जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी ने छात्रों के बढ़ते विरोध को देखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय ने ऑफलाइन क्लासेस को अब 8 नवंबर 2026 तक टाल दिया है। इसके साथ ही, सेकेंड मिड-टर्म सेमेस्टर की परीक्षाएं भी ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी। यह फैसला छात्रों की मांगों और प्रदर्शन के बीच आया है। छात्रों का कहना है कि जब तक छात्र संघ (JMISU) को बहाल नहीं किया जाता, तब तक उनकी चिंताएं दूर नहीं होंगी।
ऑनलाइन कक्षाओं का विस्तार
जामिया ने एक आदेश जारी करते हुए कहा है कि सभी कोर्स के लिए ऑनलाइन कक्षाएं 8 नवंबर तक जारी रहेंगी। इसके अलावा, दूसरे मिड-टर्म सेमेस्टर की परीक्षाएं भी ऑनलाइन ही आयोजित की जाएंगी। यह निर्णय वाइस चांसलर मजहर आसिफ की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद लिया गया। विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि डीन और विभागाध्यक्ष मिलकर ऑनलाइन परीक्षाओं का शेड्यूल तय करेंगे।
छात्रों का प्रदर्शन और उसकी वजह
जामिया में छात्रों का विरोध प्रदर्शन पिछले 16 दिनों से जारी है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब छात्रों ने 20 साल बाद छात्र संघ को बहाल करने की मांग की। छात्र संघ 2006 से भंग है। छात्रों ने शांतिपूर्ण धरना और प्रदर्शन शुरू किया, लेकिन जब प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो पांच छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने का निर्णय लिया।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
प्रशासन ने छात्रों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण छात्रों ने चुनाव के लिए एक निश्चित तारीख और संविधान को मंजूरी देने की मांग की। छात्रों का कहना है कि नए फैसले से उनकी चिंताएं दूर नहीं हुई हैं, क्योंकि इसमें संविधान की मंजूरी का कोई जिक्र नहीं है। हाल ही में, विश्वविद्यालय ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों को दिए गए निलंबन आदेशों को वापस ले लिया।
सुरक्षा और तनाव की स्थिति
जामिया में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। हाल ही में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प भी हुई है। पुलिस ने छात्रों को विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश करने से रोकने की कोशिश की। इस बीच, जामिया नगर में एक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें पूर्व छात्रों, शिक्षाविदों और वकीलों ने प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता जताई। उन्होंने बातचीत शुरू करने और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व बहाल करने की मांग की।
छात्रों की स्थिति और भविष्य की योजना
छात्रों ने प्रशासन से स्पष्टता की मांग की है कि संविधान को कब मंजूरी दी जाएगी। प्रशासन ने भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों में से एक को विरोध स्थल खाली करने का निर्देश दिया है। यदि वह ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इस स्थिति में छात्रों का मनोबल बना रहना चुनौतीपूर्ण है।
आगे की दिशा
जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों का यह आंदोलन शिक्षा के अधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण है। छात्रों का यह संघर्ष न केवल जामिया के लिए, बल्कि पूरे देश के छात्रों के लिए एक मिसाल बन सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि प्रशासन छात्रों की मांगों पर किस प्रकार की कार्रवाई करता है और क्या छात्र संघ की बहाली संभव हो पाएगी।
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