मणिपुर में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच भिड़ंत: आंसू गैस के गोले दागे गए

The CSR Journal Magazine
मणिपुर में शनिवार को स्थायी शांति की मांग कर रहे हजारों प्रदर्शनकारियों का पुलिस से टकराव हुआ। प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री के आवास की ओर मार्च कर रहे थे, जिसे पुलिस ने रोकने की कोशिश की। पुलिस ने बैरिकेड्स को तोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। प्रदर्शनकारी बिष्णुपुर जिले में हुए एक बम धमाके में मारे गए दो बच्चों के लिए न्याय की मांग कर रहे थे। इसके साथ ही, उन्होंने जातीय संघर्ष से प्रभावित आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के पुनर्वास की भी मांग की।

COCOMI का नेतृत्व, रैलियों को रोका गया

प्रदर्शनकारी चार अलग-अलग रैलियों को COCOMI (कोऑर्डिनेटिंग कमिटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी) के बैनर तले निकाल रहे थे, जिन्हें विभिन्न स्थानों पर रोका गया। ये रैलियां बाबूपाड़ा इलाके में CM के बंगले की ओर बढ़ रही थीं। अधिकारियों ने बताया कि CM के आवास के चारों दिशाओं में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी और बैरिकेड्स लगाए गए थे। इंफाल पूर्वी जिले में खुराई लामलोंग में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की।

संयोजक का बयान, आंदोलन को तेज करने का आश्वासन

COCOMI के संयोजक वाई. के. धीरेन ने CM से मुलाकात के बाद बताया कि संगठन जनता के साथ मिलकर अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आंदोलन को और तेज करेगा। उन्होंने कहा कि 3 मई 2023 से मणिपुर संकट में कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। इस दौरान, उन्होंने राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और परस्पर विरोधी बयानों के कारण शांति प्रयासों में बाधा आने का आरोप लगाया।

बम धमाके पर कार्रवाई की मांग

COCOMI के प्रवक्ता नाहकपम शांता सिंह ने बताया कि संगठन मणिपुर सरकार से 7 अप्रैल को त्रोंगलाओबी में हुए बम धमाके में मारे गए बच्चों के मामले में ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ की मांग कर रहा है। उन्होंने चेतवानी दी कि अगर सरकार जवाब नहीं देती है, तो संगठन अन्य लोकतांत्रिक तरीकों से आंदोलन करने को मजबूर होगा।

जातीय हिंसा का संदर्भ

मणिपुर में इम्फाल घाटी के मैतेई और आस-पास की पहाड़ियों के कुकी समुदाय के बीच जातीय हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और हजारों लोग बेघर हुए हैं। इसके पहले, मणिपुर ने एक साल राष्ट्रपति शासन का अनुभव किया था और 4 फरवरी को नई सरकार का गठन हुआ। 2023 में मई महीने से जारी जातीय हिंसा के दौरान कई जगह आगजनी, लूट और हत्याओं की घटनाएं हुईं।

पूर्व मुख्यमंत्री का इस्तीफा और नए सिरे से सरकार

पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने 9 फरवरी 2025 को इस्तीफा दिया था, जिसके बाद 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ। करीब एक साल बाद, 4 फरवरी 2026 को भाजपा के युमनाम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। यह स्थिति मणिपुर के लिए नितांत संवेदनशील बनी रह सकती है।

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