भारत में बढ़ी इंटरनेट डेटा की भूख, रोजाना करोड़ों GB की खपत; BSNL के स्वदेशी 4G ने संभाला 60 लाख GB डेटा

The CSR Journal Magazine

भारत में इंटरनेट डेटा खपत ने पकड़ी रफ्तार, रोजाना करोड़ों GB का इस्तेमाल; BSNL के स्वदेशी 4G नेटवर्क ने भी बनाया नया रिकॉर्ड

भारत में मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल लगातार तेजी से बढ़ रहा है। सस्ता और तेज डेटा, स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच, वीडियो स्ट्रीमिंग, सामाजिक माध्यम, ऑनलाइन भुगतान, डिजिटल सेवाओं और दूरस्थ कामकाज ने देश में डेटा की मांग को कई गुना बढ़ा दिया है। अप्रैल-जून 2026 की पहली तिमाही के आंकड़े भी इसी बदलती डिजिटल तस्वीर की पुष्टि करते हैं। खास तौर पर वोडाफोन आइडिया (Vi) के नेटवर्क पर प्रतिदिन डेटा खपत करीब 28 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि सरकारी दूरसंचार कंपनी BSNL के स्वदेशी 4G नेटवर्क ने प्रतिदिन करीब 6 पेटाबाइट डेटा संभालने की क्षमता हासिल कर ली है।

BSNL के स्वदेशी 4G नेटवर्क पर रोज 6 पेटाबाइट डेटा

BSNL के लिए यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उसका नया 4G नेटवर्क पूरी तरह विदेशी तकनीक पर निर्भर नहीं है। भारत में विकसित इस नेटवर्क में सी-डॉट (Centre for Development of Telematics) ने कोर नेटवर्क तकनीक उपलब्ध कराई है, जबकि टीसीएस के नेतृत्व वाले गठजोड़ में घरेलू कंपनी तेजस नेटवर्क्स रेडियो एक्सेस नेटवर्क से जुड़ी तकनीक उपलब्ध करा रही है।सी-डॉट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजकुमार उपाध्याय के अनुसार, BSNL के स्वदेशी 4G नेटवर्क पर प्रतिदिन करीब 6 पेटाबाइट डेटा का लेन-देन हो रहा है। नेटवर्क में करीब 1.75 लाख 4G बेस स्टेशन एक लाख साइटों पर लगाए गए हैं और इससे करोड़ों 4G ग्राहकों को सेवा मिल रही है। एक पेटाबाइट को सामान्य तौर पर करीब 10 लाख गीगाबाइट के बराबर माना जाता है। इस हिसाब से 6 पेटाबाइट लगभग 60 लाख गीगाबाइट प्रतिदिन के बराबर है। यानी BSNL का स्वदेशी 4G ढांचा अब रोजाना इतना बड़ा डेटा भार संभाल रहा है, जो सरकारी दूरसंचार नेटवर्क के विस्तार और उपयोग में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है।

केवल नेटवर्क लगाना नहीं, उसका इस्तेमाल बढ़ना भी अहम

BSNL के मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात सिर्फ 4G टावरों की संख्या बढ़ना नहीं है, बल्कि इन नेटवर्कों पर वास्तविक डेटा यातायात का बढ़ना है। इसका अर्थ है कि जहां-जहां स्वदेशी 4G नेटवर्क पहुंच रहा है, वहां ग्राहक इंटरनेट सेवाओं का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। BSNL पिछले कुछ समय से अपने 4G नेटवर्क के विस्तार पर जोर दे रहा है। कंपनी के लिए यह नेटवर्क इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय तक निजी कंपनियों के मुकाबले उसकी 4G सेवाओं का विस्तार धीमा रहा था। अब स्वदेशी तकनीक के सहारे नेटवर्क का विस्तार करने की कोशिश की जा रही है। सी-डॉट के अनुसार BSNL के 4G नेटवर्क में IP मल्टीमीडिया सबसिस्टम (IMS) भी तैनात किया गया है, जिसके माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाली आवाज सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। फिलहाल यह सुविधा कुछ दूरसंचार क्षेत्रों में लागू की गई है और आगे इसका विस्तार किया जाना है।

Vi के नेटवर्क पर रोज 8.84 करोड़ GB डेटा

दूसरी ओर, वोडाफोन आइडिया ने अप्रैल-जून 2026 यानी वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में डेटा खपत में तेज वृद्धि दर्ज की है। कंपनी के अनुसार, उसके नेटवर्क पर रोजाना डेटा इस्तेमाल 69.1 पेटाबाइट से बढ़कर 88.4 पेटाबाइट हो गया। यह सालाना आधार पर करीब 27.9 प्रतिशत की वृद्धि है। 88.4 पेटाबाइट को गीगाबाइट में देखें तो यह लगभग 8.84 करोड़ GB प्रतिदिन बैठता है। यानी Vi के नेटवर्क पर अकेले एक दिन में करीब 8 करोड़ 84 लाख गीगाबाइट डेटा का इस्तेमाल हो रहा है। कंपनी के 4G और 5G ग्राहकों की औसत मासिक डेटा खपत भी बढ़ी है। पहली तिमाही में यह आंकड़ा 21.7 GB प्रति ग्राहक प्रति माह रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 25.2 प्रतिशत अधिक है।

4G-5G ग्राहकों की संख्या में भी बढ़ोतरी

डेटा खपत में वृद्धि के पीछे सिर्फ ग्राहकों की संख्या बढ़ना ही कारण नहीं है। तेज नेटवर्क पर मौजूदा ग्राहक भी पहले से अधिक डेटा इस्तेमाल कर रहे हैं। Vi के 4G और 5G ग्राहकों की संख्या जून 2026 के अंत में 13.01 करोड़ रही, जबकि एक साल पहले यह संख्या करीब 12.74 करोड़ थी। कंपनी के कुल मोबाइल ग्राहक करीब 19.31 करोड़ रहे। Vi ने जून 2026 तक अपनी 4G आबादी कवरेज को बढ़ाकर करीब 87 प्रतिशत कर लिया था। वहीं 5G सेवा 17 प्राथमिक दूरसंचार क्षेत्रों के 200 से अधिक शहरों में उपलब्ध थी। नेटवर्क में किए गए निवेश और कवरेज विस्तार को कंपनी डेटा खपत में वृद्धि के प्रमुख कारणों में गिन रही है।

Jio और Airtel भी डेटा की दौड़ में आगे

भारत में डेटा खपत की तस्वीर सिर्फ BSNL और Vi तक सीमित नहीं है। रिलायंस Jio और भारती एयरटेल भी बड़े पैमाने पर डेटा यातायात संभाल रहे हैं। उपलब्ध तिमाही आंकड़ों के मुताबिक Jio ने अप्रैल-जून 2026 में करीब 69.4 एक्साबाइट कुल डेटा उपयोग दर्ज किया, जबकि एयरटेल का कुल डेटा उपयोग करीब 31,062 पेटाबाइट रहा। Jio का डेटा यातायात सालाना आधार पर करीब 26.9 प्रतिशत बढ़ा, जबकि एयरटेल की वृद्धि दर करीब 36 प्रतिशत बताई गई। इससे स्पष्ट है कि भारत में मोबाइल इंटरनेट का बाजार अब केवल नए ग्राहकों को जोड़ने की प्रतिस्पर्धा नहीं रह गया है। प्रति ग्राहक डेटा खपत, नेटवर्क की गुणवत्ता, 4G-5G कवरेज और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल भी कंपनियों की प्रतिस्पर्धा के महत्वपूर्ण आधार बन चुके हैं।

भारत में डेटा की भूख क्यों बढ़ रही है?

मोबाइल इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण वीडियो सामग्री है। लोग अब मनोरंजन के लिए केवल छोटे वीडियो नहीं देखते, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले लंबे वीडियो, फिल्में, खेल प्रसारण और सीधे प्रसारण भी मोबाइल नेटवर्क पर देखते हैं। इसके अलावा सामाजिक माध्यमों पर फोटो और वीडियो साझा करना, वीडियो कॉल, ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान, सरकारी सेवाएं, बैंकिंग, खरीदारी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सेवाएं और क्लाउड आधारित अनुप्रयोग भी डेटा खपत बढ़ा रहे हैं। 5G के विस्तार के साथ यह प्रवृत्ति आगे और तेज हो सकती है। अधिक गति और कम विलंबता के कारण उपभोक्ता ऐसी सेवाओं का इस्तेमाल करने लगते हैं जिनमें पहले मोबाइल डेटा की जरूरत अपेक्षाकृत कम थी।

गांवों में भी बढ़ रहा मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल

भारत की डिजिटल कहानी अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 के अंत तक देश में कुल ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 107.344 करोड़ थी। इनमें वायरलेस ब्रॉडबैंड ग्राहक 102.660 करोड़ से अधिक थे। इसी अवधि में ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल ग्राहकों की संख्या भी बढ़ी। यही वजह है कि देश में मोबाइल नेटवर्क कंपनियों के लिए ग्रामीण क्षेत्र भविष्य के डेटा बाजार का बड़ा आधार बनता जा रहा है। जैसे-जैसे गांवों में स्मार्टफोन और तेज मोबाइल नेटवर्क की पहुंच बढ़ती है, वैसे-वैसे डेटा खपत में भी वृद्धि की संभावना बनी हुई है।

BSNL के लिए स्वदेशी 4G इसलिए बड़ी उपलब्धि

BSNL के 6 पेटाबाइट प्रतिदिन डेटा यातायात को केवल एक कारोबारी आंकड़े के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता। इसका एक रणनीतिक महत्व भी है। भारत लंबे समय से दूरसंचार उपकरण और तकनीक के क्षेत्र में घरेलू क्षमता विकसित करने पर जोर दे रहा है। यदि घरेलू कंपनियां बड़े स्तर पर काम करने वाले 4G और आगे 5G नेटवर्क के लिए आवश्यक तकनीक विकसित करने में सफल होती हैं, तो भारत के लिए विदेशी तकनीकी निर्भरता कम करने का रास्ता खुल सकता है। साथ ही घरेलू दूरसंचार उपकरण उद्योग को बड़ा बाजार मिल सकता है। सी-डॉट के अनुसार स्वदेशी 5G रेडियो एक्सेस नेटवर्क तकनीक का BSNL के नेटवर्क पर परीक्षण भी चल रहा है। इसका सफल विकास और व्यावसायिक उपयोग भारत के दूरसंचार क्षेत्र के लिए अगला बड़ा कदम हो सकता है।

असली मुकाबला अब ग्राहक से ज्यादा डेटा का

दूरसंचार उद्योग में आने वाले वर्षों की प्रतिस्पर्धा केवल इस बात पर नहीं होगी कि किस कंपनी के पास कितने ग्राहक हैं। असली सवाल यह होगा कि किस कंपनी का नेटवर्क ग्राहक को बेहतर गति, अधिक कवरेज और लगातार अच्छी सेवा देते हुए अधिक डेटा संभाल सकता है। Vi के 88.4 पेटाबाइट प्रतिदिन और BSNL के 6 पेटाबाइट प्रतिदिन जैसे आंकड़े इसी बदलाव की ओर इशारा करते हैं। एक तरफ निजी कंपनियां बड़े पैमाने पर 4G और 5G नेटवर्क के माध्यम से ग्राहकों की बढ़ती डेटा जरूरत पूरी करने की कोशिश कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ BSNL स्वदेशी तकनीक के सहारे अपनी वापसी की जमीन तैयार कर रहा है। भारत सरकार के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण है। अप्रैल 2026 के अंत तक देश में कुल दूरसंचार ग्राहकों की संख्या करीब 133.75 करोड़ थी और वायरलेस मोबाइल ग्राहकों की संख्या 128.896 करोड़ से अधिक थी। इससे भारत के विशाल डिजिटल उपभोक्ता बाजार का अंदाजा लगाया जा सकता है।

बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था

भारत में इंटरनेट डेटा की बढ़ती खपत अब डिजिटल अर्थव्यवस्था की ताकत का प्रमुख संकेतक बन चुकी है। Vi का रोजाना 88.4 पेटाबाइट डेटा उपयोग और BSNL के स्वदेशी 4G नेटवर्क का रोजाना करीब 6 पेटाबाइट यातायात बताता है कि भारतीय उपभोक्ता पहले से कहीं अधिक मोबाइल इंटरनेट पर निर्भर हो चुके हैं। आने वाले समय में 5G का विस्तार, ग्रामीण इंटरनेट की पहुंच, वीडियो आधारित सेवाओं का प्रसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल भुगतान जैसे क्षेत्र डेटा की मांग को और बढ़ा सकते हैं। ऐसे में भारत के दूरसंचार क्षेत्र की अगली बड़ी चुनौती केवल ज्यादा नेटवर्क खड़ा करना नहीं, बल्कि विश्वसनीय, तेज, किफायती और स्वदेशी तकनीक पर आधारित नेटवर्क क्षमता तैयार करना होगी।

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