अमेरिका में तीन भारतीय कंपनियों पर जासूसी के गंभीर आरोप, Blacklist करने की मांग; अमेरिकी सांसदों ने Commerce Department को लिखा पत्र
अमेरिका में भारत से जुड़ी तीन कंपनियों को लेकर साइबर जासूसी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। अमेरिकी कांग्रेस के तीन सांसदों ने आरोप लगाया है कि BellTroX Pvt. Ltd., CyberRoot Pvt. Ltd. और Sunkissed Organic Farms Pvt. Ltd. लंबे समय से चल रहे कथित ‘hack-for-hire’ यानी पैसे लेकर हैकिंग और साइबर जासूसी अभियानों से जुड़ी रही हैं। सांसदों ने अमेरिकी वाणिज्य विभाग से इन कंपनियों और उनकी संबंधित सहायक कंपनियों को Entity List में डालने की मांग की है।
15 साल से चल रहा सिलसिला
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आरोप केवल साइबर अपराधों तक सीमित नहीं हैं। अमेरिकी सांसदों का कहना है कि कथित गतिविधियों में अमेरिकी नागरिकों, कारोबारों, निजी इक्विटी कंपनियों, दवा कंपनियों और प्रमुख अमेरिकी कानून फर्मों के वकीलों को निशाना बनाए जाने के मामले शामिल हैं। सांसदों के अनुसार, इन गतिविधियों का सिलसिला 15 साल से भी अधिक समय से चल रहा है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये फिलहाल अमेरिकी सांसदों द्वारा लगाए गए आरोप और उपलब्ध जांच रिपोर्टों पर आधारित दावे हैं; संबंधित कंपनियों के अधिकारियों ने पहले इन आरोपों से इनकार किया है।
तीनों सांसदों ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
इस मामले में डेमोक्रेटिक सीनेटर रॉन वाइडेन, डेमोक्रेटिक सीनेटर शेल्डन वॉइटहाउस और रिपब्लिकन प्रतिनिधि पैट हैरिगन एक साथ आए हैं। तीनों सांसदों ने 9 सितंबर 2026 को अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक को पत्र लिखकर इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। यह पत्र दलगत राजनीति से ऊपर उठकर की गई मांग के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इसमें डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों दलों के सांसद शामिल हैं। सांसदों ने अमेरिकी वाणिज्य विभाग के Bureau of Industry and Security (BIS) से BellTroX, CyberRoot और Sunkissed Organic Farms तथा संबंधित सहायक कंपनियों को Entity List में शामिल करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि इन कंपनियों से जुड़े कथित साइबर अभियानों ने हजारों अमेरिकी नागरिकों और अमेरिकी कंपनियों को प्रभावित किया है।
Sunkissed Organic Farms का नाम पहले क्या था?
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण नाम Sunkissed Organic Farms Pvt. Ltd. का है। अमेरिकी सांसदों के पत्र के अनुसार, यह कंपनी पहले Appin Technology Pvt. Ltd. के नाम से जानी जाती थी। इसके साथ Adaptive Control Security Global Corporate Pvt. Ltd., जिसे पहले Appin Software Security Pvt. Ltd. या Appin Security Group के नाम से जाना जाता था, तथा ABP Holdings Pvt. Ltd., जिसे पहले KGW Appin Knowledge Solutions Pvt. Ltd. कहा जाता था, जैसी कंपनियों का भी उल्लेख किया गया है। Appin का नाम पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कथित hack-for-hire गतिविधियों की जांच में सामने आ चुका है। 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, Appin को इस क्षेत्र की शुरुआती कंपनियों में से एक बताया गया था और आरोप था कि इसका नेटवर्क दुनिया भर के प्रभावशाली लोगों, अधिकारियों, कारोबारी नेताओं और अन्य हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों को निशाना बनाने वाली गतिविधियों से जुड़ा रहा।
BellTroX और CyberRoot पर भी पहले लग चुके हैं आरोप
BellTroX और CyberRoot के नाम भी इससे पहले साइबर जासूसी से जुड़ी रिपोर्टों में सामने आ चुके हैं। 2022 में इन दोनों कंपनियों को तथाकथित cyber-mercenary industry के प्रमुख खिलाड़ियों के रूप में रिपोर्ट किया गया था। उस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि पश्चिमी देशों के वकील और निजी जांचकर्ता कानूनी और कारोबारी विवादों के दौरान एक-दूसरे के खिलाफ जासूसी कराने के लिए ऐसी सेवाओं का इस्तेमाल करते थे। अमेरिकी सांसदों के ताजा पत्र में जांच का हवाला देते हुए कहा गया है कि इन कंपनियों से जुड़ी गतिविधियों में निजी इक्विटी कंपनियों, दवा कंपनियों और बड़ी अमेरिकी कानून फर्मों के 1,000 से अधिक वकीलों को निशाना बनाने के आरोप शामिल हैं। सांसदों का दावा है कि कुछ मामलों में साइबर हमलों का इस्तेमाल चल रहे कानूनी विवादों को प्रभावित करने के उद्देश्य से किया गया।
Qatar से जुड़े कथित कनेक्शन का भी उल्लेख
अमेरिकी सांसदों के पत्र में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है। पत्र के मुताबिक, इन साइबर समूहों की गतिविधियों के संबंध में ऐसे साक्ष्य सामने आए हैं जिनमें कथित तौर पर Qatar सरकार की ओर से काम करने की बात कही गई है। सांसदों ने दावा किया कि कुछ गतिविधियों में Qatar के World Cup bid के विरोधियों तथा अमेरिकी खुफिया मामलों से जुड़े एक पूर्व रिपब्लिकन अधिकारी के परिवार को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई। हालांकि, इन आरोपों को कंपनियों की ओर से स्वीकार किए जाने की पुष्टि नहीं है। तीनों कंपनियों के अधिकारियों ने गलत काम करने के आरोपों से इनकार किया है। Sunkissed Organic Farms और CyberRoot की ओर से पूछताछ का जवाब नहीं दिया गया, जबकि BellTroX से संपर्क नहीं हो सका। अमेरिकी Commerce Department ने भी पूछताछ पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी।
Entity List में शामिल होने पर क्या होगा?
अमेरिका की Entity List को सामान्य अर्थ में केवल एक ‘Blacklist’ समझना पूरी तस्वीर नहीं बताता। यह अमेरिकी वाणिज्य विभाग की एक महत्वपूर्ण निर्यात-नियंत्रण व्यवस्था है। किसी कंपनी या संस्था को इसमें शामिल किए जाने के बाद अमेरिकी निर्यात नियमों के तहत उसके साथ कुछ विशेष वस्तुओं, सॉफ्टवेयर और तकनीकी उत्पादों के लेन-देन के लिए लाइसेंस की आवश्यकता पड़ सकती है। इससे संबंधित कंपनी की अमेरिकी तकनीक तक पहुंच गंभीर रूप से सीमित हो सकती है। इसी वजह से तीनों अमेरिकी सांसद चाहते हैं कि इन कंपनियों को Entity List में शामिल किया जाए। उनके अनुसार, इससे अमेरिकी कंपनियों के सॉफ्टवेयर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा उपकरणों तक इन कंपनियों की पहुंच को नियंत्रित किया जा सकेगा। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि सांसदों की मांग का मतलब यह नहीं है कि कंपनियां पहले ही Entity List में डाल दी गई हैं। फिलहाल अमेरिकी सांसदों ने Commerce Department से ऐसा करने का अनुरोध किया है। अंतिम फैसला अमेरिकी प्रशासन और संबंधित विभागीय प्रक्रिया के तहत होगा।
बड़ी टेक कंपनियों की जांच में भी सामने आए नाम
इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आरोप केवल राजनीतिक या मीडिया रिपोर्टों तक सीमित नहीं रहे हैं। Reuters के अनुसार, Meta और Google सहित बड़ी टेक कंपनियों ने भी अलग-अलग रिपोर्टों में इन कंपनियों से जुड़ी कथित hacking activities का उल्लेख किया है। सूत्रों के अनुसार Meta और Google ने मिलकर इन गतिविधियों से संबंधित तीन रिपोर्ट प्रकाशित की हैं। अमेरिकी सांसदों ने इसी तरह की जांचों और सार्वजनिक रिपोर्टों को अपने पत्र में कार्रवाई के आधार के रूप में इस्तेमाल किया है। उनका तर्क है कि यदि विदेशी कंपनियां अमेरिकी नागरिकों, कारोबारों और कानून फर्मों को निशाना बनाने के लिए साइबर क्षमताओं का इस्तेमाल कर रही हैं, तो अमेरिकी सरकार को ऐसी कंपनियों की अमेरिकी तकनीकी संसाधनों तक पहुंच रोकने पर विचार करना चाहिए।
अमेरिकी मीडिया को चुप कराने के आरोप भी
इस मामले में सांसदों ने केवल साइबर हमलों की बात नहीं की है, बल्कि कथित ‘lawfare’ का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि इन कंपनियों और उनसे जुड़े पक्षों ने विदेशी अदालतों के जरिए अमेरिकी मीडिया संस्थानों और तकनीकी कंपनियों की रिपोर्टिंग को दबाने की कोशिश की। Wyden, Whitehouse और Harrigan के पत्र के अनुसार, कुछ मामलों में जांच से संबंधित रिपोर्ट को वैश्विक स्तर पर हटाने के लिए कानूनी कार्रवाई की गई। सांसदों ने इसे अमेरिकी जनता को साइबर खतरों की जानकारी से दूर रखने की कोशिश के रूप में बताया है। भारत में उसका एक संगठन, जो खुद को Association of Appin Training Centers बताता है, के साथ कानूनी विवाद चल रहा है। इस संगठन का आरोप है कि मामले की रिपोर्टिंग ने प्रशिक्षण केंद्रों और उनके छात्रों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया।
भारत-अमेरिका तकनीकी संबंधों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला?
भारत दुनिया के सबसे बड़े IT और software services केंद्रों में शामिल है और अमेरिकी कंपनियों के साथ भारतीय technology sector के गहरे कारोबारी संबंध हैं। ऐसे में किसी भारतीय कंपनी पर अमेरिकी सरकार की ओर से export-control कार्रवाई की मांग का असर केवल संबंधित कंपनियों तक सीमित नहीं रह सकता। इससे भारत-अमेरिका टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्युरिटी संबंधों में भी चर्चा तेज हो सकती है। हालांकि, यह मामला भारतीय IT industry के खिलाफ व्यापक अमेरिकी कार्रवाई का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। मौजूदा घटनाक्रम तीन विशिष्ट कंपनियों और उनसे जुड़ी कथित साइबर गतिविधियों पर केंद्रित है। अमेरिकी सांसदों की मांग का आधार कथित hack-for-hire ओपरेशन्स और नैशनल सिक्युरिटी कन्सर्न हैं, न कि भारत की पूरी IT इंडस्ट्री पर कोई सामान्य आरोप।
कंपनियों के लिए बढ़ सकती है मुश्किल
यदि अमेरिकी Commerce Department इन कंपनियों को Entity List में डालने का फैसला करता है, तो अमेरिकी तकनीक और संबंधित उत्पादों तक उनकी पहुंच प्रभावित हो सकती है। इससे cloud services, cybersecurity technologies और अन्य नियंत्रित अमेरिकी तकनीकी संसाधनों के इस्तेमाल पर अतिरिक्त प्रतिबंध या लाइसेंस आवश्यकताएं लागू हो सकती हैं। दूसरी ओर, यदि कंपनियां अमेरिकी आरोपों को चुनौती देती हैं तो मामला कानूनी और राजनयिक स्तर पर भी आगे बढ़ सकता है। इस पूरे घटनाक्रम पर भारत सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और अमेरिकी Commerce Department की अंतिम कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण होगी।
अंतिम फैसला अमेरिकी प्रशासन के हाथ
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि तीन अमेरिकी सांसदों ने तीन भारतीय कंपनियों—BellTroX, CyberRoot और Sunkissed Organic Farms—को अमेरिकी Entity List में डालने की औपचारिक मांग की है। आरोप है कि इन कंपनियों से जुड़े नेटवर्क ने वर्षों तक पैसे लेकर साइबर जासूसी और hacking operations चलाए तथा अमेरिकी नागरिकों, कंपनियों और वकीलों को निशाना बनाया। कंपनियों ने आरोपों से इनकार किया है और अंतिम निर्णय अभी अमेरिकी प्रशासन को लेना है।
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