Mumbai SRA Builder Flats Freeze Rule: मुंबई में SRA का बड़ा एक्शन, किराया न देने पर बिल्डरों के फ्लैट होंगे फ्रीज, अब बिना भुगतान नहीं होगी बिक्री

The CSR Journal Magazine
Mumbai SRA Builder Flats Freeze Rule: मुंबई में स्लम पुनर्विकास परियोजनाओं (Mumbai SRA Projects) को लेकर एक अहम और सख्त फैसला लिया गया है। डॉ महेंद्र कल्याणकर (Dr. Mahendra Kalyankar News) के लीडरशिप में स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (Mumbai SRA News) ने पहली बार ऐसा कदम उठाया है, जिसके तहत अगर बिल्डर स्लम निवासियों को तय समय पर ट्रांजिट रेंट (किराया) नहीं देते, तो उनके बिक्री वाले फ्लैट ‘फ्रीज’ कर दिए जाएंगे।

Mumbai SRA Builder Flats Freeze Rule: पहली बार लागू हुआ ऐसा नियम

अब तक बिल्डरों पर किराया देने का दबाव तो था, लेकिन उसे लागू कराने के लिए कोई सख्त व्यवस्था नहीं थी। इसी कमी को दूर करने के लिए SRA ने यह नया सिस्टम लागू किया है। इस नियम के तहत बिल्डरों के उन फ्लैट्स को फ्रीज किया जाएगा, जो बाजार में बेचने के लिए तैयार होते हैं। जब तक बिल्डर लंबित किराया नहीं चुकाते, तब तक इन फ्लैट्स की बिक्री, ट्रांसफर या मॉर्गेज पर रोक रहेगी।

किराए की गारंटी के लिए उठाया कदम

Mumbai SRA Builder Flats Freeze Rule: SRA के मुताबिक, बिल्डरों को अब करीब तीन साल के किराए के बराबर वैल्यू के फ्लैट फ्रीज रखने होंगे। पहले यह अवधि दो साल की थी, जिसे अब बढ़ाकर और सख्त किया गया है। इसका मकसद साफ है ताकि स्लम निवासियों को समय पर किराया मिले, बिल्डर अपनी जिम्मेदारी से पीछे न हटें और प्रोजेक्ट समय पर पूरे हों।

Mumbai SRA Builder Flats Freeze Rule: क्यों जरूरी था यह फैसला?

SRA CEO Dr. Mahendra Kalyankar की माने तो मुंबई में लंबे समय से यह शिकायत सामने आती रही है कि कई बिल्डर पुनर्विकास के दौरान लोगों को समय पर किराया नहीं देते, जिससे परिवारों को आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती है। कई मामलों में प्रोजेक्ट वर्षों तक अटक जाते हैं और लोग अस्थायी घरों में रहने को मजबूर हो जाते हैं। ऐसे हालात में यह नया नियम राहत देने वाला माना जा रहा है।

SRA का फोकस: पहले निवासी, फिर बिक्री

इस फैसले का असर सिर्फ बिल्डरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रॉपर्टी खरीदने वालों पर भी पड़ेगा। अब खरीदारों को यह जांचना होगा कि जिस प्रोजेक्ट में वे निवेश कर रहे हैं, उसमें कोई फ्लैट फ्रीज तो नहीं है। स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी का कहना है कि अब प्राथमिकता स्लम निवासियों के अधिकारों की सुरक्षा है। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि पुनर्विकास सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन पर समय पर पूरा हो।
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