मुंबई में फर्जी इंस्पेक्टर बनकर CDR-SDR और लोकेशन बेचता था आरोपी, झारखंड-बिहार से पुलिस वाले करते थे मदद  

The CSR Journal Magazine
मुंबई में पुलिस इंस्पेक्टर बनकर लोगों को ठगने और मोबाइल नंबरों की गोपनीय जानकारी अवैध तरीके से उपलब्ध कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। मुंबई पुलिस की दहिसर स्थित क्राइम ब्रांच की यूनिट 12 ने मामले की जांच करते हुए झारखंड, बिहार और महाराष्ट्र से जुड़े कुल 9 आरोपियों की पहचान की है। इनमें से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी मोबाइल फोन बरामद कराने का झांसा देकर लोगों से पैसे लेते थे और बदले में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सब्सक्राइबर डिटेल रिकॉर्ड (SDR) और मोबाइल लोकेशन जैसी संवेदनशील जानकारी हासिल करते थे।

इंस्टाग्राम पर देते थे मोबाइल बरामद कराने का विज्ञापन

पुलिस के अनुसार, ओशिवारा पुलिस थाना क्षेत्र में रहने वाला एक व्यक्ति अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर विज्ञापन पोस्ट करता था। इसमें दावा किया जाता था कि चोरी हुए या गुम हो चुके मोबाइल फोन बरामद कराकर दिए जा सकते हैं। मोबाइल खोने वाले लोग इस विज्ञापन को देखकर उसमें दिए गए नंबर पर संपर्क करते थे। आरोपी कथित तौर पर खुद को पुलिस विभाग का इंस्पेक्टर ‘संजय’ बताकर लोगों को भरोसे में लेता था। इसके बाद मोबाइल फोन ढूंढने या बरामद कराने के नाम पर उनसे पैसे लेता था। पुलिस को मिली गोपनीय जानकारी के मुताबिक, आरोपी लोगों से पैसे लेकर अवैध तरीके से मोबाइल नंबरों की CDR, SDR और लोकेशन संबंधी जानकारी प्राप्त कर रहा था।

क्राइम ब्रांच ने ऐसे पकड़ा आरोपी

इस मामले में मिली गोपनीय सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच यूनिट 12 की टीम ने 22 जून 2026 को मुंबई के जोगेश्वरी पश्चिम स्थित एसवी रोड पर एचपी पेट्रोल पंप के सामने, आयशा टावर के प्रवेश द्वार के पास कार्रवाई की। पुलिस ने यहां एक आरोपी को हिरासत में लिया। उसके पास से मिले दो मोबाइल फोन की जांच के दौरान पुलिस को मोबाइल नंबरों की CDR, SDR और लोकेशन जैसी जानकारी अवैध तरीके से हासिल किए जाने के संकेत मिले। इसके बाद मामले में केस दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई।

दो आरोपी झारखंड और बिहार पुलिस में हैं सिपाही

जांच के दौरान पुलिस ने CDR, SDR और लोकेशन उपलब्ध कराने वाले कथित नेटवर्क से जुड़े कुल 9 आरोपियों की पहचान की। इनमें महाराष्ट्र, झारखंड और बिहार से जुड़े लोग शामिल हैं। पुलिस ने अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले का एक अहम पहलू यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में से दो झारखंड और बिहार पुलिस बल में सिपाही के पद पर कार्यरत बताए गए हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क में उनकी कथित भूमिका और गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराने के तरीके की जांच कर रही है।

50 से अधिक CDR, 520 से ज्यादा SDR और 550 नंबरों की लोकेशन की जानकारी

पुलिस के मुताबिक, अब तक की जांच में आरोपियों द्वारा 50 से अधिक कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), 520 से ज्यादा सब्सक्राइबर डिटेल रिकॉर्ड (SDR), 550 से अधिक मोबाइल नंबरों की लोकेशन और 420 से अधिक IMEI नंबरों की जानकारी उपलब्ध कराने का खुलासा हुआ है। आरोपियों के पास से कुल 7 मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।

कई धाराओं में मामला दर्ज, जांच जारी

इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। ओशिवारा पुलिस थाने में इससे संबंधित अपराध क्रमांक 935/2026 दर्ज है, जबकि क्राइम ब्रांच की कार्रवाई से जुड़ा मामला अपराध क्रमांक 68/2026 के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि संवेदनशील मोबाइल डेटा किस स्रोत से हासिल किया जाता था, इसे किन लोगों तक पहुंचाया गया और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन शामिल हैं। मामले की आगे की जांच जारी है।
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