Noida में 168 सेक्टरों में से कोई भी 100 प्रतिशत अतिक्रमण मुक्त नहीं, अधिकारियों की चुप्पी से सुरक्षा पर उठे सवाल

The CSR Journal Magazine
नोएडा में अतिक्रमण को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। राजधानी दिल्ली से सटे यूपी के प्रमुख शहर में कुल 168 सेक्टर हैं, लेकिन इनमें से कुछ सेक्टर मास्टर प्लान में शामिल नहीं हैं। नोएडा के भूभाग में मौजूद करीब 163 सेक्टरों में एक भी ऐसा सेक्टर नहीं है जिसे 100 प्रतिशत अतिक्रमण मुक्त कहा जा सके। यहां तक कि प्रमुख सेक्टर जैसे सेक्टर-15ए, 14ए, 105 और 108 भी अतिक्रमण से पूरी तरह अछूते नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब शहर के विकसित सेक्टर भी पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त नहीं हैं, तो नोएडा में अतिक्रमण पर नियंत्रण की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

किरायेदारों की सुरक्षा पर खतरा

नोएडा से सटे गांवों की स्थिति भी गंभीर है। यहां प्राधिकरण की नक्शा नीति लागू नहीं होती और बिल्डिंग बायलॉज भी लागू नहीं होने की बात सामने आती है। गांवों में सड़क, पानी और सीवर जैसी मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदारी प्राधिकरण की है। इसी का फायदा उठाकर कई गांवों में कई मंजिला इमारतें खड़ी कर दी गई हैं। इन इमारतों में बड़ी संख्या में किरायेदार रहते हैं, जिससे सुरक्षा और हादसों को लेकर सवाल खड़े होते हैं। लाल डोरा वाली जमीन पर अवैध निर्माण के मामले भी लगातार सामने आते हैं।
कुछ स्थानों पर भूमाफिया, स्थानीय लोगों और संबंधित व्यवस्था की मिलीभगत से निर्माण गतिविधियां चलती हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि बिना स्वीकृत नक्शे और निर्धारित बिल्डिंग नियमों के कई मंजिला इमारतें आखिर कैसे खड़ी हो रही हैं। यह स्थिति न केवल किरायेदारों के लिए खतरा है, बल्कि पूरे शहर की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।

अधिकारियों की चुप्पी

नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों से जब इस मुद्दे पर सवाल किया गया कि नोएडा में ऐसा कौन सा सेक्टर है जो 100 प्रतिशत अतिक्रमण मुक्त है, तो उन्होंने चुप्पी साध ली। अधिकारियों से यह भी पूछा गया कि जब गांवों में प्राधिकरण की नक्शा नीति और बिल्डिंग बायलॉज लागू नहीं हैं, तो वहां कई मंजिला इमारतों के निर्माण और उनमें रहने वाले लोगों की सुरक्षा की निगरानी कैसे होती है। इस पर प्राधिकरण की AECO वंदना त्रिपाठी ने कहा कि इस विषय पर बेहतर जवाब OSD क्रांति शेखर सिंह दे पाएंगे।

अधिकारियों से संपर्क की कोशिश

जब OSD क्रांति शेखर सिंह से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि यह उनके कार्यक्षेत्र में आता है। लेकिन इस बारे में उनसे अधिक बेहतर जवाब GM ए.के. अरोड़ा और GM एस.पी. सिंह दे सकते हैं। अधिकारियों का पक्ष जानने के लिए GM ए.के. अरोड़ा और GM एस.पी. सिंह से लगातार दो दिन तक फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई। लेकिन दोनों अधिकारियों की ओर से कॉल का जवाब नहीं मिला।

सवालों का जवाब न मिलना

एस.पी. सिंह के PA ने फोन उठाकर बताया कि साहब मीटिंग में हैं और वापस कॉल करेंगे। इसके बाद भी कोई जवाब नहीं आया। अधिकारियों को संदेश भेजकर भी सवालों का जवाब मांगा गया, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं मिला। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नोएडा के किसी भी सेक्टर को 100 प्रतिशत अतिक्रमण मुक्त नहीं कहा जा सकता, तो अतिक्रमण रोकने की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।

गांवों में निर्माण की जिम्मेदारी

गांवों में बिल्डिंग बायलॉज लागू नहीं होने की स्थिति में कई मंजिला निर्माण, किरायेदारी और लोगों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारी किसकी है, यह भी एक बड़ा सवाल है। प्राधिकरण के आलाधिकारी इन सवालों का जवाब देने में असमर्थ रहे हैं। नोएडा में अतिक्रमण की यह गंभीर स्थिति न केवल शहर की छवि को धूमिल कर रही है, बल्कि यहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल रही है।

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