अब पैकेट देखते ही पता चलेगा कितना ‘अनहेल्दी’ है खाना, FSSAI का बड़ा प्रस्ताव

The CSR Journal Magazine
पैकेटबंद खाने-पीने की चीजों को लेकर जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने ज्यादा चीनी, नमक या फैट वाले खाद्य और पेय पदार्थों पर लाल रंग का चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद ग्राहकों को उत्पाद खरीदने से पहले उसमें मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा के बारे में आसानी से जानकारी देना है। लाल निशान देखकर ग्राहक यह समझ सकेगा कि संबंधित उत्पाद में चीनी, नमक या फैट की मात्रा ज्यादा है।

लेबल पर क्या जानकारी दी जाएगी?

FSSAI की ओर से प्रस्तावित चेतावनी लेबल में ज्यादा मात्रा वाले पोषक तत्वों से जुड़ी जानकारी स्पष्ट तरीके से दिखाई जा सकती है। इसमें अधिक फैट, अधिक शुगर, अधिक नमक या बहुत ज्यादा मीठे पेय जैसी चेतावनियां शामिल हो सकती हैं। इसका उद्देश्य पैकेट के पीछे लिखी जानकारी को पढ़े बिना भी ग्राहक को जरूरी संकेत देना है। यानी खरीदारी के समय ग्राहक को यह फैसला लेने में आसानी होगी कि उसे संबंधित उत्पाद लेना है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट में चल रही है सुनवाई

यह मामला सुप्रीम कोर्ट में उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आया है, जिनमें पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर पश्चिमी देशों की तरह स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी लेबल लगाने की मांग की गई है। FSSAI ने अदालत को अपनी फाइलिंग में प्रस्तावित चेतावनी लेबल के बारे में जानकारी दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त की शुरुआत में हुई सुनवाई में FSSAI से चेतावनी लेबल लगाने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा था।

लेबल लगाने में देरी पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर जरूरी चेतावनी लेबल लगाने की प्रक्रिया में हुई लंबी देरी को लेकर FSSAI को फटकार लगाई थी। अदालत का जोर इस बात पर है कि उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थों में मौजूद ज्यादा चीनी, नमक और फैट जैसी चीजों की जानकारी आसानी से मिलनी चाहिए। इसी के बाद चेतावनी लेबल की प्रक्रिया को लेकर FSSAI की ओर से जानकारी सामने आई है।

बड़ी कंपनियां कर रही हैं प्रस्ताव का विरोध

रिपोर्ट के मुताबिक, नेस्ले, पेप्सिको और कोका-कोला जैसी बड़ी कंपनियां प्रस्तावित चेतावनी लेबल का विरोध कर रही हैं। कंपनियों को आशंका है कि पैकेट पर लाल रंग की चेतावनी दिखाई देने से ग्राहक ऐसे उत्पादों को खरीदने से बच सकते हैं। इससे इन कंपनियों के उत्पादों की बिक्री पर असर पड़ने की संभावना है। हालांकि, प्रस्ताव का उद्देश्य कंपनियों की बिक्री को प्रभावित करना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को उत्पाद की पोषण संबंधी जानकारी अधिक स्पष्ट तरीके से उपलब्ध कराना बताया गया है।

आम लोगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

अगर प्रस्ताव लागू होता है तो ग्राहक को पैकेट पर ही यह संकेत मिल सकेगा कि किसी खाद्य या पेय पदार्थ में चीनी, नमक या फैट की मात्रा ज्यादा है। इससे खरीदारी के समय लोगों को अधिक जानकारी के आधार पर फैसला लेने में मदद मिल सकती है। खासतौर पर पैकेटबंद स्नैक्स, पेय पदार्थ और अन्य प्रोसेस्ड फूड खरीदने वालों के लिए यह जानकारी उपयोगी हो सकती है।

अभी प्रस्ताव है, नियम लागू नहीं हुआ

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि FSSAI ने अभी लाल चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव रखा है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे पूरे देश में लागू नियम नहीं माना जा सकता। आगे सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और FSSAI की प्रक्रिया के बाद इस प्रस्ताव को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी। अगर इसे मंजूरी मिलती है तो खाद्य कंपनियों को अपने पैकेट की लेबलिंग में बदलाव करना पड़ सकता है।

उपभोक्ताओं को मिलेगी ज्यादा स्पष्ट जानकारी

लाल चेतावनी लेबल का प्रस्ताव लागू होने पर पैकेटबंद खाद्य पदार्थों की खरीदारी का तरीका बदल सकता है। ग्राहक केवल ब्रांड और कीमत देखकर ही नहीं, बल्कि उत्पाद में मौजूद ज्यादा चीनी, नमक या फैट की जानकारी देखकर भी फैसला ले सकेंगे। इस पूरे मामले में अब नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और FSSAI की आगे की कार्रवाई पर रहेगी।

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