ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा: मौत के मुहाने से 2000 KM दूर तक, कैसे बची भारत की तेल सप्लाई? ओमान की खाड़ी से सुरक्षित निकले तेल जहाज
खाड़ी (Persian Gulf) में अमेरिका और ईरान के बीच भीषण जंग और अमेरिकी नाकेबंदी के दौरान भारतीय नौसेना का सबसे बड़ा और साहसिक ऑपरेशन ‘ऊर्जा सुरक्षा’ (Operation Urja Suraksha) रहा है, जिसके तहत नौसेना ने अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों को तैनात कर भारत आने वाले कीमती तेल और गैस टैंकरों को मौत के मुहाने से सुरक्षित निकाला। इसी तनाव के बीच जून 2026 में भारतीय नौसेना ने कोच्चि तट के पास कच्चे तेल से भरे एक विशाल टैंकर के फ्यूल टैंक से एक जिंदा मिसाइल वॉरहेड को निकालकर दुनिया का सबसे जोखिम भरा रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा किया है।
भारत की सुरक्षा के लिए बड़ा मिशन
भारतीय नौसेना ने ओमान की खाड़ी, अरब सागर और होर्मुज स्ट्रेट के पूर्वी हिस्से में कई अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों को तैनात किया। यह सब कच्चे तेल और एलपीजी ले जा रहे जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए किया गया था। अमेरिका और इरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते के बावजूद, अचानक शुरू हुए युद्ध ने भारतीय नौसेना को एक महत्वपूर्ण मिशन पर लगा दिया। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला बोल दिया, जिसके बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी कर दी। भारत की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए नौसेना ने एक बड़े ‘मिशन-बेस्ड डिप्लॉयमेंट’ को अंजाम दिया।
ऑपरेशन का नाम और उद्देश्य
भारतीय नौसेना ने अपने ऑपरेशन संकल्प के दायरे को बढ़ाते हुए इसे ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ का नाम दिया। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के करोड़ों रुपये के तेल और गैस जहाजों को युद्ध के बीच सुरक्षित बाहर निकालना था। होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से में 22 से 24 भारतीय जहाज फंस गए थे, जिन पर 600 से अधिक भारतीय नाविक थे। राहत की बात यह थी कि नौसेना ने ‘एंटी-हाईजैक’ रणनीति अपनाते हुए इन जहाजों को सुरक्षित निकाला।
ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ और होर्मुज की घेराबंदी
खाड़ी में अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए ब्लॉकैड (नाकेबंदी) और दोनों देशों के बीच मिसाइल हमलों के कारण दुनिया का सबसे व्यस्त समुद्री तेल मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जंग का मैदान बन गया था। भारत ने अपने जहाजों को सुरक्षा देने के लिए 5 से अधिक फ्रंटलाइन युद्धपोत तैनात किए थे। भारतीय नौसेना ने कतर, सऊदी अरब और यूएई से भारत के लिए निकलने वाले एलपीजी (LPG), एलएनजी (LNG) और कच्चे तेल के कमर्शियल जहाजों को रीयल-टाइम नेविगेशन और बैकचैनल गाइडेंस प्रदान की।
अमेरिकी हमलों के बीच फंसे भारतीय नाविक
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा ईरानी तेल निर्यात को रोकने के लिए चलाए गए अभियान में ‘MT Marivex’, ‘MT Settebello’ और ‘MT Jalveer’ जैसे व्यापारिक जहाजों पर अमेरिकी फाइटर जेट्स और हेलफायर मिसाइलों से हमले किए गए, जिनमें दुर्भाग्य से 3 भारतीय नाविकों की जान भी गई। भारतीय नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री एजेंसियों और ओमान की नौसेना के साथ बेहतरीन समन्वय बिठाकर इन जहाजों पर फंसे दर्जनों अन्य भारतीय क्रू मेंबर्स को रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला।
सुरक्षित मार्ग का तैनात नेटवर्क
भारतीय नौसेना ने तगड़े ‘लेयर्ड सिक्योरिटी ग्रिड’ के तहत इन जहाजों को अपनी सुरक्षा में घेरे रखा। जिन प्रमुख जहाजों की सुरक्षा की गई उनमें शिवालिक, नंदा देवी और जग वसंत शामिल थे। इसके साथ ही, कई दूसरे जहाजों को लगातार मॉनिटरिंग और नेविगेशनल सपोर्ट (रास्ता दिखाना) दिया गया, जिससे वे बिना किसी नुकसान के भारत के पश्चिमी तट तक पहुँच सके।
भारत के लिए बड़ी सफल कार्गो डिलीवरी
नौसेना की मुस्तैदी के कारण भारत का पहला एलएनजी (LNG) कैरियर ‘दिशा’ 62,370 मीट्रिक टन गैस कार्गो लेकर 18 जून 2026 को गुजरात के दाहेज पोर्ट पर सुरक्षित पहुंच रहा है। इससे पहले मई में 20,000 टन एलपीजी लेकर जहाज ‘सिमी’ भी होर्मुज पार कर गुजरात आ चुका है।
त्रिशक्ति की तैनाती
भारतीय नौसेना के युद्धपोतों को खाड़ी में तैनात करने के लिए कई प्रमुख जहाजों का इस्तेमाल किया गया। इसके लिए INS कोलकाता जैसे गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स और स्टील्थ फ्रिगेट्स का सहारा लिया गया। युद्धपोतों को साथ में तैनात रहने के लिए बड़ी संख्या में नौसैनिक और अधिकारी भी हर वक्त युद्धक तैयारी में रह रहे थे। इस ऑपरेशन में 1,500 से 2,000 नौसैनिक तैनात रहे।
हवाई ताकत का सहयोग
समुद्र में निगरानी रखने के लिए भारतीय नौसेना ने अपने P-8I पोसाइडन जैसे लंबी दूरी के युद्धक विमानों का उपयोग किया। इसके जरिए संदिग्ध नावों और युद्धपोतों पर नजर रखी गई। भारत ने अमेरिका से खरीदे गए MQ-9B सी-गार्डियन ड्रोन्स भी तैनात किए, जो बिना रुके कई घंटों तक खाड़ी क्षेत्र की निगरानी करते रहे।
मौत के साए में 2000 KM का सफर और नौसेना का ऑपरेशन
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैराह से कच्चे तेल लेकर भारत के कोच्चि आ रहे टैंकर ‘MT Olympic Life’ पर ओमान की खाड़ी/अरब सागर के पास एक अज्ञात मिसाइल से हमला हुआ। मिसाइल फटी नहीं, बल्कि जहाज के मुख्य ढांचे को चीरती हुई सीधे उसके कच्चे तेल से भरे संवेदनशील फ्यूल टैंक के बेहद करीब जाकर फंस गई। जहाज इसी हालत में करीब 2000 किलोमीटर तक चलता रहा। इसके बाद भारतीय नौसेना के बम निरोधक दस्ते (Bomb Disposal Squad) ने कोच्चि तट के पास समुद्र के बीचों-बीच बेहद जटिल हाई-रिस्क ऑपरेशन चलाकर उस जिंदा मिसाइल वॉरहेड को सुरक्षित बाहर निकाला और निष्क्रिय किया।
सफलता की कहानी
भारतीय नौसेना की इस मिशन में सफलता का मुख्य कारण उनकी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और सटीक रणनीति थी। संदिग्ध नावों पर नजर रखने के लिए मार्कोस कमांडोज हमेशा तैयार रहे। इस प्रकार, भारत की जीवन रेखा कहे जाने वाले तेल-गैस जहाजों को सुरक्षित भारतीय सीमा तक लाया गया। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी प्रशासन के बीच हुए एक अंतरिम शांति समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोल दिया गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत की तेल आपूर्ति को बड़ी राहत मिली है।
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