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श्रद्धालुओं की सहूलियतों के लिए सीएसआर से बन रहा है क्यू कॉम्प्लेक्स, भक्तों को लंबी लाइन से मिलेगी मुक्ति

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Tedros Adhanom Ghebreyesus
 
कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी से लोगों की जिंदगियों में ना सिर्फ सकारात्मक बदलाव आ रहा है बल्कि श्रद्धालुओं की सहूलियतों के लिए भी अब सीएसआर का इस्तेमाल किया जा रहा है। दरअसल CSR की मदद से Deoghar Shravani Mela – श्रावणी मेला में अब भक्तों को लंबी लाइन में लगने से मुक्ति मिल जाएगी। इसके लिए 160 करोड़ की लागत से खास क्यू कॉम्प्लेक्स तैयार किया जा रहा है जिसकी क्षमता पचास हजार होगी। इसकी शुरुआत हो जाने के बाद बाबा के भक्तों को कुमैठा जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वहीं देर रात रात बाबा भोले के भक्त को सड़क नहीं रहना होगा।

120 करोड़ की लागत से NEC बना रहा है क्यू कॉम्प्लेक्स

The CSR Journal ने स्थानीय सांसद निशिकांत दुबे से बात की जिसमें उन्होंने बताया कि 160 करोड़ की लागत से कॉम्प्लेक्स का कार्य पूरा होने के बाद 50 हजार तीर्थयात्रियों के क्यू के लिए यह क्यू कॉम्प्लेक्स मील का पत्थर साबित होगा। 2025 के श्रावणी मेला में भक्तों को दस किलोमीटर लंबी कतार से मुक्ति मिल जाएगी। अब भक्तों को कुमैठा तक नहीं जाना होगा। देर रात से सड़क पर नहीं रहना होगा। सांसद निशिकांत दुबे ने क्यू कॉम्प्लेक्स के दूसरे फेज के कार्य को लेकर मानसरोवर तट का निरीक्षण किया।

कम्युनिटी सेंटर की तरह होगा क्यू कॉम्प्लेक्स, सीएसआर फंड से बनाया जायेगा

हम आपको बता दें कि क्यू कॉम्प्लेक्स बनाने का मामला हाईकोर्ट में गया था, हाईकोर्ट के निर्देश पर नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड – Navayuga Engineering Company Limited – NEC) अपने सीएसआर के फंड से ये काम शुरू करेगी। फिलहाल पहले फेज का काम 15 जुलाई तक पूरा हो जाएगा। श्रावण और भादो मेला के बाद दूसरे फेज का काम शुरू होगा। Corporate Social Responsibility से बने इस क्यू कॉम्प्लेक्स में सारी सुविधाएं होंगी। ये क्यू कॉम्प्लेक्स बाकायदा कम्युनिटी सेंटर की तहत काम करेगा।

क्यू कॉम्प्लेक्स की ये योजना 2014-15 की है

हम आपको बता दें कि 2014-15 की यह योजना है, जो काफी धीमी गति से चल रही थी। पहला फेज का काम भी अब तक चल ही रहा है। इस काम को गति देने और दूसरे फेज की राशि देने के लिए राज्य सरकार ने रुचि नहीं ली। केंद्र ने राज्य को राशि इसलिए नहीं दिया कि उसने कार्य का उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिया। इसके बाद राज्य सरकार ने खुद इसे करने की इच्छा जताई, लेकिन उसमें विलंब होता देख सांसद निशिकांत दुबे ने जनहित याचिका दाखिल किया था। जिसके बाद हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वह कार्य को प्रस्तावित कंपनी से कॉम्प्लेक्स का कार्य कराए और कार्य की मॉनिटरिंग खुद करे।