महिला वोटरों को पैसा लेकिन टिकट कितने? तीन चुनाव के आंकड़ों से समझिए सपा और भाजपा ने स्त्रियों को कितना दिया सम्मान

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल तेजी से बदल रहा है. सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) दोनों ही महिलाओं पर ज्यादा ध्यान देने की कोशिश कर रहे हैं. चुनावों से पहले, राजनीतिक दल अपनी योजनाओं में महिलाओं के आर्थिक कल्याण के लिए कदम उठाने की बात कर रहे हैं. हाल में हुई घोषणाओं में महिलाओं के लिए आर्थिक मदद देने का वादा किया गया है, लेकिन सवाल यह है कि टिकटों का क्या?

सपा का महत्वाकांक्षी वादा

समाजवादी पार्टी ने महिला समानता दिवस पर घोषणा की है कि अगर वे सत्ता में आए, तो ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’ लागू करेंगे. इसके तहत हर महिला को सालाना 40,000 रुपये दिए जाने का वादा किया गया है. इससे महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बढ़ने का संकेत मिलता है, लेकिन टिकटों की संख्या पर क्या फर्क पड़ेगा?

बीजेपी भी पीछे नहीं

बीजेपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी महिला सशक्तीकरण के लिए कई योजनाओं का ऐलान किया है. उन्होंने लखनऊ में लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा का शुभारंभ करते हुए स्नातक करने वाली छात्राओं को स्कूटी बांटने की घोषणा की. इसके साथ ही, रक्षाबंधन पर महिलाओं के लिए फ्री बस सेवा उपलब्ध कराने का ऐलान किया गया है. यह सभी योजनाएं महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को समझती हैं, लेकिन चुनावी मैदान में उनका प्रतिनिधित्व कितना है?

नाँव, लेकिन टिकट नहीं

लोकसभा चुनावों की बात करें, तो 2024 के चुनावों में 543 सीटों पर केवल 800 महिला उम्मीदवार ही उतरीं, जो लगभग 10 प्रतिशत है. इस प्रकार, राजनीतिक दलों ने महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारने में कंजूसी दिखाई है. क्या यही स्थिति यूपी विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिलेगी?

अंगड़ाई लेते चुनावी आंकड़े

2022 के विधानसभा चुनाव में भी कई पार्टियों ने मात्र 254 महिलाओं को टिकट दिया, जो कुल उम्मीदवारों का केवल 31.75 प्रतिशत है. बीजेपी ने 16 प्रतिशत और कांग्रेस ने केवल 13 प्रतिशत महिलाओं को टिकट दिया. इससे साफ है कि जब महिला सशक्तीकरण की बात होती है, तो राजनीतिक दल बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनावी टिकटों में उनका योगदान बहुत कम है.

पिछले चुनावों का रिकॉर्ड

2017 के विधानसभा चुनाव में, महिलाओं की संख्या महज 559 थी, जबकि 403 सीटों पर केवल 44 महिलाओं को ही टिकट मिला. इस बार बीजेपी ने 44, सपा ने 22 और कांग्रेस ने 11 महिलाओं को टिकट दिया. चुनाव में बसपा और कांग्रेस से सिर्फ दो-दो महिला उम्मीदवार ही जीतीं, जिसमें बीजेपी की महिलाओं की जीत का आंकड़ा सबसे ज्यादा था.

महिलाओं के लिए सिर्फ घोषणाएँ?

चुनावों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व एक गंभीर मुद्दा है. 2012 में भी केवल 583 महिला उम्मीदवार میدان में थीं. बीजेपी, सपा, और कांग्रेस जैसे बड़े दलों ने महिलाओं को चुनावी टिकट देने में कभी भी खुलकर उदारता दिखाई नहीं. अब देखना है कि 2027 के चुनाव में राजनीतिक दल इस आधी आबादी को कितना महत्व देते हैं, या फिर सिर्फ योजना बनाकर छोड़ देते हैं.

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