US से मोहभंग: 40% भारतीय क्यों छोड़ना चाहते हैं अमेरिका? Carnegie Survey का बड़ा खुलासा

The CSR Journal Magazine
कार्नेगी एंडोमेंट के एक हालिया सर्वे के अनुसार, 40% भारतीय अमेरिका छोड़ने के बारे में गंभीरता से सोच रहे हैं। यह आंकड़ा निश्चित रूप से विचार करने योग्य है। इस सर्वे में राजनीतिक मोहभंग, जटिल इमिग्रेशन प्रक्रिया, बढ़ती महंगाई और भेदभाव जैसे प्रमुख कारणों की ओर इशारा किया गया है। अब ‘अमेरिकन ड्रीम’ का सपना दस्तक दे चुका है, जिससे कई भारतीय खुद को अस्थिरता महसूस कर रहे हैं।

सर्वे का वास्तविकता से भरा परिणाम

फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच हुए इस सर्वे में यह बात सामने आई कि भारतीय-अमेरिकन समुदाय एक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। लगभग 40% भारतीय अमेरिकी अब इस बारे में गंभीरता से विचार कर रहे हैं कि उन्हें अमेरिका छोड़ देना चाहिए। यह आंकड़ा कहीं ना कहीं इनकी चिंताओं को उजागर करता है, जो अमेरिका के कुल जनसंख्या का 1.5% होने के बावजूद 6% टैक्स बेस का योगदान देता है।

राजनीतिक माहौल का असंतोष

सर्वे में शामिल 58% लोगों ने ‘राजनीतिक माहौल’ को सबसे बड़ी वजह बताया है। डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान घरेलू ध्रुवीकरण ने भारतीयों को बेचैन कर दिया है। 71% भारतीय अमेरिकी ट्रंप की नीतियों से असंतुष्ट हैं। धार्मिक समावेश और अपनेपन की भावना में कमी ने इस समुदाय को असुरक्षित महसूस कराया है।

डेमोक्रेटिक पार्टी से घटता भरोसा

2020 में 52% भारतीय अपने आपको डेमोक्रेट मानते थे, लेकिन अब यह आंकड़ा घटकर 46% रह गया है। इसी कारण 30% भारतीय अब स्वतंत्र विचारधारा की तरफ झुक रहे हैं। यह दर्शाता है कि भारतीय समुदाय अब अपने हितों के लिए किसी भी पार्टी के समर्थन की बजाय अपने जीवन की मूलभूत जरूरतों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

इमिग्रेशन का कलंक

भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के लिए ग्रेन कार्ड की प्राप्ति आज एक कठिन और लम्बी प्रक्रिया बन गई है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीयों का टेम्पोररी वीजा प्रोग्राम अब खत्म हो चुका है। कई लोगों के अनुसार, इसके लिए इंतजार अब 30 से 40 साल तक बढ़ चुका है। इस स्थिति ने कई प्रतिभाशाली भारतीयों को अन्य देशों की ओर बढ़ने पर मजबूर कर दिया है।

महंगाई और भेदभाव की बढ़ती चिंताएं

महंगाई की चिंताओं के अलावा, ‘हेट क्राइम’ और भेदभाव ने भी स्थिति को और कठिन बना दिया है। अमेरिका में बच्चों की परवरिश का खर्च लगभग $301,970 आता है, जो भारतीय समुदाय के लिए एक बड़ा बोझ है। घर की बढ़ती कीमतें और दूसरे खर्चों ने मध्यमवर्गीय भारतीय परिवारों की स्थिति को जटिल बना दिया है।

भारत की ओर पलायन

भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था अब एक नया चुम्बक बन रही है। युवा पेशेवर आज बेंगलुरु, हैदराबाद या गुड़गांव में उन सुविधाओं की तलाश कर रहे हैं, जो उन्हें अमेरिका में चाहिए थीं। ‘रिवर्स ब्रेन ड्रेन’ की अवधारणा अब एक वास्तविकता बन चुकी है। कई लोग अपने देश लौटने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

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