चिप्स-बिस्किट और कोल्ड ड्रिंक्स के पैकेट पर जल्द दिख सकती है लाल चेतावनी! FSSAI का बड़ा प्रस्ताव
बदलती जीवनशैली के साथ पैकेटबंद और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ भारतीयों की रोजमर्रा की डाइट का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। चिप्स, बिस्किट, नमकीन, इंस्टेंट नूडल्स, पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय और कोल्ड ड्रिंक्स जैसे उत्पाद बच्चों से लेकर बड़ों तक तेजी से लोकप्रिय हैं। लेकिन इन आकर्षक पैकेटों के पीछे छिपी ज्यादा चीनी, नमक और फैट की मात्रा अब उपभोक्ताओं के सामने अधिक स्पष्ट तरीके से आ सकती है। देश की खाद्य सुरक्षा नियामक संस्था FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। इसके तहत ऐसे पैकेटबंद खाद्य और पेय पदार्थों के पैकेट के सामने लाल रंग का Hexagonal यानी षट्कोणीय चेतावनी चिन्ह लगाया जा सकता है, जिनमें निर्धारित सीमा से अधिक चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट मौजूद हो।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद ‘Front-of-Pack Warning Label’ की तैयारी
इस चेतावनी पर उत्पाद की संरचना के अनुसार “High Sugar”, “High Salt”, “High Fat” या “Highly Sweetened Beverage” जैसे संदेश लिखे जा सकते हैं। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को पैकेट खरीदने से पहले ही यह स्पष्ट जानकारी देना है कि संबंधित उत्पाद में स्वास्थ्य के लिए चिंता पैदा करने वाले तत्व अधिक मात्रा में मौजूद हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद तेज हुआ मामला
पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर स्पष्ट चेतावनी लेबल का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और जनहित याचिकाकर्ताओं का तर्क रहा है कि किसी उत्पाद के पीछे छोटे अक्षरों में लिखी पोषण संबंधी जानकारी आम उपभोक्ता के लिए आसानी से समझना मुश्किल होती है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2026 में FSSAI और केंद्र सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए स्पष्ट चेतावनी लेबल की जरूरत पर जोर दिया। अदालत ने विशेष रूप से बच्चों और युवाओं में अस्वास्थ्यकर पैकेटबंद खाद्य पदार्थों की बढ़ती खपत पर चिंता जताई थी। इसके बाद FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने अनुपालन हलफनामे में पैकेट के सामने स्पष्ट और आसानी से समझ आने वाली चेतावनी प्रणाली का प्रस्ताव रखा।
कैसा होगा लाल Hexagonal Warning Mark?
FSSAI के प्रस्ताव के अनुसार, चेतावनी चिन्ह लाल रंग का होगा, षट्कोण यानी Hexagon के आकार में होगा, पैकेट के सामने प्रमुख स्थान पर लगाया जाएगा और उपभोक्ता को तुरंत यह संकेत देगा कि उत्पाद में संबंधित पोषक तत्व की मात्रा अधिक है। उत्पाद की सामग्री के आधार पर पैकेट पर अलग-अलग चेतावनियां हो सकती हैं—
HIGH FAT- अगर उत्पाद में निर्धारित सीमा से अधिक संबंधित फैट मौजूद है।
HIGH SUGAR- अगर उत्पाद में चीनी की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक है।
HIGH SALT- अगर उत्पाद में नमक या सोडियम की मात्रा ज्यादा है।
HIGHLY SWEETENED BEVERAGE- अधिक मीठे पेय पदार्थों के लिए अलग चेतावनी का प्रस्ताव है।
FSSAI का उद्देश्य इस प्रणाली को सरल और तुरंत समझ में आने वाला बनाना है, ताकि उपभोक्ता को पैकेट के पीछे मौजूद लंबी पोषण तालिका पढ़ने की जरूरत पड़े बिना भी उत्पाद की स्थिति का प्रारंभिक संकेत मिल सके।
पहले चरण में किन उत्पादों पर लग सकता है निशान?
प्रस्तावित व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, पहले चरण में उन पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लागू करने का प्रस्ताव है, जिनमें चिंता पैदा करने वाले निर्दिष्ट तत्वों जैसे नमक, चीनी या फैट में से दो या अधिक की मात्रा तय सीमा से ज्यादा हो। बाद के चरण में व्यवस्था को और व्यापक बनाने पर विचार किया जा सकता है, ताकि किसी एक चिंताजनक तत्व की अधिक मात्रा होने पर भी स्पष्ट चेतावनी दी जा सके। हालांकि अंतिम नियम और चरणों का स्वरूप आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगा।
कौन-कौन से उत्पाद आ सकते हैं दायरे में?
यदि प्रस्तावित नियम लागू होता है तो इसका असर कई लोकप्रिय पैकेटबंद उत्पादों पर पड़ सकता है, जैसे चिप्स और नमकीन, बिस्किट और कुकीज, मीठे कार्बोनेटेड पेय, पैकेज्ड स्नैक्स, कुछ इंस्टेंट और प्रोसेस्ड फूड, अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थ, ज्यादा नमक वाले स्नैक्स और अधिक फैट वाले पैकेटबंद उत्पाद। हालांकि हर उत्पाद पर चेतावनी अपने आप नहीं लगेगी। यह उत्पाद की वास्तविक पोषण संरचना और निर्धारित मानकों पर निर्भर करेगा।
क्या घी, तेल, चीनी और नमक के पैकेट पर भी लगेगा लाल निशान?
प्रस्ताव में कुछ single-ingredient यानी एकल घटक वाले खाद्य पदार्थों को अलग तरीके से देखा गया है। रिपोर्टों के अनुसार, घी, खाद्य तेल, नमक, चीनी, गुड़ और शहद जैसे कुछ एकल-घटक उत्पादों को प्रस्तावित फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी व्यवस्था से छूट दी जा सकती है। अंतिम सूची और नियम आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद स्पष्ट होंगे।
क्यों जरूरी है पैकेट के सामने चेतावनी?
वर्तमान में अधिकांश पैकेटबंद उत्पादों पर पोषण संबंधी जानकारी पैकेट के पीछे या किनारे पर दी जाती है। इसमें कैलोरी, फैट, शुगर, सोडियम और अन्य पोषक तत्वों की मात्रा लिखी होती है। लेकिन आम उपभोक्ता के सामने कई समस्याएं होती हैं—
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जानकारी छोटे अक्षरों में लिखी होती है,
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तकनीकी शब्दों को समझना आसान नहीं होता,
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लोग खरीदारी के दौरान पूरी तालिका नहीं पढ़ते,
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और आकर्षक विज्ञापन या पैकेजिंग उपभोक्ता का ध्यान अधिक खींचते हैं।
लाल चेतावनी चिन्ह का विचार इसी समस्या को दूर करने के लिए है। पैकेट उठाते ही उपभोक्ता को यह संकेत मिल सकेगा कि उत्पाद में किसी महत्वपूर्ण तत्व की मात्रा अधिक है।
बच्चों और युवाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
पैकेटबंद स्नैक्स और मीठे पेय पदार्थों के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में बच्चे और युवा भी शामिल हैं। आकर्षक पैकेजिंग, कार्टून, सेलिब्रिटी विज्ञापन और स्वाद के कारण बच्चे ऐसे उत्पादों की ओर जल्दी आकर्षित होते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि ज्यादा चीनी, नमक और अस्वास्थ्यकर फैट वाले खाद्य पदार्थों का नियमित और अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने भी बच्चों के स्वास्थ्य और अस्वास्थ्यकर स्नैक्स की बढ़ती खपत को लेकर चिंता जताई थी।
क्या लाल निशान का मतलब होगा कि खाना पूरी तरह प्रतिबंधित है?
नहीं। प्रस्तावित लाल चेतावनी का अर्थ किसी उत्पाद पर प्रतिबंध लगाना नहीं होगा। इसका मुख्य उद्देश्य उपभोक्ता को स्पष्ट जानकारी देना है, ताकि वह सोच-समझकर फैसला कर सके। उदाहरण के लिए, यदि किसी चिप्स के पैकेट पर “High Salt” या “High Fat” लिखा है, तो इसका अर्थ यह नहीं कि उत्पाद अवैध है। बल्कि उपभोक्ता को यह संकेत मिलेगा कि उसमें संबंधित तत्व की मात्रा अधिक है और उसका सेवन अपनी डाइट तथा स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
फूड कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती
यदि यह प्रस्ताव अंतिम नियम का रूप लेता है तो देश की बड़ी खाद्य और पेय कंपनियों को अपनी पैकेजिंग में बदलाव करना पड़ सकता है। इससे कंपनियों के सामने दो बड़े विकल्प हो सकते हैं—
पहला, उत्पाद की पैकेजिंग पर स्पष्ट चेतावनी लगाना।
दूसरा, अपने उत्पादों की संरचना में बदलाव करके चीनी, नमक या फैट की मात्रा कम करने पर विचार करना।
इसी कारण यह प्रस्ताव केवल उपभोक्ताओं के लिए ही नहीं, बल्कि भारत के विशाल पैकेज्ड फूड और बेवरेज उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों ने प्रस्ताव की सराहना के साथ कुछ सवाल भी उठाए
कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पैकेट के सामने लाल चेतावनी देने के विचार को उपभोक्ता हित में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका मानना है कि यह लोगों को उत्पाद की पोषण गुणवत्ता को जल्दी समझने में मदद कर सकता है। हालांकि प्रस्ताव को लेकर कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। विशेष रूप से पहले चरण में केवल उन उत्पादों को चेतावनी के दायरे में लाने की बात पर सवाल उठाए गए हैं, जिनमें दो या अधिक चिंताजनक तत्व निर्धारित सीमा से ज्यादा हों। आलोचकों का कहना है कि कोई उत्पाद केवल एक तत्व—जैसे बहुत अधिक चीनी—के कारण भी अस्वास्थ्यकर हो सकता है। इसलिए अंतिम नियमों में इस पहलू को किस तरह शामिल किया जाएगा, यह महत्वपूर्ण होगा।
पुरानी Star Rating व्यवस्था से अलग है नया प्रस्ताव
भारत में Front-of-Pack Nutrition Labelling को लेकर पहले भी विभिन्न मॉडल प्रस्तावित किए जा चुके हैं। FSSAI ने 2022 में Indian Nutrition Rating (INR) जैसे स्टार-आधारित मॉडल का मसौदा जारी किया था, जिसमें उत्पादों को पोषण प्रोफाइल के आधार पर रेटिंग देने की बात थी। लेकिन अब सामने आया लाल Hexagonal Warning Label मॉडल अलग है।इसका उद्देश्य किसी उत्पाद को “स्वस्थ” या “कम स्वस्थ” बताने के बजाय सीधे चेतावनी देना है कि उसमें चीनी, नमक या फैट की मात्रा अधिक है।
कब से लागू होगा नया नियम?
यह सबसे बड़ा सवाल है। फिलहाल FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट के सामने इस व्यवस्था को लागू करने का प्रस्ताव रखा है, लेकिन अभी तक अंतिम अधिसूचना और लागू होने की निश्चित तारीख घोषित नहीं हुई है। इसलिए यह कहना कि आज से सभी चिप्स, बिस्किट और कोल्ड ड्रिंक्स पर लाल निशान लगाना अनिवार्य हो गया है, सही नहीं होगा। वर्तमान स्थिति यह है कि FSSAI ने लाल Hexagonal Front-of-Pack Warning Label का प्रस्ताव रखा है। आगे नियमों को अंतिम रूप देने, अधिसूचना जारी करने और लागू करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन से उत्पाद कब से इस चेतावनी के दायरे में आएंगे।
उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा?
यदि प्रस्ताव लागू होता है तो पैकेटबंद खाद्य पदार्थ खरीदते समय उपभोक्ता को पैकेट के सामने ही अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। इससे खरीदारी के दौरान लोग ज्यादा चीनी वाले उत्पाद पहचान सकेंगे, अधिक नमक वाले स्नैक्स को समझ सकेंगे, ज्यादा फैट वाले खाद्य पदार्थों के बारे में सतर्क हो सकेंगे और अपनी जरूरत के अनुसार बेहतर विकल्प चुन सकेंगे। हालांकि केवल लेबल देखकर ही स्वस्थ डाइट सुनिश्चित नहीं होती। संतुलित भोजन, ताजे फल और सब्जियां, पर्याप्त प्रोटीन और नियमित शारीरिक गतिविधि भी स्वस्थ जीवनशैली के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
पैकेट का रंग नहीं, अब चेतावनी भी बताएगी सेहत का सच
भारत में पैकेटबंद और प्रोसेस्ड फूड की बढ़ती खपत के दौर में FSSAI का प्रस्ताव उपभोक्ता जागरूकता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। लाल रंग का Hexagonal Warning Mark उपभोक्ताओं को यह समझने में मदद कर सकता है कि जिस चिप्स, बिस्किट, नमकीन या पेय पदार्थ को वे खरीद रहे हैं, उसमें चीनी, नमक या फैट की मात्रा कितनी चिंताजनक हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सामने आए इस प्रस्ताव ने भारत में फूड लेबलिंग और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर नई बहस शुरू कर दी है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि FSSAI इस प्रस्ताव को कब अंतिम रूप देता है और भारत के करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर लाल चेतावनी का नियम वास्तव में कब लागू होता है।
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