चंडीगढ़ में नाबालिग फुटबॉल प्लेयर का यौन उत्पीड़न: भरे स्टेडियम में कोच ने डाली अंगुली

The CSR Journal Magazine
चंडीगढ़ के स्पोर्ट्स स्टेडियम में हाल ही में एक नाबालिग फुटबॉल प्लेयर के साथ यौन उत्पीड़न की एक च shocking घटना सामने आई है। यह घृणित कार्य किसी और ने नहीं, बल्कि एक नामी फुटबॉल कोच ने किया। पीड़ित का कहना है कि टूर्नामेंट के दौरान दो टीमों के बीच झगड़े के दौरान एक कोच ने उसके पीछे अंगुली डाल दी, जिससे वह भयभीत हो गया। मामला सामने आने के बाद, पुलिस ने केस दर्ज करने में काफी समय लिया, जिसके चलते अब तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया। खेल जगत में इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

गवाही में दबाव और धमकी

पीड़ित ने चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया और चीफ सेक्रेटरी को एक शिकायत भेजी है। शिकायत में कहा गया है कि पीड़ित को और गवाहों को पुलिस की ओर से धमकाया जा रहा है। आरोप है कि गवाहों के बयान को बदलने के लिए उन पर दबाव डाला जा रहा है। पीड़ित का ये भी कहना है कि FIR की कॉपी भी उन्हें नहीं दी गई है। लगातार नोटिस भेजकर उन्हें परेशान किया जा रहा है, जिससे मामला और अधिक जटिल होता जा रहा है।

पूरे मामले की गंभीरता

कानूनी प्रतिनिधि के अनुसार, इस साल जनवरी में फुटबॉल का एक टूर्नामेंट आयोजित किया गया था। टूर्नामेंट के दौरान, दोनों टीमों के बीच विवाद हुआ। इस दौरान, नाबालिग खिलाड़ी ने बताया कि उसके साथ यह घृणित घटना हुई। उसने सबसे पहले 28 जनवरी को इसकी शिकायत की, लेकिन FIR दर्ज कराने में लगने वाला समय अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन गया। इससे जाहिर होता है कि नियमानुसार कार्रवाई समय पर नहीं हो रही है।

पुलिस के कार्य पर सवाल

परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस बिना अनुमति के एकेडमी परिसर में घुस आई। परिवार की चिंता इस बात को लेकर है कि पुलिस के अधिकारियों ने हथियार लेकर परिसर में दाखिल होकर बच्चों पर दहशत का माहौल बना दिया। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या बच्चों को सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जा रहा है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि नाबालिग बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

POCSO एक्ट का उल्लंघन

पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि जांच में POCSO एक्ट के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। ऐसे मामलों में नाबालिग बच्चों से संवेदनशील और सुरक्षित माहौल में बात करना आवश्यक है, लेकिन बच्चों को बार-बार थाने और अन्य स्थानों पर बुलाया जा रहा है, जो उनके लिए तनाव का कारण बन रहा है। यही नहीं, पुलिस की कार्रवाई से बच्चों की मानसिक स्थिति पर प्रभाव पड़ा है।

रिप्रेजेंटेशन में बदलाव

मामले में एक और नया मोड़ तब आया, जब प्रारंभिक शिकायतकर्ता ने मामले से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने बताया कि लगातार यात्रा और पुलिस के संपर्क के कारण उन्हें समस्या हो रही थी। इसके बाद, एकेडमी के मालिक ने इस मामले में मोर्चा संभाला और वकील के माध्यम से मामले की जिम्मेदारी ली। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे मामले में पूरी जानकारी रखने वाले हैं और जांच में सहयोग करेंगे।

चंडीगढ़ पुलिस की प्रतिक्रिया

चंडीगढ़ पुलिस ने मामले में जानकारी दी है कि POCSO के तहत FIR दर्ज की गई है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस मामले की गहर

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