादन होता है। इसका इस्तेमाल सोल्डरिंग और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में किया जाता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर टिन की उपलब्धता भारत की रणनीतिक जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके साथ ही कोरबा के कटघोरा क्षेत्र में लिथियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की संभावनाएं सामने आई हैं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक कटघोरा लिथियम एवं रेयर अर्थ एलिमेंट ब्लॉक भारत में नीलाम किया गया पहला लिथियम-बेयरिंग ब्लॉक है। लिथियम का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और ऊर्जा भंडारण जैसी तकनीकों में होता है।

28 से ज्यादा तरह के खनिज, कई जिलों में बड़ा भंडार

छत्तीसगढ़ में 28 से ज्यादा प्रकार के खनिज पाए जाते हैं। कोयले के मामले में कोरिया, सूरजपुर, सरगुजा, रायगढ़ और कोरबा प्रमुख क्षेत्र हैं। कोरबा की दीपका, गेवरा और कुसमुंडा जैसी खदानें देश की प्रमुख कोयला खदानों में गिनी जाती हैं। लौह अयस्क के लिए दंतेवाड़ा, कांकेर, बालोद और राजनांदगांव महत्वपूर्ण हैं। दंतेवाड़ा की बैलाडीला और बालोद की दल्ली-राजहरा खदानों से उच्च गुणवत्ता का लौह अयस्क मिलता है। वहीं बिलासपुर, रायपुर और बलौदाबाजार-भाटापारा में चूना पत्थर के बड़े भंडार के कारण सीमेंट उद्योग को मजबूती मिलती है। सरगुजा का मैनपाट बॉक्साइट के लिए जाना जाता है।

EV और सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए भी अहम

राज्य के बलरामपुर में ग्रेफाइट और वैनेडियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की मौजूदगी बताई गई है। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी, ऊर्जा भंडारण और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए उपयोगी हैं। महासमुंद में निकेल और क्रोमियम के संभावित भंडार मिले हैं, जबकि सोने की मौजूदगी भी राज्य के कई क्षेत्रों में सामने आई है। इसके अलावा गरियाबंद क्षेत्र में हीरे की संभावनाएं और जशपुर में नदी की रेत से सोना मिलने की जानकारी भी सामने आती रही है। यानी छत्तीसगढ़ का खनिज आधार सिर्फ पारंपरिक कोयला और लोहा तक सीमित नहीं है, बल्कि नई तकनीक और रणनीतिक उद्योगों की जरूरतों से भी जुड़ रहा है।

50 साल में ₹4 लाख करोड़ का अनुमान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 1 सितंबर 2026 को नवा रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में बताया था कि राज्य में 65 खनिज ब्लॉकों की नीलामी हो चुकी है। इनसे लगभग 4 लाख करोड़ रुपये के राजस्व की संभावना जताई गई है। हालिया रिपोर्टों में भी इसी अनुमान की पुष्टि हुई है। खनिज क्षेत्र से राज्य की मौजूदा कमाई भी बढ़ी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को 16,625 करोड़ रुपये का खनिज राजस्व मिला, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले करीब 14 फीसदी ज्यादा था।

खनन के साथ स्थानीय विकास पर भी जोर

खनन से मिलने वाली रॉयल्टी का एक हिस्सा जिला खनिज संस्थान न्यास यानी DMF के जरिए प्रभावित क्षेत्रों के विकास में लगाया जाता है। इसके तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और वनीकरण जैसी जरूरतों पर खर्च का प्रावधान है। अब राज्य की चुनौती सिर्फ खनिज निकालना नहीं, बल्कि इन संसाधनों के आधार पर स्थानीय रोजगार, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ाना भी होगी। सरकार ने भी कच्चे खनिज के उत्पादन से आगे बढ़कर निवेश और उद्योगों की पूरी वैल्यू चेन विकसित करने पर जोर दिया है।

छत्तीसगढ़ के लिए क्यों खास है यह मौका?

लिथियम, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ जैसे खनिज आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण और आधुनिक तकनीकों के लिए बेहद अहम होंगे। ऐसे में छत्तीसगढ़ के पास मौजूद संसाधन राज्य की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत की रणनीतिक जरूरतों को भी मजबूत कर सकते हैं। अगर खनन के साथ पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय लोगों की भागीदारी और खनिजों की प्रोसेसिंग पर बराबर ध्यान दिया गया, तो छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश के बड़े क्रिटिकल मिनरल्स हब के रूप में उभर सकता है।

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