पाकिस्तानी नौसेना की नई पनडुब्बी हंगोर ने पहली बार दागी एंटी-शिप मिसाइल, समुद्र में सफल परीक्षण
पाकिस्तान नौसेना की नई हंगोर श्रेणी की पनडुब्बी PNS/M Hangor ने अपनी पहली वास्तविक हथियार फायरिंग पूरी कर ली है। उत्तर अरब सागर में किए गए इस परीक्षण के दौरान पनडुब्बी से एक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल दागी गई, जिसने निर्धारित लंबी दूरी के लक्ष्य को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। इस परीक्षण को पाकिस्तानी नौसेना की पनडुब्बी युद्धक क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिचालन उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। हंगोर श्रेणी की पनडुब्बियां पाकिस्तान के समुद्री युद्धक बेड़े के आधुनिकीकरण की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल हैं। पाकिस्तान ने ऐसी आठ पनडुब्बियों को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना बनाई है। इनमें आधुनिक युद्धक प्रणालियों, उन्नत सेंसर, वायु-स्वतंत्र प्रणोदन प्रणाली यानी Air-Independent Propulsion (AIP) और कम पहचान में आने वाली तकनीकों को शामिल किया जा रहा है। इन विशेषताओं का उद्देश्य पनडुब्बियों को लंबे समय तक पानी के भीतर सक्रिय रहने और दुश्मन की निगरानी प्रणालियों से बचते हुए अभियान संचालित करने में मदद करना है।
पहली वास्तविक मिसाइल फायरिंग से बढ़ी परिचालन क्षमता
PNS/M Hangor की हालिया मिसाइल फायरिंग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल किसी हथियार प्रणाली का स्थिर या प्रशिक्षण परीक्षण नहीं था, बल्कि वास्तविक हथियार दागकर लक्ष्य को भेदने का परिचालन अभ्यास था। इस तरह के परीक्षण से नौसेना को पनडुब्बी, हथियार प्रणाली, सेंसर, लक्ष्य पहचान और फायर-कंट्रोल व्यवस्था के बीच तालमेल को परखने का अवसर मिलता है। उत्तर अरब सागर में हुए इस अभ्यास में पनडुब्बी ने निर्धारित लक्ष्य पर एंटी-शिप क्रूज मिसाइल दागी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मिसाइल ने लक्ष्य को सटीक रूप से निशाना बनाया। हालांकि, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वीडियो या तस्वीरों के आधार पर इस्तेमाल की गई मिसाइल के सटीक मॉडल की स्वतंत्र पुष्टि करना संभव नहीं है। यही वजह है कि मिसाइल की पहचान को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कुछ रक्षा पर्यवेक्षकों ने वीडियो में दिखाई देने वाली मिसाइल को चीन की YJ श्रृंखला की एंटी-शिप क्रूज मिसाइल से जोड़ने की संभावना जताई है। कुछ विश्लेषणों में YJ-18 या YJ-19 का नाम भी सामने आया है। लेकिन केवल वीडियो फुटेज के आधार पर इन दावों को निश्चित रूप से प्रमाणित नहीं किया जा सकता। इसी तरह मिसाइल की वास्तविक गति भी वीडियो देखकर निर्धारित नहीं की जा सकती।
चीन के साथ सहयोग से तैयार हो रही हंगोर श्रेणी
हंगोर श्रेणी की पनडुब्बी परियोजना पाकिस्तान और चीन के बीच रक्षा सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। इन पनडुब्बियों का विकास चीन की Type 039B/Type 041 परिवार से संबंधित डिजाइन पर आधारित माना जाता है। पाकिस्तान के लिए यह परियोजना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उसकी पनडुब्बी क्षमता में आधुनिक प्लेटफॉर्म शामिल होते हैं। पाकिस्तान ने कुल आठ हंगोर श्रेणी की पनडुब्बियों की योजना बनाई है। समझौते के तहत शुरुआती पनडुब्बियां चीन में निर्मित की जा रही हैं, जबकि शेष पनडुब्बियों के निर्माण में पाकिस्तान की कराची शिपयार्ड एंड इंजीनियरिंग वर्क्स (KS&EW) की भूमिका है। इसका उद्देश्य केवल पनडुब्बियां हासिल करना ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान में पनडुब्बी निर्माण की तकनीकी क्षमता को भी मजबूत करना है।
AIP तकनीक क्यों है महत्वपूर्ण?
हंगोर श्रेणी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक वायु-स्वतंत्र प्रणोदन प्रणाली है। सामान्य डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को अपनी बैटरियों को चार्ज करने के लिए समय-समय पर सतह के करीब आना या स्नॉर्कल का इस्तेमाल करना पड़ता है। इससे उनके पकड़े जाने की संभावना बढ़ सकती है। AIP प्रणाली पनडुब्बी को लंबे समय तक पानी के भीतर अपेक्षाकृत कम निर्भरता के साथ संचालन करने में मदद करती है। इसका सीधा फायदा उसकी छिपने की क्षमता और समुद्र में टिके रहने की अवधि पर पड़ता है। हालांकि AIP को परमाणु प्रणोदन के बराबर नहीं माना जाता। परमाणु पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के भीतर उच्च गति से संचालन कर सकती हैं, जबकि पारंपरिक AIP पनडुब्बियों की भूमिका मुख्य रूप से अपेक्षाकृत शांत और कम गति वाले पानी के भीतर अभियानों में महत्वपूर्ण होती है।
कम पहचान में आने वाली पनडुब्बी
आधुनिक पनडुब्बी युद्ध में केवल मिसाइल की मारक क्षमता ही महत्वपूर्ण नहीं होती। उससे भी महत्वपूर्ण होता है कि पनडुब्बी स्वयं कितनी देर तक दुश्मन की नजर से बची रह सकती है। हंगोर श्रेणी में कम ध्वनि उत्पन्न करने वाली प्रणालियों, आधुनिक सेंसर और बेहतर जलगत संरचना जैसी विशेषताओं पर जोर दिया गया है। पनडुब्बी जितनी कम आवाज पैदा करती है, उतना ही मुश्किल उसका पता लगाना हो सकता है। इसे समुद्री युद्ध में stealth का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसके अलावा आधुनिक सोनार और अन्य सेंसर पनडुब्बी को आसपास के समुद्री क्षेत्र में जहाजों तथा दूसरी गतिविधियों की पहचान करने में मदद करते हैं। इन प्रणालियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर पनडुब्बी अपने अभियान और हथियारों के इस्तेमाल को नियंत्रित कर सकती है।
एंटी-शिप क्रूज मिसाइल की भूमिका
एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों का प्रमुख उद्देश्य समुद्र में मौजूद युद्धपोतों और दूसरे बड़े सतही लक्ष्यों को निशाना बनाना होता है। जब ऐसी मिसाइल किसी पनडुब्बी से दागी जाती है, तो हमलावर प्लेटफॉर्म स्वयं समुद्र की सतह के नीचे छिपा रह सकता है। यही संयोजन—छिपी हुई पनडुब्बी और लंबी दूरी की मिसाइल—समुद्री युद्ध में एक महत्वपूर्ण चुनौती पैदा करता है। संभावित विरोधी के लिए खतरा केवल उसके सामने दिखाई देने वाले युद्धपोतों से नहीं रहता, बल्कि समुद्र के भीतर छिपे प्लेटफॉर्म से भी हो सकता है। हालांकि किसी विशेष मिसाइल की वास्तविक मारक दूरी, उड़ान प्रोफाइल, गति और मार्गदर्शन क्षमता के बारे में आधिकारिक जानकारी उपलब्ध न होने पर सोशल मीडिया या वीडियो के आधार पर निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
YJ-18 या YJ-19 की चर्चा क्यों?
हालिया फायरिंग के वीडियो सामने आने के बाद कुछ रक्षा विश्लेषकों ने अनुमान लगाया कि इसमें चीन की YJ श्रृंखला की मिसाइल का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। YJ-18 चीन की प्रमुख एंटी-शिप क्रूज मिसाइल प्रणालियों में गिनी जाती है और इसे पनडुब्बियों तथा अन्य समुद्री प्लेटफॉर्म से इस्तेमाल किए जाने वाली प्रणालियों से जोड़ा जाता रहा है। दूसरी ओर YJ-19 को लेकर भी हाल के वर्षों में रक्षा विश्लेषणों में चर्चा हुई है। मिसाइल की पहचान के लिए सामान्यतः उसके आकार, प्रक्षेपण प्रणाली, पंखों की बनावट, इंजन की विशेषताओं, उड़ान प्रोफाइल और आधिकारिक सैन्य जानकारी जैसे कई स्रोतों की आवश्यकता होती है। इसलिए अभी YJ-18 या YJ-19 को निश्चित हथियार बताना जल्दबाजी होगी।
पाकिस्तान की समुद्री रणनीति में बदलाव
हंगोर श्रेणी का विकास पाकिस्तान की समुद्री रणनीति में पानी के भीतर युद्धक क्षमता को मजबूत करने की दीर्घकालिक कोशिश का हिस्सा है। पाकिस्तान नौसेना के पास पहले से अगोस्ता श्रेणी की पनडुब्बियां हैं, लेकिन नई पीढ़ी की पनडुब्बियों के शामिल होने से उसके बेड़े में आधुनिक प्रणोदन, सेंसर और हथियार प्रणालियों की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। पाकिस्तान के लिए समुद्री सुरक्षा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था और व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों पर निर्भर है। कराची और ग्वादर जैसे बंदरगाहों के साथ-साथ अरब सागर में व्यापारिक समुद्री मार्ग देश की रणनीतिक जरूरतों से जुड़े हैं। ऐसे में पनडुब्बियों को पाकिस्तान की समुद्री प्रतिरोधक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पनडुब्बियां दुश्मन की नौसैनिक गतिविधियों की निगरानी, समुद्री मार्गों पर दबाव बनाने और युद्ध की स्थिति में सतही युद्धपोतों को चुनौती देने के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं।
भारत के संदर्भ में भी अहम
हंगोर श्रेणी की पनडुब्बियों का विकास भारत के लिए भी समुद्री सुरक्षा के नजरिये से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हिंद महासागर क्षेत्र में भारत और पाकिस्तान दोनों अपनी नौसैनिक क्षमताओं को लगातार आधुनिक बना रहे हैं। भारत के पास परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियों के साथ-साथ पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों का बेड़ा है और वह अपनी पनडुब्बी क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है। ऐसे में पाकिस्तान की नई AIP-सक्षम पनडुब्बियां दोनों देशों के बीच समुद्री सैन्य संतुलन से जुड़े विश्लेषणों में स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बनती हैं। हालांकि किसी एक परीक्षण को दोनों देशों की पूरी नौसैनिक क्षमता का प्रतिनिधि मानना उचित नहीं होगा। समुद्री युद्धक क्षमता का आकलन जहाजों और पनडुब्बियों की संख्या के साथ-साथ उनके सेंसर, हथियार, प्रशिक्षण, रखरखाव, चालक दल की दक्षता, संचार नेटवर्क और वास्तविक परिचालन अनुभव जैसे कई कारकों से किया जाता है।
आठ पनडुब्बियों से क्या बदलेगा?
पाकिस्तान की योजना के अनुसार आठ हंगोर श्रेणी की पनडुब्बियां उसके पनडुब्बी बेड़े के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। नई पनडुब्बियों के धीरे-धीरे बेड़े में शामिल होने के साथ पाकिस्तान के पास पुराने प्लेटफॉर्म के मुकाबले अधिक आधुनिक सेंसर और प्रणोदन प्रणाली वाले विकल्प होंगे। PNS/M Hangor की पहली वास्तविक मिसाइल फायरिंग इस पूरी परियोजना के लिए एक अहम पड़ाव है। इससे यह संकेत मिलता है कि कम से कम पहला प्लेटफॉर्म हथियार प्रणाली के वास्तविक परीक्षण के चरण तक पहुंच चुका है। आने वाले समय में अन्य पनडुब्बियों की स्वीकृति, परीक्षण और नौसेना में औपचारिक तैनाती से परियोजना की वास्तविक परिचालन क्षमता का अधिक स्पष्ट आकलन संभव होगा।
फिलहाल इस परीक्षण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि पाकिस्तान की नई हंगोर श्रेणी की पनडुब्बी ने समुद्र में वास्तविक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल दागकर निर्धारित लक्ष्य को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है। यह पाकिस्तान नौसेना के लिए एक महत्वपूर्ण परिचालन मील का पत्थर है। वहीं इस्तेमाल की गई मिसाइल का सटीक मॉडल और उसकी वास्तविक गति जैसे दावों पर आधिकारिक पुष्टि आने तक सावधानी बरतना जरूरी है।
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