कराची में मचा हाहाकार, महंगाई के बाद पानी की मार- बकरीद से पहले बूंद-बूंद को तरसी जनता

The CSR Journal Magazine

बकरीद पर पाकिस्तान में पानी की भारी कमी, कराची में हाहाकार!

कराची में ईद-उल-अज़हा (बकरीद) के पवित्र त्योहार के दौरान पानी का संकट चरम पर पहुंच गया है, जिससे शहर की लगभग 70% आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है। पिछले दो महीनों से जारी इस गंभीर संकट ने त्योहार के दौरान लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।

कराची में पानी का संकट

पाकिस्तान के बड़े शहर कराची की लगभग 70 प्रतिशत आबादी इस समय पानी के गंभीर संकट से जूझ रही है। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, गर्मियों के मौसम और बढ़ती मांग के बीच पानी की उपलब्धता तेजी से घट रही है।

संकट के कारण

विशेषज्ञों के मुताबिक, कराची में पानी की कमी के कई कारण हैं। सबसे प्रमुख कारणों में बढ़ती जनसंख्या, पुरानी पाइपलाइनें हैं जो पानी की लीकेज का कारण बनती हैं। इनके अलावा, पानी की चोरी और जल परियोजनाओं में देरी भी संकट को और गहरा कर रही है।

बुनियादी ढांचे की विफलता

अप्रैल के अंत में ढाबेजी पंपिंग स्टेशन पर भारी बिजली कटौती के कारण मुख्य जल संचरण लाइनें फट गईं। इसके बाद साफोरा के पास मरम्मत कार्य के चलते जलापूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। कराची में पानी की दैनिक मांग 125 करोड़ गैलन (1,250 MGD) से अधिक है, लेकिन वर्तमान में केवल 65 करोड़ गैलन (650 MGD) की ही आपूर्ति हो पा रही है। त्योहार के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों, साफ-सफाई और कुर्बानी के पशुओं की देखभाल के लिए पानी की खपत अचानक बढ़ गई, जिससे संकट और गहरा गया।

जनता पर बढ़ता टैंकर माफिया का आतंक

पाइपलाइन से पानी न आने के कारण लयारी, ओरंगी, कोरंगी और मलिर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों के लोग पूरी तरह निजी पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं। संकट का फायदा उठाकर निजी टैंकर ऑपरेटरों ने अपनी कीमतें दोगुनी कर दी हैं। जो टैंकर पहले 6,000 रुपये में मिलता था, उसके दाम अब 12,000 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गए हैं। पहले से ही रिकॉर्डतोड़ महंगाई झेल रही जनता के लिए पानी खरीदना एक बड़ा वित्तीय बोझ बन गया है। गरीब बस्तियों में लोग गधों और हाथगाड़ियों पर पानी ढोने को मजबूर हैं।

सिंधु जल समझौते का असर

पाकिस्तान में जल संकट का एक और बड़ा कारण सिंधु जल समझौता रद्द होना बताया जा रहा है। इसके कारण न केवल पानी की उपलब्धता में कमी आई है, बल्कि लोगों के जीवन पर भी इसका गंभीर असर पड़ा है। ऐसे में बकरीद जैसे त्योहारों पर जब लोगों को पानी की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है, स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।

आर्थिक प्रभाव

पानी की कमी का असर केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं है। कृषि, उद्योग और स्थानीय व्यापार पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा है। पानी के बिना फसलों की सिंचाई और उद्योग चलाना मुश्किल हो गया है, जिससे आर्थिक गतिविधियों में भी कमी आई है। बैंकिंग और बिजनेस सेक्टर भी चिंतित है।

जनता का आक्रोश

पानी की किल्लत ने कराची के लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है। लोग पानी की टैंकर सेवा के लिए लंबी कतारों में लगते हैं, और बहुत बार उन्हें पानी नहीं मिलता। इस संकट के चलते स्थानीय प्रशासन की योजनाओं पर भी सवाल उठने लगे हैं।

राजनीतिक और सामाजिक असंतोष

इस विफलता को लेकर कराची की जनता में सिंध सरकार और कराची वॉटर एंड सीवरेज कॉरपोरेशन (KWSC) के खिलाफ भारी गुस्सा है। विपक्ष और स्थानीय जमात-ए-इस्लामी प्रमुख हाफिज नईम ने पीपीपी सरकार पर शहर के बुनियादी ढांचे को आधुनिक न बनाने और त्यौहार के समय भी बुनियादी सुविधाएं न दे पाने का गंभीर आरोप लगाया है।

राजनीतिक पहल

आज इस मुद्दे पर कई राजनीतिक दल और नेता भी सक्रिय हो गए हैं। वे सरकार से त्वरित हल की मांग कर रहे हैं, ताकि लोगों को राहत मिल सके। लेकिन हालात यह बताते हैं कि समाधान इतनी जल्दी सामने नहीं आने वाला है।

भविष्य की चुनौती

पाकिस्तान में जल संकट केवल एक तत्काल समस्या नहीं है, बल्कि यह भविष्य के लिए भी एक चुनौती बनकर उभरेगा। अगर सरकारें और प्रशासन इसे समय रहते गंभीरता से नहीं लेंगे, तो हालात और भी बिगड़ सकते हैं। जल संकट की समस्या को सुलझाने के लिए जल संरक्षण और नए जल संसाधनों के प्रबंधन की आवश्यकता है।

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