अमेरिकी सेना ने नक्शे में PoK को पाकिस्तान में दिखाया, भारत में विरोध तेज

The CSR Journal Magazine

 भारत के संप्रभु नक्शे से छेड़छाड़: PoK को बताया पाकिस्तान का हिस्सा, अमेरिकी रक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही पर उठे सवाल

अमेरिकी रक्षा विभाग (यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड) द्वारा जारी एक हालिया ग्राफिक/नक्शे में जम्मू-कश्मीर के पूरे हिस्से को भारत का अंग न दिखाते हुए PoK (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) को पाकिस्तान का हिस्सा प्रदर्शित किया गया है, जिसके कारण भारत में तीव्र नाराजगी और विवाद खड़ा हो गया है.

अमेरिकी रक्षा विभाग का विवादास्पद नक्शा

हाल ही में अमेरिकी रक्षा विभाग ने ‘इंडो-पैसिफिक कमांड’ का नाम बदलकर ‘यूएस पैसिफिक कमांड’ कर दिया है। इस बदलाव के साथ एक नक्शा भी जारी किया गया है, जिसमें जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को भारत से अलग दिखाया गया है। यह नक्शा भारत में एक नया विवाद पैदा कर रहा है। भारत ने अभी तक इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

क्या है पूरा मामला?

16 जून 2026 को अमेरिकी रक्षा विभाग ने USPACOM का पुराना नाम बहाल करते हुए एक नई जानकारी जारी की। अमेरिकी सेना के इंडो-पैसिफिक कमांड ने एक आधिकारिक ग्राफिक जारी किया, जिसमें भारत के भौगोलिक नक्शे से छेड़छाड़ की गई थी। इस नक्शे में पूरे जम्मू-कश्मीर को भारतीय क्षेत्र के रूप में नहीं दिखाया गया और PoK को पाकिस्तान के प्रशासनिक हिस्से के रूप में दर्शाया गया। भारत आधिकारिक तौर पर पूरे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख (PoK और अक्साई चिन सहित) को अपना अभिन्न अंग मानता है। नए नक्शे में भारत को हल्के हरे रंग में दिखाया गया है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के उत्तरी और पश्चिमी हिस्से (PoK) को इसे मुख्य नक्शे से बाहर रखा गया है।

काली रेखा का रहस्य

नक्शे में भारतीय सीमा के बीच से एक काली रेखा गुजर रही है, जो अमेरिकी सैन्य कमांड क्षेत्रों को विभाजित करती दिखती है। भारतीय नजरिए से, यह नक्शा पूरी तरह से गलत और अस्वीकार्य है। भारत अपना पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र अखंड मानता है, और किसी भी नक्शे में इसकी गणना नहीं होना एक बड़ी गलती है। इस नक्शे में भारत की संप्रभुता को सीधे तौर पर चुनौती दी गई है।

फरवरी 2026 का घटनाक्रम

इससे पहले फरवरी 2026 में इसके बिल्कुल विपरीत स्थिति देखी गई थी, जिसने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक हलचल बढ़ा दी थी। फरवरी में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) कार्यालय ने एक नक्शा जारी किया था जिसमें PoK और अक्साई चिन को भारत का हिस्सा दिखाया गया था। पाकिस्तान ने इस पर गहरी आपत्ति जताई और अमेरिकी अधिकारियों से आधिकारिक शिकायत की। पाकिस्तान के कड़े कूटनीतिक विरोध के बाद अमेरिका ने उस व्यापार संबंधी पोस्ट और नक्शे को अपने सोशल मीडिया हैंडल से हटा लिया था

ट्रंप प्रशासन का नाम परिवर्तन

2018 में ट्रंप प्रशासन ने पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर इंडो-पैसिफिक कमांड किया था, जिससे भारत की भूमिका को मान्यता मिली थी। अब 2026 में ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में यह नाम फिर से USPACOM किया गया है, जो सवाल खड़ा करता है कि क्या यह कदम भारत की रणनीतिक अहमियत को कम करने का संकेत है।

भारत का रुख

इस मामले पर भारत सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय अमेरिका के साथ इन मुद्दों पर लगातार संपर्क में रहते हैं। भारत हमेशा यह स्पष्ट करता रहा है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न अंग है। इसलिए कोई भी नक्शा इस तथ्य को चुनौती नहीं दे सकता।

भारत की संवैधानिक स्थिति

भारत सरकार हमेशा यह स्पष्ट करती आई है कि 1947 के विलय पत्र के अनुसार पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का संप्रभु हिस्सा है। भारत PoK (करीब 78,000 वर्ग किमी) पर पाकिस्तान के नियंत्रण को पूरी तरह अवैध और अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ मानता है। भारत के आधिकारिक मानचित्रों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या विदेशी ताकतों द्वारा गलत नक्शे दिखाए जाने का भारत हमेशा कड़ा विरोध करता है।

US-Pakistan संबंधों में गर्माहट

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच हालिया गर्मजोशी से यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया है। अमेरिकी नक्शे अक्सर ‘de facto control’ के आधार पर बनाए जाते हैं, लेकिन आधिकारिक रूप से भारत की स्थिति का सम्मान करना आवश्यक है। भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग के बावजूद, यह घटना कूटनीतिक सावधानियों को उजागर करती है।

भारत का दावा और अंतरराष्ट्रीय मंच

पीओके पर भारत का दावा स्पष्ट है, और वह इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार उठाता रहा है। यह स्थिति भारत-यूएस संबंधों में एक नया मोड़ देता है, जो सामान्यतः रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं। हालांकि, इस मामले ने उन संवेदनशीलताओं को उजागर किया है, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अमेरिका द्वारा बार-बार मानचित्रों में किए जाने वाले इन बदलावों को कूटनीतिक जानकार कभी ‘तकनीकी भूल’ तो कभी दक्षिण एशिया में संतुलन साधने का ‘रणनीतिक प्रयास’ मानते हैं।

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