NEET पेपर लीक मामला: NTA को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, पीएम मोदी की सीधी निगरानी में हो रहा काम

The CSR Journal Magazine

मोदी की निगरानी में NEET पेपर लीक मामले में सुधार, NTA ने सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस संवेदनशील मुद्दे और परीक्षा सुधारों की निगरानी कर रहे हैं। न्यायालय में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार आगामी परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से आयोजित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।

सुप्रीम कोर्ट में NEET पेपर लीक की सुनवाई

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में NEET-UG पेपर लीक मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले की जांच की निगरानी कर रहे हैं। इसी बीच, जस्टिस नरसिम्हा ने शिक्षा मंत्रालय से यह स्पष्ट किया कि NEET-UG परीक्षाओं की जांच प्रक्रिया और निष्कर्ष को प्रस्तुत किया जाए। इसके तहत NTA ने सुप्रीम कोर्ट को हलफनामा भी सौंपा, जिसमें बताया गया कि पेपर लीक के बाद सुरक्षा में बड़े स्तर पर सुधार किए गए हैं।

सुरक्षा सुधार की प्रक्रिया में तेजी

NEET पेपर लीक मामले में कई संगठनों, जैसे कि फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने NTA के कामकाज को कोर्ट में चुनौती दी है। इस दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से NTA को फटकार लगाई, जिसमें जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने कहा कि यह बहुत दुखद है कि NTA ने पिछले पेपर लीक मामले से कोई सबक नहीं लिया।

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने नैशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि पिछले हस्तक्षेपों के बावजूद एजेंसी ने अतीत से कोई सबक नहीं सीखा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल जांच या कार्रवाई की घोषणाएं काफी नहीं हैं। जब तक इस पूरे सिस्टम में जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने NTA और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर परीक्षा सुधारों पर एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट और हलफनामा (Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है।

परीक्षा सुधार और राधाकृष्णन कमेटी की रिपोर्ट

2024 के नीट विवाद के बाद पूर्व इसरो चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड कमेटी का गठन किया गया था। कोर्ट ने इस कमेटी के सुझावों और लागू किए गए कदमों की प्रगति रिपोर्ट मांगी है। इस कमेटी ने परीक्षा सुधारों के लिए शॉर्ट-टर्म (60 सिफारिशें) और लॉन्ग-टर्म (35 सिफारिशें) योजनाएं सौंपी हैं, जिनमें से अधिकांश को अपनाने की प्रक्रिया जारी है। अब NTA को आदेश दिया गया है कि वह 28 मई तक हलफनामा दाखिल करें और यह स्पष्ट करें कि 2024 में दिए गए निर्देशों और निगरानी कमेटी की सिफारिशों पर क्या कदम उठाए गए हैं।

नीट परीक्षा में भारी संख्या में उम्मीदवार शामिल

NEET-UG परीक्षा का आयोजन 3 मई को देश भर के 551 शहरों और 14 विदेशी केंद्रों पर किया गया था, जिसमें करीब 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। NTA के अनुसार, 7 मई की शाम को परीक्षा में गड़बड़ी की सूचना मिली थी, जिसके बाद ये मामले केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दिए गए। 12 मई को परीक्षा को रद्द कर दिया गया और री-एग्जाम का फैसला लिया गया। अगले ही दिन, शिक्षा मंत्रालय और NTA ने NEET री-एग्जाम की तारीख 21 मई को तय की

भविष्य में कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT)

परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता वापस लाने और लीक रोकने के लिए सरकार ने घोषणा की है कि वर्ष 2027 से NEET परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में शिफ्ट किया जाएगा। एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर सख्त है, वहीं संसदीय समिति ने भी NTA महानिदेशक, सीबीआई (CBI) निदेशक और उच्च शिक्षा सचिव को तलब कर पेपर लीक और सुरक्षा कमियों पर जवाब मांगा है।

अभी तक 13 आरोपी गिरफ्तार

NEET एग्जाम में हुए पेपर लीक मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह घटना शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल उठाती है। NEET परीक्षा, जो कि पूरे भारत में मेडिकल और डेंटल कोर्सेज में दाखिले के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है, इसके माध्यम से छात्रों को MBBS, BDS, और अन्य कोर्सेज में प्रवेश मिलता है, जिसमें AIIMS और JIPMER जैसे प्रसिद्ध संस्थान भी शामिल हैं।

मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या

भारत में लगभग 1 लाख से अधिक MBBS और 27,000 से अधिक BDS सीटें उपलब्ध हैं। NEET परीक्षा 2013 में शुरू हुई थी, और इसके जरिए पूरे देश में मेडिकल शिक्षा का मार्ग प्रशस्त होता है। NEET परीक्षा की महत्ता को देखते हुए यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो।

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