दिल्ली में राहुल गांधी का हाई-वोल्टेज प्रोटेस्ट, कई विपक्षी सांसद हुए डिटेन, ‘ज्ञानेश, अब बस करो!’ का नारा लगाते दिखे राहुल गांधी
राजधानी दिल्ली की सड़कों पर आज विपक्ष और सरकार के बीच एक अभूतपूर्व और हाई-वोल्टेज राजनीतिक टकराव देखने को मिला। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और ‘INDIA’ गठबंधन के सैकड़ों सांसदों ने संसद भवन से निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग मुख्यालय) की ओर एक विशाल मार्च निकाला। सुरक्षा बलों द्वारा मार्च रोके जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, और अखिलेश यादव समेत कई वरिष्ठ विपक्षी सांसदों को हिरासत में ले लिया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी का एक खास प्लेकार्ड सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर लिखा है- ‘ज्ञानेश, अब बस करो!’ (Gyanesh, it’s done bro. Time to resign)।
‘INDIA’ गठबंधन का ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च और हंगामा
संसद के मकर द्वार से सुबह शुरू हुए इस मार्च में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (TMC), और वामपंथी दलों सहित कुल 19 विपक्षी पार्टियों के 200 से अधिक सांसद शामिल हुए। विपक्षी नेता अपने हाथों में “लोकतंत्र बचाओ” के बैनर, काले झंडे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ स्लोगन लिखे हुए प्लेकार्ड्स थामे हुए थे। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग वर्तमान सरकार के इशारे पर काम कर रहा है और देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को पूरी तरह से “हाइजैक” कर लिया गया है। जैसे ही यह मार्च नीति आयोग कार्यालय और आकाशवाणी भवन के पास पहुंचा, पहले से मुस्तैद दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों ने भारी बैरिकेडिंग करके सांसदों को आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस की इस कार्रवाई से नाराज होकर राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।
बैरिकेड पर चढ़े राहुल गांधी, लहराया तिरंगा
इस विरोध प्रदर्शन का सबसे नाटकीय और हाई-वोल्टेज नजारा तब देखने को मिला जब राहुल गांधी अचानक पुलिस की बहुस्तरीय बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। उन्होंने बैरिकेड के शीर्ष पर खड़े होकर देश का राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) लहराया, जिसे देखकर प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का जोश दोगुना हो गया। उनके ठीक बगल में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी बैरिकेड्स पार करने की कोशिश करते दिखे। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों और विपक्षी नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी हुई।
‘ज्ञानेश, अब बस करो!’ के नारे और प्लेकार्ड का सच
प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने एक विशेष प्लेकार्ड हवा में लहराया, जिस पर अंग्रेजी में लिखा था- “Gyanesh, it’s done bro. Time to resign” (ज्ञानेश, अब बस करो भाई! अब इस्तीफे का समय आ गया है)। राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। विपक्ष के अन्य सांसदों ने भी “वोट चोर, गद्दी छोड़” और “BJP है CEC है” जैसे तीखे नारे लगाए। विपक्ष का यह तीखा गुस्सा चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों में किए जा रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) और फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को लेकर है। राहुल गांधी का दावा है कि इस प्रक्रिया के जरिए देश के करोड़ों वैध मतदाताओं, खासकर गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यकों के नाम जानबूझकर मतदाता सूची से काटे जा रहे हैं, जिसे उन्होंने “भारतीय राजनीतिक इतिहास का सबसे बड़ा वोट-चोरी घोटाला” करार दिया है।
मुख्य विपक्षी नेताओं को पुलिस ने किया डिटेन
जैसे ही स्थिति अनियंत्रित होने लगी, दिल्ली पुलिस ने धारा 144 और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए नेताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। पुलिस ने सबसे पहले बैरिकेड्स पर डटे सांसदों को जबरन हटाकर बसों में बिठाया। हिरासत में लिए जाने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल हैं:
• राहुल गांधी (नेता प्रतिपक्ष, लोकसभा)
• प्रियंका गांधी वाड्रा (कांग्रेस नेता)
• अखिलेश यादव (सपा प्रमुख)
• अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ’ब्रायन (TMC)
• संजय राउत (शिवसेना – UBT) और सागरिका घोष (TMC)
• जॉन ब्रिटास (CPI-M)
एक तरफ जहां कई नेताओं को बसों में भरकर ले जाया गया, वहीं राहुल गांधी ने एक नई रणनीति के तहत कुछ समय के लिए आकाशवाणी भवन परिसर के भीतर शरण लेकर अपना विरोध दर्ज कराना जारी रखा। हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी ने मीडिया से कहा, “यह लड़ाई राजनीतिक नहीं है, यह देश के संविधान और ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के अधिकार को बचाने की लड़ाई है। एक लाठी भीड़ को रोक सकती है, लेकिन जनता के वाजिब सवालों को नहीं दबा सकती।”
विवाद की असल वजह: ‘SIR’ प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
इस पूरे विवाद की जड़ में चुनाव आयोग की विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया है। विपक्ष ने हाल ही में आई मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला दिया, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के तीन सदस्यों में से दो ने इस प्रक्रिया और फॉर्म-6 में किए गए संशोधनों पर कम से कम 14 बार अपनी लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी। विपक्ष का आरोप है कि 2025 से शुरू हुई इस कवायद में अब तक देश के लगभग 13 करोड़ नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इस मामले को तब और हवा मिली जब देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने एक दिन पहले ही यह स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म-6 में किसी भी प्रकार के संशोधन को अपनी मंजूरी नहीं दी है और अदालत अब चुनाव आयोग के रिकॉर्ड की जांच करेगी कि ये बदलाव किसके आदेश पर किए गए। इसी टिप्पणी को आधार बनाकर विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीधे मोर्चेबंदी कर दी है।
बीजेपी का पलटवार: “संस्थाओं को कमजोर करने की नौटंकी”
विपक्ष के इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और मार्च पर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी प्रवक्ताओं ने इसे विपक्ष की “राजनीतिक नौटंकी” करार दिया है, जिसका मकसद आसन्न चुनावों में अपनी संभावित हार का ठीकरा पहले से ही संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ना है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संस्था है और मतदाता सूची का संशोधन एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है, ताकि फर्जी मतदाताओं के नामों को हटाया जा सके। सरकार ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और उनके सहयोगी जानबूझकर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की साख को दुनिया के सामने गिराने का प्रयास कर रहे हैं।
आगे क्या? आंदोलन को और तेज करेगा विपक्ष
दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए सभी सांसदों को करीब दो घंटे बाद रिहा कर दिया गया, लेकिन राजनीतिक सरगर्मी थमने का नाम नहीं ले रही है। ‘INDIA’ गठबंधन ने साफ कर दिया है कि यह विरोध प्रदर्शन तो सिर्फ एक शुरुआत थी। विपक्षी दलों ने घोषणा की है कि वे इस ‘वोट-चोरी’ के मुद्दे को लेकर देश के हर राज्य और जिले में जाएंगे। आगामी 1 नवंबर को दिल्ली में एक महा-रैली आयोजित करने की भी योजना है, जहां विपक्ष एकजुट होकर सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी ताकत का प्रदर्शन करेगा।
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