बिहार का हेली-एयर टूरिज्म प्लान: 67 हजार करोड़ की पर्यटन अर्थव्यवस्था का सपना

The CSR Journal Magazine
बिहार सरकार ने राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक नया पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्णय लिया है। 15 जुलाई से 6 महीने के लिए शुरू होने वाले इस प्रोजेक्ट के तहत हेली टूरिज्म और एयर टूरिज्म की सुविधा दी जाएगी। हेलीकॉप्टर सेवाओं के माध्यम से पटना को राजगीर और कैमूर के मां मुंडेश्वरी मंदिर से जोड़ा जाएगा। इसी तरह, बिहार के वाल्मीकिनगर के इकलौते टाइगर रिजर्व तक छोटे विमानों से पहुंचने का मौका मिलेगा।

पर्यटन की संभावनाएं और कनेक्टिविटी का महत्व

बिहार का इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर इसे पर्यटन के लिए एक बेहतरीन जगह बनाते हैं। नालंदा, बोधगया, और सीतामढ़ी जैसे स्थल अत्यधिक प्रसिद्ध हैं। लेकिन, इन जगहों तक पहुंचना हमेशा आसान नहीं रहा है। यहाँ की सड़कें और कनेक्टिविटी की कमी एक बड़ी समस्या रही है। दुष्कर सड़कों और लंबी यात्रा ने पर्यटकों की संख्या को प्रभावित किया है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार का यह नया पायलट प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण हो सकता है।

हैली टूरिज्म और एयर टूरिज्म योजना की विशेषताएं

इस योजना के अंतर्गत हेलीकॉप्टर की सवारी के तहत प्रत्येक व्यक्ति को 10 मिनट की जॉय राइड का अनुभव मिलेगा। इसके अलावा, प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचने के लिए एयर टूरिज्म की सुविधा भी दी जाएगी। इस योजना का पूरा प्रबंधन बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम करेगा, जबकि सुरक्षा और हेलिपैड प्रबंधन की जिम्मेदारी जिला प्रशासन पर रहेगी।

क्यों चुने गए प्रमुख स्थल?

राजगीर और कैमूर का मां मुंडेश्वरी मंदिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हैं। इन तीनों स्थलों को इस पायलट प्रोजेक्ट में शामिल करने का कारण इनकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्वता है। इन स्थानों तक पहुंचने के लिए भी यात्रा की कठिनाइयों को ध्यान में रखा गया है, ताकि पर्यटक आसानी से पहुंच सकें।

योजना का खर्च और किराया

हेली और एयर टूरिज्म योजना का संचालन केवल टिकट बेचना से नहीं होगा, बल्कि इसके लिए सरकार वायबिलिटी गैप फंडिंग उपलब्ध कराएगी। यह योजना बहुत से लोगों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकती है। एक तरफ की टिकट कीमतें इस प्रकार हैं: पटना से राजगीर 4,000 रुपये, वाल्मीकिनगर 5,000 रुपये, और मां मुंडेश्वरी मंदिर 6,000 रुपये।

सकारात्मक आर्थिक प्रभाव

बिहार सरकार का मानना है कि यह योजना पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद करेगी। इससे पर्यटन में इजाफा होने पर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा, क्योंकि लोग होटल में रहने, टैक्सी किराए पर लेने और स्थानीय रेस्तरां में खाने के लिए भी जाएंगे। इस योजना के सफल होने पर, बिहार की टूरिज्म अर्थव्यवस्था का आकार 67,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

बढ़ता पर्यटन बजट

बिहार में हाल के वर्षों में पर्यटन पर बजट बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। राज्य सरकार ने बुनियादी ढांचे को सुधारने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अधिक वित्तीय援助 देने की योजना बनाई है। यह सरकारी प्रयास बिहार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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