सावन का पहला मंगला गौरी व्रत, जानें तीन शुभ योग और पूजा विधि

The CSR Journal Magazine
सावन के महीने में हर साल मंगला गौरी व्रत को खास महत्व दिया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए है जो सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं। इस दिन माता पार्वती की पूजा की जाती है, जिन्हें सुख, समृद्धि और प्रेम की देवी माना जाता है। महिलाएं इस दिन उपवास रखकर और विधिपूर्वक पूजा करके मां से आशीर्वाद मांगती हैं।

तीन शुभ योग में मंगला गौरी व्रत

इस साल सावन के पहले मंगला गौरी व्रत में विशेष रूप से तीन शुभ योग बन रहे हैं। ये योग व्रत के महत्व को और बढ़ाते हैं। इन शुभ योगों का समय विशेष रूप से पूजा के लिए अनुकूल है। इसलिए महिलाएं पहले से ही अपनी तैयारियां शुरू कर सकती हैं ताकि पूजा- पद्धति सही से पूरी हो सके।

विशेष पूजा मुहूर्त

पूजा का सही समय जानना बहुत आवश्यक है। मंगला गौरी व्रत के लिए शुभ मुहूर्त इसी दिन में ही तय होता है। इस साल आज सावन के पहले मंगला गौरी व्रत का मुहूर्त सुबह 7:30 बजे से लेकर 9:30 बजे तक का है। इस समय की पूजा से सभी इच्छाएं पूरी होने की संभावना बढ़ जाती है।

पूजा विधि और नियम

इस व्रत को करने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी है। महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। फिर स्वच्छ कपड़े पहनकर पूजा स्थल पर जाएं। पूजन के समय मां पार्वती की पूजा करते समय विशेष मंत्रों का जाप करना चाहिए। इसके अलावा, फल, मिठाई और पंचामृत का भोग भी लगाना चाहिए। व्रत में महिलाएं पूरी दिन उपवास रखती हैं और केवल पूजा के बाद ही भोजन करती हैं।

जुनून के साथ करें पूजा

मंगला गौरी व्रत का दिन केवल पूजा का नहीं है, बल्कि ये एक अवसर है अपने परिवार की खुशहाली के लिए भी। इस दिन विशेष रूप से सभी परिवार के सदस्य एकत्रित होते हैं और पूजा में भाग लेते हैं। इससे पारिवारिक बंधन और मजबूत होते हैं। महिलाएं ध्यान से पूजा की विधि का पालन करें, ताकि माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।

विशेष महत्त्व

मंगला गौरी के व्रत का विशेष महत्त्व इस बात से भी है कि यह अन्य व्रतों के साथ जोड़कर आगे की राह को प्रशस्त करता है। इससे न केवल दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है, बल्कि तमाम आर्थिक परेशानियों का समाधान भी होता है। महिलाएं इस दिन अपने घर की सुख-शांति के लिए मां से प्रार्थना करती हैं।

युवाओं के लिए प्रेरणा

आज के इस व्यस्त समय में जहां युवा पीढ़ी पारंपरिक मान्यताओं से दूर हो रही है, इस व्रत का महत्व युवाओं को भी समझने की आवश्यकता है। यह न केवल धार्मिक विश्वास का प्रतीक है, बल्कि पारिवारिक मूल्यों को भी संजोता है। इस प्रकार, मंगला गौरी व्रत को मनाने का सिलसिला नए युवा पीढ़ी में भी अपनी जड़ें जमा सकता है।

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