मुंबई के मानखुर्द इलाके में यातायात की समस्या कम करने के लिए प्रस्तावित दो नए फ्लाईओवर अब पर्यावरणीय मंजूरी के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गए हैं। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (MCGM) ने इन फ्लाईओवरों के निर्माण में बाधा बन रही हाई-टेंशन बिजली लाइनों को स्थानांतरित करने के लिए 1.6202 हेक्टेयर वन भूमि, जिसमें मैंग्रोव मौजूद हैं, के डायवर्जन की अनुमति पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) से मांगी है। खास बात यह है कि प्रस्तावित भूमि का हिस्सा ठाणे क्रीक फ्लेमिंगो अभयारण्य की सीमा और उसके अधिसूचित Eco-Sensitive Zone (ESZ) में आता है।
MCGM की यह मांग ऐसे समय सामने आई है, जब मानखुर्द T-जंक्शन पहले से ही मुंबई से नवी मुंबई और पुणे की ओर जाने वाले वाहनों के लिए बड़े ट्रैफिक bottleneck के रूप में सामने आता रहा है। प्रस्तावित फ्लाईओवरों का उद्देश्य मौजूदा सिग्नल को बाईपास कर वाहनों की आवाजाही को अधिक सुचारु बनाना है। हालांकि, परियोजना के लिए मैंग्रोव वाले वन क्षेत्र के इस्तेमाल की मंजूरी मांगने से विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर सवाल भी उठेंगे।
मौजूदा मानखुर्द फ्लाईओवर के दोनों ओर बनेंगे नए फ्लाईओवर
MCGM की योजना मौजूदा मानखुर्द फ्लाईओवर के दोनों ओर दो नए फ्लाईओवर बनाने की है। पहला फ्लाईओवर मौजूदा पुल के पश्चिमी हिस्से में प्रस्तावित है। इसके जरिए घाटकोपर-मानखुर्द लिंक रोड से Sion-Panvel Highway होते हुए नवी मुंबई की ओर जाने वाले वाहनों को सीधे रास्ता देने की योजना है। दूसरा फ्लाईओवर मौजूदा पुल के पूर्वी हिस्से में बनाया जाना प्रस्तावित है। इसका इस्तेमाल नवी मुंबई की ओर से आने वाले वाहनों को घाटकोपर-मानखुर्द लिंक रोड से जोड़ने के लिए किया जाएगा। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य T-जंक्शन पर मौजूद ट्रैफिक सिग्नल को बाईपास करना है, जहां पीक आवर में वाहनों का दबाव काफी बढ़ जाता है। यह इलाका मुंबई के पूर्वी हिस्से को नवी मुंबई और आगे मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। घाटकोपर-मानखुर्द लिंक रोड का संपर्क Eastern Express Highway से होता है और आगे Sion-Panvel Highway के जरिए नवी मुंबई तथा मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की दिशा में यातायात जाता है। ऐसे में मानखुर्द T-जंक्शन पर किसी भी तरह की रुकावट का असर दूर तक देखने को मिलता है।
बिजली की हाई-टेंशन लाइनों के कारण अटका है निर्माण
फ्लाईओवर परियोजना के निर्माण में सबसे बड़ी तकनीकी बाधाओं में से एक मौजूदा हाई-टेंशन बिजली लाइनें हैं। MCGM के दस्तावेज के मुताबिक, घाटकोपर-मानखुर्द लिंक रोड के पास तीन हाई-टेंशन केबल लाइनें उस हिस्से से गुजरती हैं जहां प्रस्तावित फ्लाईओवर का निर्माण होना है। फ्लाईओवर के पिलर और अन्य संरचनाओं के लिए आवश्यक ऊंचाई तथा सुरक्षा दूरी सुनिश्चित करने के लिए इन बिजली लाइनों और उनसे जुड़े बिजली के टावरों को उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करना जरूरी बताया गया है। इसी काम के लिए वन भूमि के एक हिस्से को डायवर्ट करने की अनुमति मांगी गई है। MCGM के प्रस्ताव में बताया गया है कि मौजूदा transmission lines का footprint तथा बिजली के Pylons को आंशिक रूप से स्थानांतरित करने के लिए प्रस्तावित Corridor वन क्षेत्र के भीतर आता है। इसमें 1.1088 हेक्टेयर क्षेत्र करीब 889.103 मीटर लंबाई के साथ संबंधित है, जबकि 0.4732 हेक्टेयर क्षेत्र करीब 526.458 मीटर लंबाई में Notified Eco-Sensitive Zone के अंतर्गत बताया गया है। कुल मिलाकर वन भूमि के डायवर्जन की मांग 1.6202 हेक्टेयर की है। इसके अतिरिक्त लगभग 1.0657 हेक्टेयर भूमि गैर-वन क्षेत्र में आती है, जिसका इस्तेमाल इस काम के लिए किया जाना है।
कितने मैंग्रोव प्रभावित होंगे, अभी आंकड़ा सामने नहीं
परियोजना से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहलू मैंग्रोव को लेकर है। MCGM ने 1.6202 हेक्टेयर वन भूमि, जिसमें मैंग्रोव मौजूद हैं, के डायवर्जन की अनुमति मांगी है। लेकिन उपलब्ध प्रस्ताव में कुल कितने मैंग्रोव पेड़ प्रभावित होंगे, इसकी संख्या अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित बिजली लाइन स्थानांतरण के दौरान कितने पेड़ों को हटाना पड़ेगा या कितने मैंग्रोव क्षेत्र पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा। पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया में इस पहलू का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि मैंग्रोव तटीय पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और मुंबई-ठाणे क्रीक क्षेत्र में इनका संबंध जैव विविधता और पक्षियों के आवास से भी है।
ठाणे क्रीक फ्लेमिंगो अभयारण्य और ESZ का मामला
प्रस्तावित क्षेत्र का एक हिस्सा Thane Creek Flamingo Sanctuary की सीमा में आता है, जबकि दूसरा हिस्सा उसके notified Eco-Sensitive Zone में शामिल है। MoEFCC के अनुसार ESZ का उद्देश्य संरक्षित क्षेत्रों के आसपास ऐसे संक्रमण क्षेत्र के रूप में काम करना है, जहां विकासात्मक गतिविधियों को पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए नियंत्रित और विनियमित किया जाता है। ठाणे क्रीक फ्लेमिंगो अभयारण्य के ESZ की आधिकारिक अधिसूचना में संरक्षित क्षेत्र की सीमाओं, जैव विविधता और गतिविधियों के नियमन के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। अधिसूचना के मुताबिक ESZ में आने वाली ऐसी गतिविधियां, जो निर्धारित निषिद्ध श्रेणी में नहीं आतीं, उन्हें भी संबंधित परिस्थितियों के आधार पर निगरानी और नियामक प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। इस मामले में इसलिए केवल फ्लाईओवर निर्माण की मंजूरी पर्याप्त नहीं होगी। वन भूमि के उपयोग और बिजली लाइनों के स्थानांतरण से जुड़े पर्यावरणीय तथा वन्यजीव संबंधी प्रावधान भी लागू होंगे। MCGM ने इसी वजह से MoEFCC के समक्ष औपचारिक अनुमति की प्रक्रिया शुरू की है।
परियोजना पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
मैनखुर्द फ्लाईओवर परियोजना का मामला केवल पर्यावरणीय अनुमति तक सीमित नहीं है। इसके Alignment को लेकर भी पहले सवाल उठ चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना के Bidding Process के दौरान City and Industrial Development Corporation (CIDCO) ने MCGM से alignment में बदलाव का अनुरोध किया था, क्योंकि प्रस्तावित फ्लाईओवर का alignment 34.89 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित Mumbai Metro Line 8-Gold Line के Alignment से Overlap कर रहा था। Metro 8 को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे को नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से जोड़ने की योजना है। ऐसे में मानखुर्द क्षेत्र में अलग-अलग बड़े Infrastructure Projects के Alignment को आपस में समन्वित करना भी परियोजना की महत्वपूर्ण चुनौती है।
पहले अनुमानित लागत ₹918 करोड़, बाद में बढ़ी
MCGM ने सितंबर 2024 में इन फ्लाईओवरों के निर्माण के लिए Tender जारी किया था। उस समय परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹918 करोड़ बताई गई थी। बाद में परियोजना लागत में संशोधन किया गया, हालांकि ताजा संशोधित आंकड़ा उपलब्ध रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं है। वहीं सितंबर 2026 की एक अन्य रिपोर्ट में परियोजना की लागत ₹1,958 करोड़ बताई गई है और दोनों Vehicular Arms की लंबाई करीब 1.47 किलोमीटर और 1.93 किलोमीटर बताई गई है। इससे संकेत मिलता है कि शुरुआती अनुमान की तुलना में परियोजना की लागत में उल्लेखनीय बदलाव हुआ है।
निर्माण के दौरान ट्रैफिक की समस्या बढ़ने की आशंका
दिलचस्प बात यह है कि जिस परियोजना का उद्देश्य मानखुर्द T-जंक्शन पर Traffic Congestion कम करना है, उसके निर्माण के दौरान इसी इलाके में अस्थायी रूप से ट्रैफिक दबाव बढ़ने की आशंका है। सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित फ्लाईओवर के एक महत्वपूर्ण Pillar के निर्माण के लिए Carriageway को प्रभावित करना पड़ सकता है। Traffic Police और MCGM इसके लिए वैकल्पिक traffic arrangement पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि T-junction पहले से ही bottleneck है। रिपोर्ट के मुताबिक, नवी मुंबई की ओर जाने वाले वाहनों के लिए Sion-Panvel Highway पर पहले से ही Congestion रहता है। निर्माण के दौरान सड़क की उपलब्ध चौड़ाई कम होने पर पीक आवर्स में यात्रियों को अतिरिक्त समय लग सकता है।
अप्रैल की घटना ने भी बढ़ाई थी चिंता
फ्लाईओवर निर्माण के दौरान 29 अप्रैल को महाराष्ट्र नगर के पास इस्तेमाल हो रही एक Piling Rig के पलटने की घटना भी सामने आई थी। इस दुर्घटना में Mumbai Police के कांस्टेबल संतोष गोपाल चव्हाण की मौत हुई थी और Sion-Panvel Highway पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इस घटना के बाद निर्माण कार्य के दौरान traffic management और work-site safety को लेकर भी ध्यान बढ़ा है। अब जब बिजली लाइनों को स्थानांतरित करने और नए हिस्सों पर निर्माण आगे बढ़ाने की प्रक्रिया चल रही है, तो यातायात प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था परियोजना के महत्वपूर्ण हिस्से होंगे।
अगस्त 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य
MCGM ने परियोजना को आगे बढ़ाने के साथ अगस्त 2027 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा है। दोनों फ्लाईओवर चालू होने के बाद मैनखुर्द T-जंक्शन पर मौजूदा signal को bypass करने की योजना है। इससे घाटकोपर-मानखुर्द लिंक रोड से नवी मुंबई तथा नवी मुंबई से मुंबई की दिशा में जाने वाले यातायात को अधिक सीधा मार्ग मिल सकेगा। हालांकि, परियोजना की गति अब पर्यावरणीय मंजूरी, बिजली लाइनों के स्थानांतरण, Alignment Coordination और Construction-Related Traffic Management जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी।
विकास बनाम पर्यावरण-मानखुर्द परियोजना का बड़ा सवाल
मानखुर्द के दोनों फ्लाईओवर मुंबई के महत्वपूर्ण पूर्वी-पश्चिमी और मुंबई-नवी मुंबई यातायात संपर्क को बेहतर करने के उद्देश्य से प्रस्तावित हैं। भारी traffic वाले junction को signal-free बनाने से रोजाना इस मार्ग का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को लाभ मिलने की योजना है। लेकिन दूसरी ओर, परियोजना के लिए जिस 1.6202 हेक्टेयर वन भूमि और मैंग्रोव क्षेत्र के डायवर्जन की अनुमति मांगी गई है, उसका हिस्सा ठाणे क्रीक फ्लेमिंगो अभयारण्य और उसके ESZ से जुड़ा है। ऐसे में अंतिम निर्णय में सड़क अवसंरचना की जरूरत के साथ पर्यावरणीय प्रभाव, मैंग्रोव संरक्षण, वन्यजीव क्षेत्र की संवेदनशीलता और वैकल्पिक तकनीकी विकल्पों का आकलन महत्वपूर्ण रहेगा। फिलहाल MCGM की ओर से मैंग्रोव प्रभावित होने की कुल संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है और परियोजना के इस हिस्से पर MoEFCC की मंजूरी प्रक्रिया आगे बढ़नी है। मानखुर्द फ्लाईओवर परियोजना मुंबई के यातायात ढांचे के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन इसके निर्माण से पहले पर्यावरणीय अनुमति एक अहम पड़ाव है। 1.6202 हेक्टेयर वन भूमि के प्रस्तावित डायवर्जन और उसमें मौजूद मैंग्रोव की वास्तविक संख्या तथा प्रभाव का विस्तृत आकलन सामने आने के बाद ही परियोजना के पर्यावरणीय असर की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
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