5 साल, 10 साल या 13 साल… एम्स दिल्ली में इलाज कराने में कितना वक्त लगता है?

The CSR Journal Magazine
एम्स दिल्ली में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए इंतजार एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। प्रतिदिन यहां 14 हजार से ज्यादा OPD कंसल्टेशन होते हैं, जिसमें कई गंभीर मामले प्राथमिकता पाते हैं। लेकिन सामान्य उपचार और सर्जरी के लिए मरीजों को कई हफ्ते या महीने तक का इंतजार करना पड़ सकता है।

गंभीर बीमारियों के लिए उपचार में देरी

अनुसंधान के अनुसार, न्यूरोसर्जरी जैसे क्षेत्रों में ऑपरेशन के लिए 5 साल तक का इंतजार होना असामान्य नहीं है। वहीं, अन्य विभागों जैसे ENT, प्लास्टिक सर्जरी और आंखों से संबंधित बीमारियों में भी लंबा इंतजार देखने को मिलता है। इन मामलों में कुछ मरीजों को चेतावनी दी गई है कि समय के साथ समस्या बिगड़ सकती है।

दबाव और संसाधनों की कमी

ज्यादा मरीजों के कारण एम्स की क्षमता पर लगातार दबाव बना रहता है। संसद की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण समिति की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अस्पताल में 2023-24 के दौरान 357 फैकल्टी पद खाली थे। इस कमी के चलते अस्पताल में कई ऑपरेशन थिएटर और ICU बेड काम नहीं कर पा रहे हैं।

किसी खास प्रक्रियाओं के लिए लंबा इंतजार

अधिकांश मरीजों को सामान्य जांच जैसे ब्लड टेस्ट और MRI के लिए भी काफी समय लग सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच की प्रक्रिया को तेजी देने के लिए एम्स ने CT और MRI सेवाओं की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई है।

दिल्ली से बाहर के मरीजों की संख्या बढ़ती हुई

दिल्ली के अलावा, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और बिहार से भी मरीज एम्स का रुख करते हैं। आंकड़ों के अनुसार, OPD में केवल 39.72% मरीज दिल्ली से हैं, जबकि बाकी अन्य राज्यों से हैं। इससे साफ होता है कि पूरे देश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के चलते लोग एम्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

एम्स द्वारा उठाए गए कदम

एम्स ने मरीजों की भीड़ को कम करने के लिए कई प्रयास किए हैं, जैसे ऑनलाइन अपॉइंटमेंट्स और डिजिटल क्यू मैनेजमेंट सिस्टम लागू करना। इसके अलावा, मरीजों के रात में बाहर इंतजार करने की समस्या को देखते हुए ‘आश्रय’ जैसी सुविधा भी शुरू की गई है।

स्टाफ की कमी और इसके प्रभाव

एम्स दिल्ली में 1,207 फैकल्टी पदों में से केवल 850 भरे हुए हैं, जबकि नॉन-फैकल्टी स्टाफ के 12,875 पदों में से 10,761 कार्यरत हैं। इस कमी से अस्पताल की सामान्य कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जो लंबी प्रतीक्षा को और बढ़ा देता है।

भविष्य की योजनाएं

भविष्य में, एम्स मरीजों को SMS या मोबाइल ऐप के जरिए अनुमानित इंतजार का समय बताने की योजना बना रहा है। इससे मरीजों को बेहतर जानकारी और राहत मिलेगी। ऐसे कदमों से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में लंबी वेटिंग टाइम में कमी आएगी।

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